भोपाल गोमांस प्रकरण में नया मोड़: असलम चमड़ा ने अदालत से मांगी सीसीटीवी फुटेज, अब 18 जून को होगी सुनवाई

भोपाल के स्लॉटर हाउस से जुड़े चर्चित गोमांस मामले में आरोप तय होने से पहले बचाव पक्ष ने प्रत्यक्ष सबूत और सीसीटीवी फुटेज की मांग की है। कोर्ट ने एसआईटी से जवाब तलब किया है और अगली सुनवाई 18 जून 2026 को तय की गई है।

भोपाल नगर निगम के स्लॉटर हाउस में कथित रूप से गोवंश काटे जाने और गोमांस की तस्करी के बहुचर्चित मामले ने अब एक नई कानूनी बहस को जन्म दे दिया है। मुख्य आरोपी असलम कुरैशी उर्फ असलम चमड़ा की ओर से अदालत में आवेदन दाखिल कर मांग की गई है कि आरोप तय करने से पहले एसआईटी यह साबित करे कि गायों को स्लॉटर हाउस के भीतर लाया गया, उनका वध किया गया और मांस पैक करके विदेश भेजा जा रहा था।

बचाव पक्ष का तर्क है कि अब तक ऐसा कोई प्रत्यक्ष सीसीटीवी फुटेज पेश नहीं किया गया है, जो घटना को प्रमाणित कर सके। इस आवेदन पर अदालत ने एसआईटी से जवाब तलब किया है और अगली सुनवाई 18 जून 2026 को निर्धारित की गई है। यह विवाद जहां पूरे मामले की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा रहा है, वहीं हिंदू संगठनों में भी असंतोष बढ़ा रहा है।

कोर्ट में सीसीटीवी फुटेज की मांग

मुख्य आरोपी असलम चमड़ा के वकील जगदीश गुप्ता ने अदालत से पूरी सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराने की मांग रखी है। उनका कहना है कि जब तक गायों को स्लॉटर हाउस में लाकर काटे जाने का प्रत्यक्ष प्रमाण सामने नहीं आता, तब तक आरोप तय नहीं किए जा सकते।

बताया जा रहा है कि आरोपी असलम चमड़ा के पास बीते 30 सालों से नगर निगम का ठेका था। शुरुआती जांच में यह बात उजागर हुई थी कि इस नेटवर्क के जरिए मांस खाड़ी देशों और हड्डियां चीन भेजी जा रही थीं।

22 दिनों की भूमिका पर सवाल

17 दिसंबर 2025 को ट्रक पकड़े जाने के बाद पुलिस ने 8 जनवरी 2026 को एफआईआर दर्ज की और स्लॉटर हाउस को सील कर दिया। बचाव पक्ष का कहना है कि इन 22 दिनों के दौरान परिसर और सीसीटीवी सिस्टम पर आरोपियों का ही नियंत्रण था, जिसके चलते सबूतों की प्रामाणिकता संदेह के घेरे में आती है। इसी आधार पर बचाव पक्ष सबूतों की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठा रहा है।

लैब रिपोर्ट ने बढ़ाई उलझन

मथुरा लैब के बाद हैदराबाद भेजे गए सैंपल की रिपोर्ट में कहा गया कि मांस सड़ चुका था और वह जांच योग्य नहीं बचा था। एसआईटी ने इस संबंध में प्राप्त ई-मेल को अदालत में पेश किया है। इस पूरे प्रकरण ने भोपाल की कानून-व्यवस्था, पुलिस जांच और सांप्रदायिक संवेदनशीलता को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है, और अब एसआईटी अदालत में अपना पक्ष रखेगी।

कब-क्या हुआ, एक नजर में घटनाक्रम

  • 17 दिसंबर 2025: भोपाल के जहांगीराबाद में 26 टन मांस से भरा ट्रक हिंदू संगठनों ने रोका, जिसके बाद बवाल शुरू हुआ।
  • 23 दिसंबर 2025: मथुरा लैब से गोमांस की रिपोर्ट सामने आई।
  • 8 जनवरी 2026: असलम चमड़ा और ड्राइवर शोएब के खिलाफ कोलार रोड पुलिस में एफआईआर दर्ज की गई।
  • मार्च 2026: असलम चमड़ा के खिलाफ चालान पेश हुआ और सेशंस कोर्ट ने 35,000 रुपये के मुचलके पर जमानत दी।
  • मार्च 2026: हिंदू संगठनों के विरोध के बाद पुलिस ने रासुका (एनएसए) लगाकर असलम चमड़ा को दोबारा जेल भेज दिया।
  • जून 2026: आरोप तय होने से पहले असलम चमड़ा के वकील ने अदालत में आवेदन देकर सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्ष सबूत मांगे।
  • 18 जून 2026: अगली सुनवाई, जिसमें एसआईटी अदालत में अपना जवाब प्रस्तुत करेगी।

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