बिटकॉइन में बड़ी गिरावट: 60 हजार डॉलर के नीचे लुढ़का भाव, क्या थम गया क्रिप्टो का जादू?

दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन का दाम 60,000 डॉलर के स्तर से नीचे आ गया है और बीते एक हफ्ते में इसमें 18 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई है। जानकार इसे बाजार का सामान्य चक्र मान रहे हैं, न कि बिटकॉइन का अंत।

बिटकॉइन की चमक अब फीकी पड़ती दिख रही है। तकरीबन दो साल में पहली बार दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी का भाव 60,000 डॉलर के स्तर से नीचे फिसल गया है। पिछले 24 घंटों में इसकी कीमत 6 फीसदी टूटकर 59,101 डॉलर पर पहुंच गई। बीते एक हफ्ते की बात करें तो इस कॉइन में 18 फीसदी की गिरावट आ चुकी है।

पिछले साल अक्टूबर में बिटकॉइन 1,26,000 डॉलर के पार चला गया था। उस ऊंचाई से तुलना करें तो यह अपनी आधे से ज्यादा कीमत गंवा चुका है। ऐसे में हर निवेशक के मन में यही सवाल है कि क्या बिटकॉइन का खेल खत्म हो गया है, या फिर यह दोबारा वापसी करेगा?

गिरावट की असली वजह क्या है?

विशेषज्ञों के मुताबिक इस भारी गिरावट के पीछे बाजार में घटती लिक्विडिटी और बड़े निवेशकों का दूसरे सेक्टरों की ओर रुख करना प्रमुख कारण हैं। वज़ीरएक्स (WazirX) के संस्थापक निश्चल शेट्टी का कहना है कि बड़े संस्थागत निवेशक इस समय बिटकॉइन से मुनाफा वसूल रहे हैं और यह पैसा एआई (AI), डिफेंस, एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे उन क्षेत्रों में लगा रहे हैं, जहां फिलहाल कमाई की ज्यादा गुंजाइश दिख रही है।

गेम ओवर या सिर्फ अस्थायी झटका?

लाइवमिंट की एक रिपोर्ट के अनुसार, आम निवेशकों में इस गिरावट को लेकर भले ही डर का माहौल हो, लेकिन क्रिप्टो विशेषज्ञ इसे ‘गेम ओवर’ नहीं मान रहे। जानकारों का मानना है कि यह बाजार का एक सामान्य चक्र यानी मार्केट साइकिल है। निवेशक हमेशा उसी दिशा में पूंजी लगाते हैं, जहां उन्हें शॉर्ट-टर्म में बेहतर अवसर नजर आते हैं।

निश्चल शेट्टी कहते हैं कि ऐसे दौर पहले भी देखे जा चुके हैं, जब बड़े निवेशकों की बिकवाली से कीमतें अचानक तेजी से गिरीं, लेकिन हालात सामान्य होते ही पूंजी दोबारा बिटकॉइन की तरफ लौट आई। इसलिए इसे बिटकॉइन का अंत मान लेना जल्दबाजी होगी।

मुड्रेक्स (Mudrex) के लीड क्वांट एनालिस्ट अक्षत सिद्धांत के मुताबिक इस समय निवेशकों का झुकाव सोने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी कंपनियों की ओर काफी बढ़ गया है। इसके अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावनाओं को लेकर बनी अनिश्चितता ने भी बिटकॉइन पर भारी दबाव डाला है।

क्या आगे और गिरेगा भाव?

बाजार जानकारों का कहना है कि आने वाले कुछ दिन क्रिप्टो बाजार के भविष्य के लिहाज से बेहद नाजुक और अहम साबित होंगे। यदि बिटकॉइन खुद को 60,000 से 62,000 डॉलर के बीच टिकाए रखने में सफल रहता है, तो बाजार का भरोसा फिर से लौट सकता है। इसके साथ ही यह भी देखना अहम होगा कि बड़े फंड हाउसेज और ईटीएफ (ETF) में पैसों का प्रवाह कैसा रहता है।

ब्लॉकचेन की लंबी राह

कॉइनडीसीएक्स (CoinDCX) के सह-संस्थापक सुमित गुप्ता मानते हैं कि ब्लॉकचेन तकनीक अब केवल सट्टेबाजी तक सीमित नहीं रह गई है। उनका कहना है कि आने वाले समय में स्टेबलकॉइन इनोवेशन और रियल-वर्ल्ड एसेट्स के टोकनाइजेशन से क्रिप्टो बाजार में एक बार फिर बड़ी और टिकाऊ ग्रोथ देखने को मिल सकती है।

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