देश की रक्षा शक्ति का आधुनिकीकरण प्राथमिकता
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देश के सैन्य बलों को संबोधित करते हुए कहा कि एक आत्मनिर्भर और भविष्य की चुनौतियों से निपटने में सक्षम रक्षा क्षेत्र का निर्माण करना वर्तमान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शुमार है। 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आकाशवाणी के माध्यम से दिए गए संदेश में उन्होंने पिछले 12 वर्षों में रक्षा जगत में हुए व्यापक बदलावों और भारत की आत्मनिर्भरता की यात्रा पर प्रकाश डाला। राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल मार्गदर्शन में सरकार लगातार रक्षा बलों के आधुनिकीकरण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसी पहलों ने भारत को अपनी सुरक्षा जरूरतों को खुद पूरा करने वाला राष्ट्र बना दिया है, जिसके परिणामस्वरूप आज हम दुनिया के लिए एक रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में उभर रहे हैं और रक्षा उत्पादों के एक शुद्ध निर्यातक बन चुके हैं।
रक्षा उत्पादन में चार गुना का उछाल
रक्षा मंत्री ने सांख्यिकीय आंकड़ों के जरिए इस बदलाव को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में देश का घरेलू रक्षा उत्पादन लगभग 46,000 करोड़ रुपये का था, जो वित्त वर्ष 2025-26 तक रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह वृद्धि दर लगभग चार गुना है, जो रक्षा क्षेत्र के ढांचागत बदलावों की कहानी बयां करती है। रक्षा उत्पादन में सरकारी क्षेत्र के उपक्रमों यानी DPSU की हिस्सेदारी 76 फीसदी है, जबकि निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़कर 24 फीसदी तक पहुंच गई है। पिछले वित्त वर्ष में निजी क्षेत्र का हिस्सा 22 फीसदी था, जो इस बात का संकेत है कि रक्षा उद्योग में कारोबार करने का माहौल कितना अनुकूल हुआ है।
रक्षा निर्यात में 5,500 फीसदी से अधिक की वृद्धि
राजनाथ सिंह ने बताया कि भारत के रक्षा निर्यात ने अभूतपूर्व उड़ान भरी है। वित्त वर्ष 2013-14 में देश का रक्षा निर्यात मात्र 686 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये के आंकड़े पर पहुंच गया है। यह 5,500 फीसदी से भी अधिक की शानदार बढ़ोतरी है। वर्तमान में भारत के 145 रक्षा निर्यातक दुनिया के 80 से अधिक देशों में अपने उत्पाद भेज रहे हैं। उन्होंने पूरे विश्वास के साथ कहा कि भारत बहुत जल्द वर्ष 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात का लक्ष्य भी हासिल कर लेगा।
रक्षा बजट और शोध में अभूतपूर्व निवेश
सरकार की प्रतिबद्धता का जिक्र करते हुए राजनाथ सिंह ने बताया कि वित्त वर्ष 2013-14 में जो रक्षा बजट 2.53 लाख करोड़ रुपये था, वह वित्त वर्ष 2026-27 में बढ़कर 7.85 लाख करोड़ रुपये हो गया है। इसी अवधि के दौरान रक्षा क्षेत्र का पूंजीगत खर्च 94,588 करोड़ रुपये से बढ़कर 2.19 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। अनुसंधान एवं विकास यानी R&D पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है। वित्त वर्ष 2014-15 में R&D के लिए 15,283 करोड़ रुपये का बजट था, जिसमें 90 फीसदी की वृद्धि के साथ वित्त वर्ष 2026-27 में इसे 29,100 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
परियोजनाओं को मिली बड़ी मंजूरी
रक्षा अधिग्रहण परिषद यानी DAC द्वारा पिछले एक साल में 8.75 लाख करोड़ रुपये से अधिक की रक्षा परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जो आधुनिक हथियारों और सैन्य उपकरणों की खरीद के प्रति सरकार की गंभीरता को दर्शाती है। फील्ड कमांडरों की वित्तीय शक्तियों में दो गुना बढ़ोतरी की गई है ताकि निर्णय लेने की गति बढ़ाई जा सके। साथ ही राजस्व मार्ग के तहत 1.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक की खरीद का रास्ता साफ किया गया है, जिससे स्वदेशी उपकरणों को बढ़ावा मिलेगा।
स्वदेशी तकनीक और मारक क्षमता का विस्तार
राजनाथ सिंह ने DRDO और सशस्त्र बलों द्वारा भविष्य के युद्धों की तैयारी के तहत किए जा रहे नवाचारों की सराहना की। उन्होंने टैक्टिकल एडवांस्ड रेंज ऑगमेंटेशन सिस्टम के सफल परीक्षण का उदाहरण दिया, जो पारंपरिक हथियारों को सटीक निशाना लगाने में सक्षम बनाता है। इसके अतिरिक्त, MIRV तकनीक वाली अग्नि मिसाइल का सफल परीक्षण भारत की रणनीतिक ताकत का बड़ा प्रमाण है। इसके अलावा लॉन्ग-रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल, RudraM-II, नेवल एंटी-शिप मिसाइल-एसआर और पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट जैसे हथियारों ने भारतीय सेना की मारक क्षमता को वैश्विक स्तर पर मजबूती दी है। अंत में उन्होंने देश के वीर सैनिकों के साहस और समर्पण को नमन करते हुए कहा कि उनके बलिदान के लिए देश सदैव उनका ऋणी रहेगा।
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