हरियाली तीज का महत्व और आस्था
सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरियाली तीज के रूप में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से विवाहित महिलाओं द्वारा अपने जीवनसाथी की दीर्घायु, दांपत्य जीवन में मधुरता और संपूर्ण परिवार की सुख-समृद्धि के लिए समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी विशेष तिथि पर माता पार्वती और भगवान शिव का पुनर्मिलन हुआ था, जिसके चलते इस दिन की पूजा अत्यंत फलदायी मानी गई है।
उत्सव और पूजा की परंपरा
इस दिन महिलाएं पूरी श्रद्धा के साथ सोलह श्रृंगार करती हैं और अपने हाथों में मेहंदी रचाती हैं। तीज के इस उत्सव में पारंपरिक झूले झूलने और लोकगीत गाने की पुरानी परंपरा है, जो सावन की हरियाली को और अधिक आनंदमयी बना देती है। करौली के आध्यात्मिक विशेषज्ञ पंडित हरिमोहन शर्मा का कहना है कि यदि विधि-विधान से शिव-पार्वती की आराधना की जाए, तो वैवाहिक जीवन में आने वाली सभी बाधाएं दूर होती हैं और घर में शांति बनी रहती है।
व्रत के दौरान लेने योग्य 3 महत्वपूर्ण संकल्प
केवल निराहार रहकर व्रत पूरा करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि इस दिन मन और विचारों की शुद्धि पर भी जोर दिया गया है। व्रत को पूर्ण रूप से सफल बनाने के लिए इन तीन संकल्पों का पालन करना आवश्यक है:
- छल और कपट की भावना को पूरी तरह से त्याग दें।
- किसी भी स्थिति में झूठ बोलने से बचें।
- दूसरों की निंदा या बुराई करने से पूरी तरह दूर रहें।
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