तेलंगाना सरकार ने जमीन और संपत्तियों के मूल्यांकन की प्रक्रिया को ज्यादा व्यवस्थित, सटीक और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इसके लिए राज्य में नया 4-टियर प्रॉपर्टी स्ट्रक्चर लागू करने की तैयारी की जा रही है। इस नई व्यवस्था के तहत कृषि और गैर-कृषि, दोनों श्रेणियों की संपत्तियों को अलग-अलग वर्गों में बांटा जाएगा, जिसका सीधा असर उनकी बाजार कीमत और पंजीकरण मूल्य पर पड़ सकता है।
क्या है नई व्यवस्था का मकसद
नई प्रणाली का मुख्य उद्देश्य संपत्तियों का मूल्य निर्धारण वास्तविक बाजार दरों के अनुरूप करना है। अब तक कई इलाकों में दर्ज मूल्य और असल बाजार कीमत के बीच बड़ा अंतर देखने को मिलता रहा है। सरकार चाहती है कि यह फर्क कम हो और मूल्यांकन जमीनी हकीकत के करीब पहुंचे। इसके साथ ही इस बदलाव से राज्य के राजस्व संग्रह को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
कैसे होगा संपत्तियों का वर्गीकरण
इस मॉडल के अंतर्गत संपत्तियों को उनकी प्रकृति और उपयोग के आधार पर श्रेणियों में बांटा जाएगा। कृषि भूमि और गैर-कृषि संपत्तियों को अलग-अलग वर्गों में रखकर उनका मूल्यांकन किया जाएगा। इस वर्गीकरण से हर श्रेणी की कीमत को अधिक स्पष्ट और तर्कसंगत तरीके से तय किया जा सकेगा।
क्या बढ़ेंगी कीमतें
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव के लागू होने के बाद कई क्षेत्रों में कृषि भूमि और गैर-कृषि संपत्तियों के दामों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। चूंकि मूल्यांकन अब बाजार दरों के करीब होगा, इसलिए कई इलाकों में दर्ज मूल्य पहले से ऊंचा हो सकता है।
खरीद-बिक्री और रजिस्ट्रेशन पर असर
संपत्तियों के मूल्य में संभावित बढ़ोतरी का सीधा असर खरीद-बिक्री और रजिस्ट्रेशन की लागत पर पड़ेगा। ऐसे में जो लोग आने वाले समय में जमीन या संपत्ति खरीदने या बेचने की योजना बना रहे हैं, उन्हें इस नई व्यवस्था और बदलते मूल्यांकन को ध्यान में रखना होगा।
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