पूजा के समय दीपक का बुझना क्या किसी अनहोनी का संकेत है? जानें इसके पीछे के धार्मिक और व्यावहारिक कारण

पूजा-पाठ के दौरान जलते हुए दीपक का अचानक बुझ जाना कई लोगों के मन में डर पैदा कर देता है। आइए जानते हैं कि शास्त्रों और लोक मान्यताओं के अनुसार इसका क्या अर्थ होता है और ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए।

पूजा में दीप प्रज्वलन का महत्व

हिंदू धर्म में पूजा-पाठ के आरंभ में दीपक जलाने की परंपरा बहुत पुरानी है। किसी भी देवी-देवता की आराधना शुरू करने से पहले दीप प्रज्वलित किया जाता है, जो प्रकाश, सकारात्मकता और शुभता का प्रतीक माना जाता है। दीपक की लौ न केवल वातावरण को पवित्र बनाती है, बल्कि पूजा के दौरान मन को शांत रखने और एकाग्रता बढ़ाने में भी सहायता करती है। हालांकि, कई बार अचानक दीपक के बुझ जाने से भक्त चिंतित हो जाते हैं। लोग अक्सर सोचने लगते हैं कि क्या यह कोई अपशकुन है या आने वाली किसी अनहोनी का संकेत।

एकाग्रता और ध्यान में कमी

धार्मिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो दीपक का बुझना अक्सर पूजा के दौरान भक्त की एकाग्रता में कमी का संकेत माना जाता है। पूजा का मुख्य उद्देश्य ईश्वर से जुड़ना है और इसके लिए मन का स्थिर होना आवश्यक है। यदि दीपक बार-बार बुझ रहा है, तो यह संकेत हो सकता है कि आपका मन भटक रहा है और आप पूरी श्रद्धा के साथ पूजा में शामिल नहीं हो पा रहे हैं। ऐसी स्थिति में, मन को स्थिर करने और ईश्वर पर ध्यान केंद्रित करने का प्रयास करना चाहिए।

नकारात्मक ऊर्जा और देव दोष

कुछ मान्यताओं और वास्तु शास्त्र के अनुसार, दीपक का बुझना स्थान विशेष पर मौजूद नकारात्मक ऊर्जा या वास्तु दोष का संकेत हो सकता है। कुछ लोग इसे देवी-देवताओं की नाराजगी से जोड़कर भी देखते हैं। हालांकि, हर बार इसे आध्यात्मिक दोष मानना सही नहीं है। कई बार खिड़की से आने वाली हवा, घी या तेल की कमी, या फिर बाती के सही न होने जैसे भौतिक कारणों से भी दीपक बुझ सकता है। इसलिए बिना किसी ठोस कारण के डरना नहीं चाहिए।

पितरों की नाराजगी और अन्य संकेत

अक्सर यह भी कहा जाता है कि पूजा के दौरान दीपक का बुझना पितरों की नाराजगी का सूचक हो सकता है। इसे भविष्य में होने वाले कार्यों में रुकावट आने की आशंका के तौर पर भी देखा जाता है। हालांकि, यह जरूरी नहीं है कि हर बार इसका अर्थ अनहोनी ही हो। यदि ऐसा कुछ महसूस हो, तो ईश्वर से क्षमा प्रार्थना करना और श्रद्धापूर्वक दोबारा पूजा करना उत्तम माना गया है।

दीपक बुझने पर क्या करें

अगर पूजा के बीच में दीपक बुझ जाए, तो घबराने के बजाय उसे दोबारा जलाना चाहिए। दोबारा दीपक प्रज्वलित करते समय इन बातों का ध्यान रखें:

  • सबसे पहले दीपक में तेल या घी की मात्रा को अच्छी तरह देख लें।
  • बाती की स्थिति की जांच करें, यदि वह बहुत छोटी या जलकर काली हो गई है तो उसे बदल लें।
  • ईश्वर से अपनी भूल के लिए क्षमा मांगें और फिर श्रद्धापूर्वक दीपक जलाएं।

दीपक प्रज्वलित करने का मंत्र

पूजा के दौरान दीप जलाते समय निम्नलिखित मंत्र का जाप करना बहुत शुभ माना जाता है:

शुभं करोति कल्याणं आरोग्यं धनसंपदाम्।
शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥

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