अंबाला में हिंसक झड़प: SP अजीत का दावा, गैस टैंकर फंसाकर रची गई थी बड़ी साजिश, 7 जवान ICU में भर्ती

हरियाणा के अंबाला में गुरुवार को सिख प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई हिंसक झड़प में डीएसपी समेत सात पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। पुलिस का आरोप है कि भीड़ में हथियारबंद लोग शामिल थे और उन्होंने जानबूझकर एक गैस टैंकर को फंसाकर सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दी थी।

अंबाला हिंसा के पीछे गहरी साजिश का अंदेशा

हरियाणा के अंबाला में गुरुवार को हालात उस समय बेकाबू हो गए जब सिख प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच आमना-सामना हुआ। इस हिंसक टकराव में पुलिस के सात जवान गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें उपचार के लिए आईसीयू (ICU) में भर्ती कराया गया है। अंबाला के एसपी अजीत सिंह शेखावत ने इस पूरे घटनाक्रम को एक बड़ी सुनियोजित साजिश करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि प्रदर्शनकारियों की भीड़ में असामाजिक तत्व हथियारों के साथ मौजूद थे और उनका उद्देश्य पुलिस को निशाना बनाना था।

गैस टैंकर को मोहरा बनाने का आरोप

एसपी अजीत सिंह शेखावत ने खुलासे में बताया कि उपद्रवियों ने एक गैस टैंकर को जानबूझकर जाम में फंसा दिया था। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने ड्राइवर से चाबी छीन ली ताकि स्थिति को और अधिक तनावपूर्ण बनाया जा सके। एसपी के मुताबिक, पुलिस को यह अंदेशा था कि इस गैस टैंकर का इस्तेमाल किसी बड़ी दुर्घटना या तबाही को अंजाम देने के लिए किया जा सकता है, इसलिए इसे वहां से हटाने की कोशिश की गई। पुलिस का दावा है कि भीड़ में मौजूद कुछ लोग फरसे, भाले, तलवार और अन्य घातक हथियारों से लैस थे। जब पुलिस ने हाईवे को खाली कराने का प्रयास किया, तो हिंसा को भड़काने के उद्देश्य से इन हथियारों का इस्तेमाल किया गया।

डीएसपी का अंगूठा कटा, पुलिस को करना पड़ा लाठीचार्ज

पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार, अंधेरा होते ही भीड़ ने आक्रामक रूप ले लिया और सीधे तौर पर पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया। इस हमले में डीएसपी वीरेंद्र गंभीर रूप से घायल हो गए। एक धारदार हथियार से हुए वार के कारण उनके हाथ का अंगूठा कटने की स्थिति में पहुंच गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को अंततः आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और बल प्रयोग करते हुए लाठीचार्ज करना पड़ा। घायल पुलिसकर्मियों को तुरंत कैंट सिविल अस्पताल और मिलिट्री अस्पताल ले जाया गया। सात जवानों की नाजुक स्थिति को देखते हुए उन्हें आईसीयू में रखा गया है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टर उनकी निगरानी कर रहे हैं।

घायल जवानों की आपबीती

इस हिंसक घटना में घायल हुए हैड कांस्टेबल संदीप सिंह ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि वे भीड़ के बीच फंस गए थे, जहां से पीछे से उन पर तलवार या किसी धारदार हथियार से हमला किया गया। वहीं, घायल कांस्टेबल नवीन कुमार ने कहा कि उन पर फरसे से प्रहार किया गया, जिससे उनके हाथ में गंभीर फ्रैक्चर हुआ है। उन्होंने पुष्टि की कि प्रदर्शनकारी डंडे, तलवार और फरसों के साथ वहां पहुंचे थे और पुलिस को निशाना बनाने का प्रयास कर रहे थे।

प्रशासन का पक्ष और समाधान की कोशिश

हरियाणा पुलिस के डीजीपी अजय सिंघल ने भी इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि कुछ शरारती तत्वों ने राज्य का माहौल बिगाड़ने की कोशिश की है। इन तत्वों ने शांतिपूर्ण समाधान की हर गुंजाइश को खत्म कर दिया। इस बीच, हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्य गुरतेज सिंह ने बताया कि पंजोखरा साहिब से जुड़े विवाद पर चर्चा के लिए दोपहर में एक बैठक बुलाई गई है। प्रशासन और प्रदर्शनकारी नेताओं के बीच बातचीत के जरिए तनाव कम करने और स्थिति को सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

विवाद की जड़: पंजोखरा साहिब प्रकरण

इस पूरे संघर्ष की शुरुआत सात अगस्त की घटना से जुड़ी है। उस दिन पंजोखरा साहिब गुरुद्वारे में एंटी-खालिस्तानी समर्थक गुरसिमरन सिंह मंड पहुंचे थे, जहां उन पर और उनके बेटे पर हमला कर दिया गया था। उस दौरान उनकी गाड़ी में तोड़फोड़ हुई थी और पुलिसकर्मियों समेत छह लोग घायल हुए थे। उस समय पुलिस ने स्थानीय सिखों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। इसके विरोध में लोग सड़कों पर उतरे और मांग कर रहे थे कि गुरसिमरन सिंह मंड पर भी केस दर्ज किया जाए। हालांकि पुलिस ने मंड के खिलाफ कार्रवाई कर दी थी, लेकिन प्रदर्शनकारी इस बात पर अड़े रहे कि गिरफ्तार किए गए लोगों को बिना शर्त रिहा किया जाए। पुलिस द्वारा इस मांग को स्वीकार न करने के बाद मामला और ज्यादा बिगड़ गया।

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