पाकिस्तान की जेल से आई सबसे डरावनी खबर
पाकिस्तान की राजनीति हमेशा से ही सत्ता के संघर्षों, खूनी साजिशों और जेल की ऊँची दीवारों के बीच सिमटी रही है, लेकिन इस बार रावलपिंडी की अदियाला जेल से जो जानकारी सामने आ रही है, उसने न केवल पूरे पाकिस्तान बल्कि वैश्विक राजनीति के गलियारों में खलबली मचा दी है। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ यानी PTI के प्रमुख इमरान खान की हालत को लेकर जो दावे किए जा रहे हैं, वे रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं। क्या पाकिस्तान के मौजूदा आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर ने अपने इस सबसे बड़े राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी को हमेशा के लिए रास्ते से हटा दिया है? यह सवाल अब हर किसी की जुबान पर है क्योंकि अमेरिका में बैठे एक चर्चित पाकिस्तानी पत्रकार वजाहत सईद खान ने बेहद सनसनीखेज दावा किया है।
सेना मुख्यालय से निकले खौफनाक संकेत
पत्रकार वजाहत सईद खान ने अपने एक वीडियो संदेश में सेना के जनरल हेडक्वार्टर्स यानी GHQ के अंदर के हालात पर बड़ी टिप्पणी की है। उन्होंने दावा किया है कि सेना के कम से कम तीन वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने उन्हें संकेत दिए हैं कि इमरान खान अब इस दुनिया में नहीं हैं। हालांकि, इन दावों की अभी तक किसी भी आधिकारिक मंच से पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन GHQ के भीतर जिस प्रकार की बेचैनी और गहमागहमी देखी जा रही है, वह किसी बड़े भूचाल का संकेत देती है। वजाहत सईद का कहना है कि यह उनकी रिपोर्टिंग है जो सीधे सेना के आला अफसरों से मिली है। उन अधिकारियों का मानना है कि इमरान खान जेल के अंदर दम तोड़ चुके हैं और जनरल आसिम मुनीर इस सच्चाई को पूरे देश से छिपाने की कोशिश कर रहे हैं। यदि यह सच है, तो यह पाकिस्तान के इतिहास की सबसे बड़ी और विनाशकारी घटना साबित हो सकती है।
अगस्त 2023 से जेल में कैद इमरान खान
याद दिला दें कि इमरान खान अगस्त 2023 से अदियाला जेल में बंद हैं। उन पर भ्रष्टाचार के कई गंभीर आरोप मढ़े गए हैं, जिनमें 190 मिलियन पाउंड का अल-कादिर ट्रस्ट मामला भी शामिल है। पिछले कई महीनों से उनकी स्थिति बेहद रहस्यमयी बनी हुई है। उनके परिवार के सदस्यों, वकीलों, पार्टी के सहयोगियों और यहां तक कि उनके निजी डॉक्टरों को भी उनसे मिलने नहीं दिया जा रहा है। जब भी कोई उनसे मिलने की कोशिश करता है, तो उसे बैरंग लौटा दिया जाता है। इस तरह की नाकेबंदी ने इमरान के समर्थकों और उनके परिवार के भीतर एक गहरा डर पैदा कर दिया है कि जेल की चार दीवारों के पीछे इमरान खान के साथ कुछ बहुत ही बुरा हुआ है।
आसिम मुनीर के साथ पुरानी दुश्मनी
सवाल यह उठता है कि आखिर जनरल आसिम मुनीर और इमरान खान के बीच ऐसा क्या हुआ कि बात जीवन और मरण के स्तर तक पहुँच गई? इसकी जड़ें साल 2018 में जाती हैं जब इमरान खान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री थे और आसिम मुनीर देश की शक्तिशाली खुफिया एजेंसी ISI के प्रमुख बनाए गए थे। अक्टूबर 2018 में मुनीर के ISI की कमान संभालने के महज 8 महीने के भीतर ही इमरान खान ने उन्हें पद से हटा दिया। कहा जाता है कि मुनीर ने इमरान खान की पत्नी बुशरा बीबी से जुड़े भ्रष्टाचार के मामलों को उठाया था, जिससे नाराज होकर इमरान ने अपनी सत्ता का पूरा जोर लगाकर मुनीर को ISI प्रमुख के पद से बर्खास्त करा दिया। यह पाकिस्तान के सैन्य इतिहास में किसी भी ISI चीफ का सबसे छोटा कार्यकाल था, जिसने आसिम मुनीर की साख को गहरा धक्का पहुँचाया था।
