पाकिस्तान में आतंकवाद का खुला समर्थन
पाकिस्तान और आतंकवाद का चोली-दामन का साथ दुनिया भर के लिए अब कोई रहस्य नहीं रह गया है। हाल के दिनों में कई ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जिनसे यह स्पष्ट होता है कि पाकिस्तान की सरकारी मशीनरी और वहां के राजनेता किस कदर आतंकवादी संगठनों के प्रभाव में हैं। एक ऐसी ही चौंकाने वाली घटना इस्लामाबाद की एक बैठक के दौरान सामने आई, जहां पाकिस्तान के पूर्व गृह मंत्री शेख रशीद ने हाफिज सईद के प्रति अपनी निष्ठा का खुलेआम इजहार किया। यह वही हाफिज सईद है जिसे लश्कर-ए-तैयबा का सरगना और 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों का मुख्य साजिशकर्ता माना जाता है।
हाफिज सईद के गुलाम होने का गर्व
इस्लामाबाद में आयोजित एक राजनीतिक बैठक के दौरान, जिसमें देश के कई प्रमुख दलों के प्रतिनिधि और नेता उपस्थित थे, शेख रशीद ने बिना किसी संकोच के हाफिज सईद की तारीफों के पुल बांधे। उन्होंने मंच से ऐलान किया कि वे हाफिज सईद के गुलाम हैं। रशीद ने इसे अपने लिए कोई शर्मिंदगी का विषय नहीं माना, बल्कि उन्होंने इसे एक बड़ी उपलब्धि की तरह पेश किया। उन्होंने अपने भाषण में एक पुरानी घटना का जिक्र करते हुए बताया कि जब वे अमेरिका की यात्रा पर थे, तब अमेरिकी अधिकारियों ने उनके मोबाइल फोन की जांच की थी। रशीद के अनुसार, उनके फोन से हाफिज सईद का नंबर बरामद हुआ था, जिसके चलते अमेरिकी सरकार ने उन्हें अपने देश से बाहर निकाल दिया था। इस बात को उन्होंने बड़े गर्व के साथ वहां मौजूद लोगों के सामने साझा किया।
आतंकियों को बताया 'अजीम मुजाहिद'
शेख रशीद का यह बयान केवल एक व्यक्तिगत स्वीकारोक्ति नहीं थी, बल्कि यह उन चरमपंथी तत्वों को खुलेआम समर्थन देने जैसा था जो पाकिस्तान की धरती से संचालित हो रहे हैं। उन्होंने बैठक में मौजूद आतंकियों और उनके समर्थकों को संबोधित करते हुए उन्हें अजीम मुजाहिद करार दिया। उन्होंने दावा किया कि इन लोगों ने पाकिस्तान के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया है। रशीद ने भरी सभा में घोषणा की कि वे भविष्य में भी हाफिज सईद का साथ देना जारी रखेंगे। इस बयान ने यह साबित कर दिया है कि पाकिस्तान की सत्ता और वहां की राजनीति में आतंकवादियों की कितनी गहरी पैठ है और कैसे ये आतंकी वहां 'माई-बाप' की भूमिका निभा रहे हैं।
आतंकी नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय दबाव
यह घटना उस समय सामने आई है जब पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को आतंकवाद का शिकार होने का दावा करता है। हालांकि, पूर्व मंत्री के इस कबूलनामे ने उस पूरे नैरेटिव को तार-तार कर दिया है। हाफिज सईद के बारे में बात करें तो वह कोई सामान्य अपराधी नहीं है। संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका समेत दुनिया भर के कई देशों ने उसे वैश्विक आतंकवादी घोषित कर रखा है और उसकी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जाती है। उस पर करोड़ों डॉलर का इनाम भी घोषित है। इतने कुख्यात आतंकी को सम्मानित करना और खुद को उसका सेवक बताना, पाकिस्तान की उस नीति की कलई खोलता है जिसमें वह दशकों से आतंकियों को पनाह देता आया है।
पाकिस्तान का दोहरा चरित्र
ऑपरेशन सिंदूर में मारे गए आतंकवादियों के जनाजे का दृश्य हो या फिर राजनेताओं द्वारा दिए जाने वाले ऐसे भड़काऊ बयान, पाकिस्तान का आतंकवाद के प्रति प्रेम जगजाहिर है। जब देश के पूर्व मंत्री, जो कभी गृह मंत्रालय जैसे महत्वपूर्ण पद पर रहे हों, खुलेआम एक वैश्विक आतंकवादी के समर्थन में खड़े होते हैं, तो यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या पाकिस्तान की नीतियां असल में इन आतंकी समूहों द्वारा निर्देशित की जा रही हैं। यह खुलासा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान के उस ढोंग को बेनकाब करने के लिए काफी है, जिसमें वह आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई का झूठा दावा करता है। शेख रशीद का यह बयान पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति और वहां की राजनीति के आतंकीकरण का एक जीवंत प्रमाण है।
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