नाग पंचमी 2026: आखिर क्यों मनाई जाती है गुड़िया पीटने की अनोखी परंपरा, जानिए इसके पीछे की पौराणिक कथा

17 अगस्त 2026 को नाग पंचमी का पर्व श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में प्रचलित 'गुड़िया पीटने' की परंपरा के पीछे की पौराणिक मान्यताओं को विस्तार से जानें।

नाग पंचमी की परंपरा और गुड़िया पीटने का महत्व

आगामी 17 अगस्त 2026 को देशभर में नाग पंचमी का पावन त्यौहार धूमधाम से मनाया जाएगा। इस दिन मुख्य रूप से नाग देवता और भगवान शिव की आराधना की जाती है। हालांकि, जहां एक ओर देश के विभिन्न हिस्सों में भक्त नाग देवता की विधिवत पूजा करते हैं, वहीं उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में इस दिन एक बेहद अनूठी लोक परंपरा निभाई जाती है, जिसे 'गुड़िया पीटने' की रस्म कहा जाता है। इस दिन लड़कियां विशेष रूप से कपड़े से गुड़िया तैयार करती हैं और उन्हें किसी चौराहे या तालाब के पास रखती हैं। इसके बाद लड़कों द्वारा उन गुड़ियों को डंडों से पीटा जाता है। क्या आप जानते हैं कि आखिर इस विचित्र परंपरा के पीछे क्या कारण है और इसके साथ कौन सी पौराणिक कथा जुड़ी है?

गुड़िया पीटने की रस्म के पीछे की पौराणिक कथा

लोक मान्यताओं के अनुसार, इस परंपरा के पीछे एक भाई और बहन की कहानी प्रचलित है। बताया जाता है कि एक लड़की का भाई भगवान शिव का अनन्य भक्त था, जो प्रतिदिन मंदिर जाकर नाग देवता के दर्शन किया करता था। एक दिन जब वह मंदिर पहुंचा, तो नाग हमेशा की तरह उसके पैरों से लिपट गए। अपनी ओर आते हुए सांप को देखकर वह लड़की बुरी तरह घबरा गई और उसे लगा कि सांप उसके भाई को डसने वाला है।

अपने भाई की जान बचाने की हड़बड़ाहट में उस बहन ने सांप को डंडों से पीट-पीटकर मार डाला। बाद में जब भाई ने उसे सारी सच्चाई बताई और यह स्पष्ट किया कि नाग तो भगवान का अंश हैं और उन्हें नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए था, तब बहन को अपनी गलती का गहरा अहसास हुआ और वह पश्चाताप में रोने लगी। तब वहां उपस्थित लोगों ने निर्णय लिया कि चूँकि यह अनजाने में हुई भूल है, अतः प्रायश्चित स्वरूप आज से हर वर्ष नाग पंचमी के दिन उस लड़की के स्थान पर कपड़े की गुड़िया को पीटा जाएगा। तभी से यह परंपरा चली आ रही है।

नाग पंचमी के दिन कैसे करें नाग देवता की पूजा

नाग पंचमी के दिन नाग देवता का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए भक्त निम्नलिखित विधि का पालन कर सकते हैं:

  • इस दिन नाग देवता को गाय का शुद्ध दूध, सफेद फूल, धूप और धान का लावा अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • काल सर्प दोष जैसे प्रभावों से मुक्ति पाने के लिए ओम वकुल नागाय विद्महे विषदंताय धीमहि, तन्नो सर्प: प्रचोदयात् मंत्र का निरंतर जाप करना चाहिए।
  • नाग देवता की प्रतिमा पर तांबे के लोटे से जल और दूध का अभिषेक करें।
  • यदि संभव हो, तो किसी मंदिर में नाग-नागिन का जोड़ा स्थापित करके उनका अभिषेक और पूजा करें।
  • भक्त मिट्टी से निर्मित नाग-नागिन के जोड़ों की भी घर पर पूजा कर सकते हैं, जिससे मान्यता है कि भगवान शिव और नाग देवता दोनों प्रसन्न होते हैं।

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