मजाक में लगी थी पहली हाट, अब हर गुरुवार हजारों का कारोबार — महिलाओं ने रची आत्मनिर्भरता की कहानी

चैनपुर के चेडाबार गांव में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा 2022 में शुरू किया गया ग्रामीण हाट आज आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गया है, जहां हर गुरुवार सब्जियों से लेकर रोजमर्रा का सामान बिकता है।

आज की महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कमतर नहीं रहीं। शिक्षा, खेती, कारोबार, विज्ञान, खेल, राजनीति और सामाजिक नेतृत्व — हर मैदान में वे अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। उन्हें बस सही मौका, मंच और हौसला देने की जरूरत होती है। जब महिलाओं को संसाधन, प्रशिक्षण और आगे बढ़ने का अवसर मिलता है, तो वे अपने परिवार की माली हालत मजबूत करने के साथ-साथ समाज और देश के विकास में भी अहम भूमिका निभाती हैं। चैनपुर के चेडाबार गांव का ग्रामीण हाट इसी सच्चाई की जीती-जागती तस्वीर है, जहां स्वयं सहायता समूह की महिलाएं अपनी मेहनत और सामूहिक हौसले से कामयाबी की नई इबारत लिख रही हैं।

घर की चारदीवारी से निकलकर बाजार तक

चैनपुर प्रखंड के चेडाबार गांव में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के संचालन में चलने वाला यह ग्रामीण हाट आज महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की नई पहचान बनकर सामने आया है। सरकारी योजनाओं का फायदा उठाकर ये ग्रामीण महिलाएं न सिर्फ अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूती दे रही हैं, बल्कि समाज में अपनी अलग छाप भी छोड़ रही हैं। दीदी बाड़ी योजना जैसी पहलों ने महिलाओं को सब्जी उत्पादन से जोड़कर स्वरोजगार की राह दिखाई है। कभी घर की देहरी तक सिमटी रहने वाली महिलाएं आज पूरा बाजार संभाल रही हैं और परिवार की आमदनी बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रही हैं।

सरकारी योजनाओं ने बदली तस्वीर

इस ग्रामीण हाट की सफलता के पीछे स्वयं सहायता समूहों की सक्रियता और सरकारी योजनाओं का बड़ा हाथ है। महिलाओं ने दीदी बाड़ी योजना के तहत सब्जी की खेती की शुरुआत की और अपनी उपज के लिए स्थानीय स्तर पर ही बाजार खड़ा कर लिया। इसका नतीजा यह हुआ कि उन्हें अपना सामान बेचने के लिए दूर के शहरों का रुख नहीं करना पड़ता। गांव में ही बाजार मिल जाने से समय और खर्च दोनों की बचत हो रही है। साथ ही, ग्रामीणों को ताजी सब्जियां और जरूरी सामान भी अपने ही गांव में सहज उपलब्ध हो जाता है।

एक बैठक से जन्मी अनोखी पहल

सुनीता देवी ने बताया कि बटुआ की इस ग्रामीण हाट की नींव वर्ष 2022 में एक मामूली बैठक के दौरान पड़ी थी। स्वयं सहायता समूह की महिलाएं बैठक कर रही थीं, तभी एक महिला ने कहा कि उसके पास 15 से 20 किलो टमाटर है, जिसे बेचने के लिए उसे डालटनगंज जाना पड़ेगा। यह सुनते ही समूह की बाकी महिलाओं ने आपस में मिलकर उसका सारा टमाटर खरीद लिया। संयोग से वह दिन गुरुवार था। इसके बाद महिलाओं ने तय किया कि हर गुरुवार को गांव में ही बाजार सजेगा, ताकि किसी भी महिला को अपनी उपज बेचने के लिए दूर न भटकना पड़े। यही छोटी-सी कोशिश आज एक कामयाब ग्रामीण हाट का रूप ले चुकी है।

हर गुरुवार सजती है रौनक

आज चेडाबार का ग्रामीण हाट आसपास के इलाकों में अपनी पहचान बना चुका है। गुरुवार को यहां बड़े पैमाने पर बाजार लगता है, जहां 15 से 20 स्टॉल सजाए जाते हैं। महिलाएं ताजी सब्जियों के अलावा फास्ट फूड, चूड़ी-कंगन, श्रृंगार का सामान और रोजमर्रा के उपयोग की चीजें बेचती हैं। यह बाजार रोजाना भी लगता है, मगर गुरुवार को इसकी चहल-पहल सबसे ज्यादा होती है। दोपहर तीन बजे से शाम सात बजे तक चलने वाला यह बाजार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रहा है।

स्थायी शेड की दरकार

हाट से जुड़ीं सुनीता देवी बताती हैं कि बारिश, तेज धूप और आंधी-तूफान के मौसम में बाजार चलाने में काफी दिक्कत होती है। खुले में बैठने के चलते सब्जियों के खराब होने का खतरा बना रहता है। महिलाओं की मांग है कि सरकार यहां एक स्थायी शेड बनवाए, ताकि बाजार को और सुव्यवस्थित ढंग से चलाया जा सके। उनका मानना है कि अगर यह सुविधा मिल जाती है, तो ग्रामीण हाट का दायरा और बढ़ेगा और इससे जुड़ी महिलाओं की आमदनी में भी इजाफा होगा।

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