एक अद्भुत चमत्कार
भीलवाड़ा के निकट पुर क्षेत्र में स्थित अधरशिला महादेव मंदिर अपनी वास्तुकला और करीब 1200 साल पुराने इतिहास की वजह से लोगों के बीच कौतूहल का विषय बना हुआ है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह एक विशाल चट्टान पर टिका हुआ है और इसे देखने पर ऐसा आभास होता है कि पूरा मंदिर हवा में तैर रहा है।
श्रद्धा और आस्था का केंद्र
मंदिर के गर्भगृह में शिव पंचायत स्थापित है। स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं का मानना है कि शिवलिंग के ऊपर स्थित शिला बिना किसी आधार या सहारे के हवा में स्थित है। लोक मान्यताओं के अनुसार, जो भी भक्त यहाँ आकर भगवान भोलेनाथ का अभिषेक और पूजन करते हैं, उनके सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
पर्यटन और धार्मिक महत्व
स्थानीय निवासी महिंद्र पायक के अनुसार, इस पवित्र स्थल पर राजस्थान के अलावा मध्य प्रदेश से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। मंदिर में दैनिक दिनचर्या के तहत भगवान शिव का सहस्त्रधारा अभिषेक और विशेष धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। धार्मिक पर्यटन के लिहाज से यह जगह पर्यटकों को भी अपनी ओर खींचती है।
मंदिर परिसर की विशेषताएं
इस अद्भुत मंदिर के परिसर में ही श्री चौरंगी नाथ महाराज की जीवित समाधि भी स्थित है। अपनी प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक वातावरण के कारण यह स्थान आज एक प्रमुख तीर्थ और दर्शनीय स्थल के रूप में पहचान बना चुका है।
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