देवघर बाबाधाम में चढ़ावे का रिकॉर्ड, दान पेटियों में मिले नेपाल, भूटान और थाइलैंड की करेंसी के नोट

सावन के पवित्र महीने में बाबा बैद्यनाथ धाम में भक्तों की भारी भीड़ जुटी है। दान पेटियों को खोलने पर न केवल भारतीय मुद्रा बल्कि विदेशों की करेंसी भी भारी मात्रा में मिली है।

सावन में बाबाधाम की अद्भुत रौनक

सावन का पवित्र महीना चल रहा है और इस समय देशभर के शिवालयों में महादेव के भक्तों का तांता लगा हुआ है। इस पावन कालखंड में भक्त अपनी पूरी श्रद्धा और सामर्थ्य के साथ देवाधिदेव महादेव की सेवा में जुटे हैं। विशेष रूप से झारखंड स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम में आस्था का एक अभूतपूर्व नजारा देखने को मिल रहा है। यह स्थान न केवल भारत के कोने-कोने से आने वाले शिव भक्तों का केंद्र है, बल्कि विदेशों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी अटूट विश्वास का प्रतीक बन चुका है।

कांवरियों की अटूट श्रद्धा और लंबी पदयात्रा

बाबा बैद्यनाथ मंदिर में दर्शन के लिए उमड़ने वाली भीड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर आने वाले कांवरिये लगभग 105 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा पूरी करके बाबाधाम पहुँच रहे हैं। सावन के दौरान यह पूरा इलाका 'बोल बम' के जयकारों से गूंजायमान रहता है और चारों ओर गेरुआ वस्त्र पहने श्रद्धालुओं का जनसैलाब दिखाई देता है। ऐसी मान्यता है कि सावन के इस पावन समय में शिवलिंग पर जल का एक पात्र अर्पित करने मात्र से महादेव प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की हर मनोकामना को पूर्ण करते हैं।

दान पात्रों में लगी करोड़ों की राशि

भक्तों की इसी अटूट आस्था का प्रमाण मंदिर के दान पात्रों में देखने को मिल रहा है। पिछले 15 दिनों की अवधि में 28 लाख से अधिक कांवरियों ने बाबा बैद्यनाथ को जल अर्पित किया है। श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित की गई दान राशि ने मंदिर प्रशासन को भी चकित कर दिया है। मंदिर के रिकॉर्ड के अनुसार, सावन मेले के शुरुआती पंद्रह दिनों में ही मंदिर को लगभग 3 करोड़ 54 लाख 59 हजार रुपये की आय प्राप्त हुई है। जैसे-जैसे भक्तों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है, मंदिर की दान राशि में भी लगातार इजाफा दर्ज किया जा रहा है।

सुरक्षा के बीच दान पेटियों की गिनती

मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कुल 18 दान पात्र स्थापित किए गए हैं। इन पेटियों को भरने के बाद मंदिर प्रशासन ने पूरी सतर्कता और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच इन्हें खुलवाया। इस पूरी प्रक्रिया को मंदिर प्रशासनिक भवन में संपन्न किया गया, जहाँ अधिकारियों और कर्मचारियों की उपस्थिति में पैसों की गिनती की गई। यह पूरी प्रक्रिया बेहद पारदर्शी तरीके से की गई ताकि दान की गई राशि को सुरक्षित रखा जा सके।

देश-विदेश की मुद्राओं का संगम

जब दान पेटियों की गिनती शुरू हुई, तो वहां मौजूद अधिकारी भी दंग रह गए। भारतीय मुद्रा के अलावा, इसमें दुनिया के विभिन्न देशों की करेंसी भी बड़ी संख्या में मिली। गणना के दौरान कुल 23 लाख 74 हजार 434 रुपये की भारतीय मुद्रा के साथ-साथ विदेशी मुद्राएं भी मिलीं, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि बाबा बैद्यनाथ की ख्याति वैश्विक स्तर पर फैली हुई है। दान पात्रों से प्राप्त विदेशी मुद्राओं का विवरण इस प्रकार है:

  • नेपाली मुद्रा: 8 हजार 955
  • भूटानी मुद्रा: 31
  • गुयाना डॉलर: 1500
  • यूएई दिरहम: 50
  • थाईलैंड की मुद्रा: 100

यह अद्भुत दृश्य दर्शाता है कि बाबा के दरबार में आने वाले भक्त केवल भारत के निवासी नहीं हैं, बल्कि नेपाल, भूटान, गुयाना, संयुक्त अरब अमीरात और थाईलैंड जैसे देशों से भी लोग अपनी श्रद्धा लेकर यहाँ पहुँचते हैं। मंदिर प्रशासन द्वारा इन सभी मुद्राओं को नियमानुसार सुरक्षित कर लिया गया है। सावन के बचे हुए दिनों में भी श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला जारी है और प्रशासन व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है ताकि प्रत्येक भक्त को दर्शन में कोई असुविधा न हो।

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