शुक्रवार और नक्षत्र का विशेष प्रभाव
हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में शुक्रवार के दिन को धन, ऐश्वर्य, सौंदर्य और वैवाहिक सुख के कारक ग्रह शुक्र देव तथा धन की अधिष्ठात्री देवी मां लक्ष्मी का दिन माना गया है। इस शुक्रवार को पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र का एक विशेष और अत्यंत शुभ योग बन रहा है। ऐसा माना जाता है कि इस तरह के दुर्लभ नक्षत्र योग में किए गए छोटे-छोटे उपाय व्यक्ति के जीवन से सभी प्रकार की बाधाओं को दूर करने और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने में सक्षम होते हैं। आचार्य इंदु प्रकाश के अनुसार, इस खास मौके पर राशि के अनुसार किए गए उपाय जीवन में सुख और शांति ला सकते हैं।
पारिवारिक शांति और रिश्तों में मिठास के उपाय
यदि आपके परिवार के सदस्यों के बीच अक्सर वैचारिक मतभेद रहते हैं और घर का वातावरण अशांत बना रहता है, तो पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के इस शुभ दिन एक मिट्टी का दीपक लें। उस दीपक में चार कपूर की टिकियां रखकर उन्हें प्रज्वलित करें। अब इस दीपक को पूरे घर में दिखाएं और अंत में इसे घर के पूजा स्थल पर रख दें। ध्यान रखें कि इसे बुझाना नहीं है। इसके अलावा, यदि जीवनसाथी के साथ दूरियां बढ़ गई हैं या आपसी प्रेम में कमी महसूस हो रही है, तो सूर्यास्त के बाद 11 बार शुक्राचार्य के इस मंत्र का जाप करें: ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:। यह उपाय रिश्तों को फिर से मजबूत बनाने में सहायक हो सकता है।
सामाजिक प्रतिष्ठा और उन्नति के मार्ग
जो लोग अपने करियर, राजनीति या सामाजिक क्षेत्र में नई पहचान बनाना चाहते हैं, उनके लिए यह दिन विशेष है। शुक्रवार को एक खाली मटका लें, ध्यान रहे कि मटके पर ढक्कन लगा होना चाहिए। ढक्कन को सुरक्षित करने के लिए किसी कपड़े या धागे से उसे मजबूती से बांध दें। अपने इष्ट देव का ध्यान करते हुए इस मटके को बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें। यदि आप अपने जीवन के हर क्षेत्र में उन्नति पाना चाहते हैं, तो मिट्टी से जुड़े कार्य करने वाले किसी व्यक्ति, जैसे कुम्हार या किसान को एक सफेद रंग का कपड़ा उपहार में दें। यदि ऐसा करना संभव न हो, तो उन्हें दही से बनी कोई सामग्री खिलाएं।
धन प्राप्ति और व्यापार में सफलता
घर में धन के आगमन को सुचारू बनाने के लिए माता महालक्ष्मी की उपासना को सर्वोत्तम माना गया है। शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी के इस मंत्र का जाप करें: ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमलेकमलालये प्रसीद प्रसीद श्रींह्रींश्रींमहालक्ष्म्यैनमः। यदि आप इस मंत्र का उच्चारण करने में कठिनाई महसूस करते हैं, तो केवल 'श्रींह्रींश्रीं' मंत्र का जाप करना भी प्रभावी होगा। मंत्र जप के लिए स्फटिक की माला को सर्वश्रेष्ठ माना गया है, हालांकि कमलगट्टे या रुद्राक्ष की माला का उपयोग भी किया जा सकता है। इसके अलावा, यदि व्यापार में मंदी का सामना कर रहे हैं, तो एक मिट्टी के बर्तन में शहद भरकर उसे ढक्कन लगाकर घर के उत्तर-पश्चिम कोने में रख दें। अगले दिन इस बर्तन को किसी एकांत स्थान पर छोड़ते समय अपने व्यापार की प्रगति के लिए प्रार्थना करें। धन-धान्य और भौतिक सुखों की वृद्धि के लिए एक पलाश का फूल और एक एकाक्षी नारियल लें। सूखे पलाश के फूल भी पंसारी के यहां आसानी से मिल जाते हैं। इन्हें सफेद कपड़े में लपेटकर अपनी तिजोरी या धन रखने वाले स्थान पर रखें।
स्वास्थ्य और सौभाग्य के लिए उपाय
यदि आप लंबे समय से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं, तो अपने स्वास्थ्य में सुधार लाने के लिए शुक्रवार के दिन ज्वार के आटे की रोटी बनाकर गाय को खिलाएं और गाय के पैर छूकर आशीर्वाद प्राप्त करें। यदि रोटी बनाना संभव न हो, तो आप ज्वार का आटा या साबुत ज्वार के दाने किसी मंदिर में दान कर सकते हैं। सुख-सौभाग्य बढ़ाने के लिए गाय का शुद्ध देसी घी और कपूर की एक डिब्बी मंदिर में दान करें। मंदिर में ही कपूर की एक टिकिया जलाकर भगवान की आरती करने से लाभ मिलता है। साथ ही, खुशहाली बढ़ाने के लिए केतु के मूल मंत्र 'ॐ स्रां स्रीं स्रौं स: केतवे नम:' का जाप करना भी अत्यंत लाभदायक सिद्ध होता है।
पलाश वृक्ष की महत्ता
जीवन में आने वाले सभी कार्यों को शुभ फलदायी बनाने के लिए पलाश या ढाक के वृक्ष की पूजा विशेष मानी जाती है। यदि आपके आसपास पलाश का वृक्ष हो, तो उसकी जड़ में जल अर्पित करें। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि उस वृक्ष को किसी भी प्रकार की हानि न पहुंचाएं और न ही उसके अंगों का उपयोग करें। यदि आपके आसपास ऐसा कोई वृक्ष उपलब्ध नहीं है, तो पलाश के वृक्ष की तस्वीर अपने पास रखें और उसे नमन करें। वैवाहिक जीवन में प्रेम बनाए रखने के लिए दो अच्छी सुगंध वाली इत्र की शीशियां खरीदें, जिनमें से एक मंदिर में दान कर दें और दूसरी अपने जीवनसाथी को भेंट में दें।
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