ताइवान स्ट्रेट के नजदीक चीन की सैन्य गतिविधियों को लेकर एक अहम जानकारी सामने आई है। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने अपने नए और आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम HQ-16F का कामयाब परीक्षण किया है। लाइव फायर ट्रायल के दौरान इस प्रणाली ने एक स्टील्थ टारगेट ड्रोन को सफलतापूर्वक मार गिराया। सबसे खास बात यह रही कि इसकी मारक क्षमता को पहले की तुलना में लगभग चार गुना तक बढ़ा दिया गया है, जिसे चीन की हवाई सुरक्षा में बड़ी बढ़ोतरी के तौर पर देखा जा रहा है।
इसके बावजूद रेंज और रफ्तार के मामले में HQ-16F रूसी S-400 के मुकाबले काफी पीछे ठहरता है। साथ ही यह भी स्पष्ट नहीं है कि चीन की यह प्रणाली ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल को इंटरसेप्ट करने में सक्षम है या नहीं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ब्रह्मोस मिसाइल चीन की HQ सीरीज की वायु सुरक्षा प्रणाली को पहले ही मात दे चुकी है। गौरतलब है कि चीन ने पाकिस्तान को यही HQ सीरीज का एयर डिफेंस सिस्टम बेचा है।
भारत की मजबूत होती हवाई सुरक्षा से चीन की बेचैनी
भारत को रूस से S-400 एयर डिफेंस सिस्टम का चौथा स्क्वाड्रन मिल चुका है। इसके साथ ही अपने हवाई क्षेत्र को नाकाबिल बनाने के लिए भारतीय रक्षा वैज्ञानिक प्रोजेक्ट कुश के तहत स्वदेशी एयर डिफेंस प्रणाली भी विकसित कर रहे हैं। चीनी HQ-9 एयर डिफेंस को चकमा देने वाली ब्रह्मोस मिसाइल ऑपरेशन सिंदूर में अपनी क्षमता साबित कर चुकी है और अब वियतनाम के साथ इसका सौदा होने वाला है।
फिलीपींस पहले ही ब्रह्मोस खरीद चुका है, जबकि वियतनाम भारत से इस मिसाइल को खरीदने की योजना बना रहा है। अन्य पूर्वी एशियाई देशों ने भी इसमें गहरी दिलचस्पी दिखाई है। दक्षिण चीन सागर क्षेत्र में बदलते हालात के बीच यही वजह है कि चीन बौखलाहट में नजर आ रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि खुद को ब्रह्मोस से घिरता देखकर चीन अपनी वायु सुरक्षा प्रणाली की ताकत का प्रदर्शन कर रहा है।
ताइवान स्ट्रेट के पास हुआ परीक्षण
‘मिलिट्री वॉच’ की रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्वी थिएटर कमांड की 73वीं ग्रुप आर्मी ने उत्तर-पश्चिमी रेगिस्तानी इलाके में यह ट्रायल किया। यह यूनिट चीन के फुजियान प्रांत में तैनात है, जो ताइवान स्ट्रेट के बेहद करीब है। ताइवान को लेकर बढ़ते तनाव के बीच इस इलाके को संभावित टकराव का सबसे संवेदनशील मोर्चा माना जाता है। यही कारण है कि HQ-16F की पहली तैनाती भी प्राथमिकता के आधार पर इसी क्षेत्र में की गई है।
रिपोर्ट बताती है कि नए HQ-16F सिस्टम को शंघाई एकेडमी ऑफ स्पेसफ्लाइट टेक्नोलॉजी ने विकसित किया है। इसके लॉन्चर का बाहरी रूप भले ही पुराने HQ-16 जैसा हो, लेकिन मिसाइल का डिजाइन पूरी तरह नया है। इसमें पतला और लगभग बिना टेल वाला ढांचा इस्तेमाल हुआ है, जो इसे HQ-16A, B और C वेरिएंट से अलग पहचान देता है।
रेंज में सबसे बड़ा बदलाव
सबसे बड़ा फर्क इसकी रेंज में देखने को मिला है। HQ-16A की अधिकतम मारक क्षमता 40 किलोमीटर थी, वहीं HQ-16B और HQ-16C करीब 70 किलोमीटर तक लक्ष्य भेद सकते थे। इसके मुकाबले HQ-16F अब 160 किलोमीटर तक के हवाई ठिकानों को निशाना बना सकता है। यानी नए संस्करण ने अपने पुराने मॉडल की तुलना में करीब 229 प्रतिशत अधिक रेंज हासिल कर ली है। खास बात यह है कि यह उपलब्धि लॉन्चिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े बदलाव के बिना ही पाई गई है, जिससे मौजूदा सिस्टम के साथ इसकी संगतता बरकरार रहती है।
तकनीकी रूप से HQ-16F अब भी रडार डायरेक्टेड इंटरसेप्शन तकनीक पर काम करता है, मगर इसमें आधुनिक डाटा लिंक और कमांड गाइडेंस फीचर्स जोड़े गए हैं। यह प्रणाली लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों, ड्रोन, क्रूज मिसाइलों और कुछ हद तक सामरिक बैलिस्टिक मिसाइलों को भी निशाना बनाने में सक्षम मानी जा रही है।
वर्टिकल लॉन्च सिस्टम की खूबी
HQ-16F की एक और बड़ी विशेषता इसका वर्टिकल लॉन्च सिस्टम है। इस तकनीक के चलते मिसाइल बैटरी को लक्ष्य की ओर घुमाने की जरूरत नहीं पड़ती और सिस्टम किसी भी दिशा से आने वाले खतरे पर तुरंत जवाब दे सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह क्षमता खासकर ड्रोन झुंड, मिसाइल सैल्वो और कई दिशाओं से होने वाले हवाई हमलों के खिलाफ कारगर साबित हो सकती है।
विश्लेषकों के अनुसार, HQ-16F अब मध्यम दूरी और लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणालियों के बीच की पारंपरिक सीमा को धुंधला कर रहा है। इसकी रेंज चीन के HQ-22 और शुरुआती HQ-9 संस्करणों से भी अधिक बताई जा रही है। केवल HQ-9B, HQ-19 और HQ-29 जैसी उन्नत प्रणालियां ही इससे अधिक दूरी तक लक्ष्य भेद सकती हैं।
ताइवान को लेकर बदलता समीकरण
चीन के इस कदम को ताइवान स्ट्रेट में बदलते रणनीतिक समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है। बीते कुछ वर्षों में अमेरिका ने ताइवान को HIMARS रॉकेट सिस्टम और ATACMS बैलिस्टिक मिसाइलें मुहैया कराई हैं। चीन का दावा है कि ये हथियार फुजियान प्रांत और उसके सैन्य ठिकानों के लिए सीधा खतरा बन सकते हैं। इसके अलावा ताइवान के रक्षा मंत्रालय द्वारा संयुक्त फायरपावर कोऑर्डिनेशन सेंटर बनाने और अमेरिकी सैन्य सहयोग बढ़ने से बीजिंग की चिंताएं और गहरा गई हैं।
ऐसे माहौल में HQ-16F की तैनाती को महज एक तकनीकी उन्नयन नहीं, बल्कि ताइवान स्ट्रेट में चीन की व्यापक सैन्य रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। यह साफ संकेत है कि बीजिंग संभावित हवाई और मिसाइल खतरों से निपटने के लिए अपनी बहुस्तरीय वायु रक्षा प्रणाली को तेजी से मजबूत कर रहा है।
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