बाद में जब इमरान खान सत्ता से बाहर हुए और शहबाज शरीफ की सरकार आई, तो नियमों में बदलाव करके उसी आसिम मुनीर को पाकिस्तान का सबसे शक्तिशाली सेना प्रमुख बना दिया गया। तब से ही आसिम मुनीर और इमरान खान के बीच सीधी और घातक दुश्मनी शुरू हो गई। इमरान खान ने कई मौकों पर सार्वजनिक रूप से कहा था कि पाकिस्तान अब सरकार नहीं, बल्कि सिर्फ आर्मी चीफ चला रहा है और उन्हें जेल में डालने के पीछे सिर्फ और सिर्फ मुनीर की निजी खुन्नस है।
20 लाख समर्थकों का सड़कों पर उतरने का ऐलान
इमरान खान की सेहत को लेकर फैल रही इन खबरों के बीच खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री और PTI के दिग्गज नेता सोहेल अफरीदी ने फौज और हुकूमत को खुली चुनौती दी है। अफरीदी का कहना है कि इमरान खान से डॉक्टरों और परिवार को न मिलने देने से देश के युवाओं का गुस्सा उबल रहा है। सोहेल अफरीदी ने दावा किया है कि उनके पास 20 लाख से ज्यादा ऐसे समर्पित लोग हैं जो एक इशारे पर इस्लामाबाद की ओर कूच करने और सड़कों पर उतरने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। PTI ने 27 सितंबर को इस्लामाबाद की तरफ एक बड़े 'लॉन्ग मार्च' का ऐलान किया है, जिससे प्रशासन के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं।
क्या पाक फौज के अंदर ही है बगावत?
इमरान खान का खौफ केवल सड़कों तक सीमित नहीं है, बल्कि रावलपिंडी के सैन्य मुख्यालय के अंदर भी यह साफ महसूस किया जा सकता है। खबरों की मानें तो इमरान की लोकप्रियता और सेना की दमनकारी नीति के चलते फौज के भीतर ही गहरे मतभेद पैदा हो गए हैं। 9 मई 2023 की घटनाओं के बाद, जब समर्थकों ने सैन्य अधिकारियों के ठिकानों को निशाना बनाया था, तो कई जनरलों ने अपने ही लोगों पर गोली चलाने से इनकार कर दिया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, लाहौर के कोर कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल फैयाज घानी को इसलिए हटा दिया गया क्योंकि उन्होंने आसिम मुनीर की 'टक्कर लेने वाली' नीति का विरोध किया था। इसके अलावा जनरल आसिफ गफूर और जनरल साहिबजादा साहिर शमशाद मिर्जा जैसे कमांडरों ने भी मुनीर को इमरान के साथ सीधी भिड़ंत से बचने की सलाह दी थी। सेना के भीतर तख्तापलट जैसी चर्चाएं भी सामने आती रही हैं।
मरने से पहले ही बदतर हालत?
यह पहली बार नहीं है जब इमरान खान की मौत या उनकी गंभीर स्वास्थ्य स्थिति की चर्चा हुई है। पिछले साल नवंबर में भी ऐसी अफवाहें उड़ी थीं, लेकिन बाद में उनकी बहन उजमा खानम के मिलने के बाद पता चला था कि वह जीवित तो हैं, लेकिन बेहद कठिन और एकांत परिस्थितियों में रखे गए हैं। उस समय खबर आई थी कि उनकी आंखों की रोशनी कम हो रही है और वह इलाज के अभाव में तड़प रहे हैं। उन्हें ऐसी अंधेरी कोठरी में रखा गया है जहाँ इंसानों का चेहरा देखना भी मुश्किल है। इस बार का माहौल पहले से कहीं अधिक चिंताजनक है। 70 साल से अधिक उम्र के इमरान खान को शारीरिक और मानसिक रूप से तोड़ने के आरोप लगातार लग रहे हैं। यदि इन दावों में रत्ती भर भी सच्चाई है, तो पाकिस्तान आने वाले समय में एक ऐसे गृहयुद्ध की आग में जल सकता है, जो पूरे दक्षिण एशिया को अस्थिर कर सकता है।
https://hindi.news18.com/world/pakistan-imran-khan-no-more-know-asim-munir-rivalry-history-which-brought-pakistan-former-pm-to-adiala-jail-extreme-torture-10743183.html