युवाओं की भूमिका और मार्गदर्शन पर जोर
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने देश के युवाओं, विशेष रूप से Gen-Z पीढ़ी को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। मोहन भागवत का मानना है कि युवाओं को सही दिशा और संस्कार देना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। यदि समय रहते उन्हें सही राह नहीं दिखाई गई, तो यह युवा शक्ति राष्ट्र के निर्माण में योगदान देने के बजाय समाज पर एक बोझ की तरह बन सकती है।
समाज पर बोझ बनने की चेतावनी
एक कार्यक्रम के दौरान मोहन भागवत ने स्पष्ट किया कि वर्तमान पीढ़ी के सामने कई तरह की चुनौतियां हैं और उन्हें भटकने से बचाने के लिए उचित मार्गदर्शन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि युवाओं की ऊर्जा का सही दिशा में इस्तेमाल होना देश के भविष्य के लिए अनिवार्य है। यदि ऐसा नहीं हुआ, तो आने वाले समय में वे समाज और अर्थव्यवस्था पर बोझ बन जाएंगे, जो किसी भी राष्ट्र के लिए चिंताजनक स्थिति होगी।
राष्ट्र निर्माण में युवाओं की जिम्मेदारी
मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि युवाओं को केवल अपने व्यक्तिगत लक्ष्यों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें सामाजिक और राष्ट्रीय जिम्मेदारियों को भी समझना होगा। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सही मूल्यों और दिशा के बिना प्रतिभा का कोई अर्थ नहीं रह जाता है। अतः यह अभिभावकों, शिक्षकों और समाज के हर वर्ग का सामूहिक दायित्व है कि वे युवा पीढ़ी को सकारात्मक दिशा प्रदान करें। उन्होंने भविष्य के लिए युवाओं को सशक्त और सजग बनाने की वकालत की ताकि वे देश की प्रगति में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें।
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