एक दिन के लिए खुला माइक्रो फाइनेंस का दफ्तर, सैकड़ों लोगों से लाखों ठगकर रातोंरात फरार हुए जालसाज

पूर्णिया में एक कथित माइक्रो फाइनेंस कंपनी ने महज एक दिन के लिए कार्यालय खोलकर 300 से अधिक लोगों से पैसे जमा कराए और उसी शाम सामान समेटकर गायब हो गई। दर्जनों महिलाओं की शिकायत पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

बिहार के पूर्णिया से ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक कथित माइक्रो फाइनेंस कंपनी ने सिर्फ एक दिन के लिए दफ्तर खोला, सैकड़ों लोगों से रकम जमा कराई और फिर रातोंरात फरार हो गई। ठगी का पता चलते ही पीड़ितों में अफरा-तफरी मच गई। दर्जनों महिलाओं ने सदर थाना पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस पूरे मामले की पड़ताल में जुट गई है।

किराए के भवन में खुला फर्जी कार्यालय

मिली जानकारी के अनुसार, गुलाबबाग जीरो माइल स्थित एक किराए के भवन में 3 जून को “सहायता माइक्रो फाइनेंस” नाम की कंपनी का कार्यालय शुरू किया गया था। कंपनी के एजेंट ग्रामीण इलाकों में घूम-घूमकर लोगों को लोन दिलाने का झांसा दे रहे थे। लोगों से कहा गया कि खाता खुलवाने के लिए 5 हजार रुपये जमा करने होंगे, जिसके बाद उन्हें 1.60 लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाएगा।

300 से अधिक लोग बने शिकार

लोन के लालच में आकर पूर्णिया जिले के कई इलाकों से 300 से अधिक लोगों ने अपनी रकम जमा कर दी। पीड़ित महिलाओं का आरोप है कि राहुल कुमार और मिथुन कुमार नाम के एजेंट उनके घर तक पहुंचे थे और हर किसी से पांच-पांच हजार रुपये वसूले थे। उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि अगले ही दिन लोन की राशि उनके खाते में आ जाएगी।

जब तय समय पर पैसे खाते में नहीं पहुंचे तो लोगों ने कंपनी के अधिकारियों और एजेंटों से संपर्क करने की कोशिश की। कई मोबाइल नंबर बंद मिले, जबकि कुछ पर बात होने पर सिर्फ टालमटोल किया गया। आखिरकार जब परेशान लोग कार्यालय पहुंचे तो वहां ताला लटका हुआ मिला। यह देखकर सभी के होश उड़ गए और मौके पर भारी हंगामा शुरू हो गया।

सुबह उद्घाटन, शाम को ही समेट लिया सामान

मकान मालिक माहिर अख्तर ने बताया कि बेगूसराय निवासी राहुल कुमार ने 31 मई को कार्यालय के लिए कमरा किराए पर लिया था। इस दौरान 22 हजार रुपये मासिक किराया और एक लाख रुपये एडवांस देने की बात तय हुई थी, लेकिन एडवांस की रकम कभी नहीं दी गई। उन्होंने बताया कि कार्यालय का उद्घाटन 3 जून को हुआ और उसी दिन शाम होते-होते सभी लोग सामान समेटकर गायब हो गए।

पुलिस ने दर्ज की प्राथमिकी

सदर एसडीपीओ अभिनव पाराशर ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह संगठित ठगी का मामला प्रतीत होता है। एक दिन के लिए कार्यालय खोलकर लोगों से रुपये लिए गए और इसके बाद आरोपी फरार हो गए। उन्होंने बताया कि पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है और मोबाइल नंबरों तथा अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है।

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