स्वतंत्रता दिवस समारोह: लाल किले पर राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे की अनुपस्थिति पर मचा बवाल, बीजेपी और कांग्रेस में छिड़ी जंग

स्वतंत्रता दिवस 2026 के अवसर पर लाल किले में आयोजित राष्ट्रीय समारोह से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी लगातार दूसरे साल अनुपस्थित रहे, जिस पर बीजेपी ने इसे देश का अपमान बताया है।

स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले पर आयोजित मुख्य समारोह में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की अनुपस्थिति को लेकर देश का राजनीतिक पारा चढ़ गया है। स्वतंत्रता दिवस 2026 के इस भव्य कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शामिल नहीं हुए। यह लगातार दूसरा साल है जब दोनों प्रमुख विपक्षी नेताओं ने लाल किले के राष्ट्रीय समारोह से दूरी बनाई है। उनकी इस गैरमौजूदगी को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने कांग्रेस पर देश के राष्ट्रीय पर्व का अपमान करने का गंभीर आरोप लगाया है। दूसरी ओर, कांग्रेस ने भी इस पर पलटवार करते हुए अपना रुख स्पष्ट किया है।

बीजेपी का बड़ा हमला: राष्ट्रीय पर्व का अनादर

विपक्षी नेताओं के समारोह में शामिल न होने पर सत्तापक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई है। बीजेपी नेता आरपी सिंह ने इस मामले पर सीधे सवाल उठाते हुए मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यक्रम में न पहुंचने के कारणों पर सवाल खड़े किए। बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस और उसके शीर्ष नेता राष्ट्रीय महत्व के ऐतिहासिक अवसरों की गरिमा को समझने में विफल रहे हैं और उनका यह व्यवहार देश के लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

समारोह में बैठने की व्यवस्था को लेकर नाराजगी

इस विवाद के बीच कांग्रेस सूत्रों की ओर से नेताओं के न आने की वजह का खुलासा किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, समारोह में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बैठने की व्यवस्था को लेकर आपत्ति थी। खड़गे को कार्यक्रम स्थल पर दूसरी या तीसरी पंक्ति में सीट आवंटित की गई थी। पार्टी सूत्रों का कहना है कि इतनी पीछे की सीट मिलने के कारण वहां तक जाना उनके लिए काफी असुविधाजनक था, जिसके चलते उन्होंने इस समारोह से दूरी बनाना ही उचित समझा।

कांग्रेस का पलटवार: बीजेपी की सोच पर उठाए सवाल

इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने बीजेपी पर करारा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बीजेपी को हर बात में सिर्फ अपमान देखने की आदत हो गई है। पवन खेड़ा ने इस दौरान कांग्रेस पार्टी और 'वंदे मातरम' के गहरे और ऐतिहासिक संबंधों को याद दिलाते हुए स्पष्ट किया कि कांग्रेस के लिए राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान सर्वोपरि रहा है और इसके लिए उन्हें किसी से देशभक्ति के प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं है।

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