पाकिस्तान का अंतरिक्ष सपना और जिन्ना का नाम
पाकिस्तान ने अब चंद्रमा की सतह तक पहुंचने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय कर लिया है। देश में चल रहे तमाम आर्थिक और अंदरूनी संकटों के बीच, पाकिस्तान अपने दम पर नहीं बल्कि चीन की मदद से अंतरिक्ष की दौड़ में शामिल होने की तैयारी में है। पाकिस्तान ने अपने इस पहले मून मिशन के लिए जो लूनर रोवर तैयार किया है, उसका नाम जिन्ना-1 रखा गया है। इस नामकरण के बाद से ही सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
भारत के पूर्व कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ पत्रकार एम. जे. अकबर ने इस मिशन के नाम पर चुटकी लेते हुए पड़ोसी देश पर करारा तंज कसा है। अकबर ने कहा कि पाकिस्तान का यह मून मिशन पूरी कायनात के लिए बहुत बुरी खबर साबित हो सकता है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि, 'पाकिस्तान ने अपने पहले मून मिशन का नाम जिन्ना-1 रखा है। यह नाम ही काफी चिंताजनक है क्योंकि यह जिन्ना वहां (चांद पर) पहुंचकर सबसे पहला काम यही करेगा कि वहां भी विभाजन की रेखा खींच देगा और चांद के टुकड़े कर देगा।'
चीन के सहयोग से उड़ान भरने की तैयारी
हकीकत यह है कि पाकिस्तान इस मिशन के लिए पूरी तरह से चीन पर निर्भर है। पाकिस्तान का लूनर रोवर चीन के रॉकेट की मदद से वर्ष 2029 तक अंतरिक्ष की यात्रा पर रवाना होगा। इस पूरे प्रोजेक्ट को चीन के Chang E 8 मिशन के साथ जोड़कर अंजाम दिया जाएगा। योजना के मुताबिक, इस रोवर को चांद के दक्षिणी ध्रुव के करीब उतारने का लक्ष्य रखा गया है, जहां यह वैज्ञानिक अनुसंधान और शोध का कार्य करेगा। अपनी तकनीकी क्षमताओं की कमी के चलते पाकिस्तान चीन के कंधों का सहारा लेकर अंतरिक्ष में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश कर रहा है।
कौन थे मोहम्मद अली जिन्ना?
ब्रिटिश शासित भारत में एक प्रभावशाली बैरिस्टर और राजनेता के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले मोहम्मद अली जिन्ना को पाकिस्तान का संस्थापक माना जाता है। पाकिस्तान में उन्हें 'कायदे आजम' और 'बाबा-ए-कौम' के सर्वोच्च सम्मान से नवाजा जाता है। लंदन से कानून की शिक्षा प्राप्त करने वाले जिन्ना ने अपना राजनीतिक सफर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ शुरू किया था, लेकिन बाद में वे मुस्लिम लीग में शामिल हो गए। उन्होंने धर्म के आधार पर मुस्लिमों के लिए अलग राष्ट्र पाकिस्तान की मांग को मुखर किया। उनकी 'टू नेशन थ्योरी' और जिद्दी राजनीतिक रुख के कारण ही वर्ष 1947 में भारत और पाकिस्तान का बंटवारा हुआ था, जिसकी कड़वी यादें आज भी इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं।
एम. जे. अकबर का परिचय
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देने वाले एम. जे. अकबर का पूरा नाम मोबाशर जावेद अकबर है। वह एक जाने-माने पत्रकार और राजनेता रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में दशकों तक काम किया है, जिसमें टाइम्स ऑफ इंडिया, इंडिया टुडे, द टेलिग्राफ, एशियन एज और डेक्कन क्रोनिकल जैसे प्रतिष्ठित संस्थान शामिल हैं। बाद में वे भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए और राज्यसभा सांसद के रूप में कार्य किया। वे नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली NDA-1 सरकार में विदेश राज्य मंत्री भी रहे। हालांकि, बाद के वर्षों में उन पर मी टू अभियान के दौरान यौन शोषण के गंभीर आरोप लगे थे, जिसके चलते उन्हें अपने केंद्रीय मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था। अब अपनी टिप्पणियों के जरिए वे अक्सर चर्चाओं में बने रहते हैं।
https://hindi.news18.com/news/nation/jinnah-would-even-partition-the-moon-m-j-akbar-takes-witty-dig-at-pakistan-moon-mission-10749070.html