बारिश में नन्ही पौध को बचाएगा किसान का देसी जुगाड़, कम लागत में तैयार की अनोखी नर्सरी

रामपुर के एक प्रगतिशील किसान ने बारिश के दौरान मिर्च और गोभी की नाजुक पौध को सुरक्षित रखने के लिए मच्छरदानी और बांस का उपयोग कर कम लागत वाला नर्सरी हाउस बनाया है। पिछले 5 वर्षों से अपनाया जा रहा यह तरीका अब कई किसानों के लिए मिसाल बन गया है।

मानसून और किसानों की चिंता

बरसात का मौसम कृषि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, लेकिन यह अपने साथ कई चुनौतियां भी लेकर आता है। किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या अपनी फसलों की नन्ही और कोमल पौध को बचाने की होती है। जैसे ही खेतों में नमी बढ़ती है, तेज बारिश का खतरा बढ़ जाता है। यदि बारिश की तेज बूंदें सीधे छोटी पौध पर पड़ती हैं, तो मिट्टी बहने की संभावना रहती है। इसके साथ ही, बीज अपनी जगह से हिल सकते हैं और अत्यधिक नमी के कारण पौधों के गलने का डर भी बना रहता है। यदि शुरुआत में ही पौध कमजोर रह जाए, तो खेत में अच्छी फसल की पैदावार की कल्पना करना मुश्किल हो जाता है। रामपुर के किसान गेंदालाल ने इसी समस्या का एक अत्यंत प्रभावी और सस्ता देसी समाधान ढूंढ निकाला है।

मच्छरदानी से तैयार किया खास नर्सरी हाउस

किसान गेंदालाल ने मिर्च और गोभी की पौध को सुरक्षित रखने के लिए बांस, लकड़ी, मजबूत रस्सी और पुरानी मच्छरदानी का उपयोग करते हुए एक छोटा और सस्ता नर्सरी हाउस तैयार किया है। उन्होंने इस जालीनुमा ढांचे को चारों तरफ से पूरी तरह ढका हुआ है, जिससे बाहर की तेज बारिश पौध को नुकसान नहीं पहुंचा पाती। इस व्यवस्था की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें मिर्च और गोभी की पौध को बहुत ही व्यवस्थित तरीके से तैयार किया जा रहा है। किसान ने हर क्यारी में 10 ग्राम बीज के हिसाब से जगह निर्धारित की है, ताकि बीज घने न हों और पौधों को विकसित होने के लिए पर्याप्त स्थान मिल सके। इस नर्सरी से वे कुल दो एकड़ भूमि के लिए पौध तैयार करने की योजना बना रहे हैं, जिसमें एक एकड़ में मिर्च और दूसरे एकड़ में गोभी की फसल लगाई जाएगी।

मिट्टी की तैयारी में बरती सावधानी

गेंदालाल ने केवल ढांचा बनाने पर ही ध्यान नहीं दिया, बल्कि नर्सरी की जमीन को भी वैज्ञानिक तरीके से तैयार किया है। उन्होंने सबसे पहले जमीन की सतह को साफ किया और फावड़े से गहराई तक खुदाई की। मिट्टी में मौजूद खरपतवार और कूड़ा-कचरा हटाने के बाद उन्होंने इसमें अपने पशुओं के गोबर से तैयार की गई जैविक खाद का प्रयोग किया। पूरी जमीन को छोटी-छोटी क्यारियों में विभाजित किया गया है, जिससे प्रत्येक पौधे की निगरानी करना, सही मात्रा में पानी देना और यदि कोई पौधा खराब दिखे तो उसे तुरंत हटाना बहुत आसान हो गया है।

जाली के प्रयोग से बारिश की मार कम

बरसात के दौरान जब पानी तेज धार के साथ सीधे पौध पर गिरता है, तो पौधों के टूटने और मिट्टी के कटाव का खतरा रहता है। मच्छरदानी जैसी जाली का इस्तेमाल करने का बड़ा लाभ यह है कि यह बारिश की बूंदों की रफ्तार को धीमा कर देती है। पानी जाली से छनकर धीरे-धीरे नीचे गिरता है, जिससे पौधों पर सीधी चोट नहीं लगती। साथ ही, यह जाली नर्सरी के भीतर हवा के संचार को बनाए रखती है, जिससे पौधों में फफूंद लगने का खतरा कम हो जाता है। गेंदालाल बताते हैं कि यह तकनीक पिछले 5 सालों से वे सफलतापूर्वक अपना रहे हैं।

जैविक खाद का महत्व

गेंदालाल ने बाजार से महंगी रासायनिक खाद खरीदने के बजाय अपने पशुओं के गोबर को सड़ाकर जैविक खाद तैयार की। अच्छी तरह से सड़ी हुई यह खाद न केवल मिट्टी के कार्बनिक गुणों को बढ़ाती है, बल्कि मिट्टी की बनावट में भी सुधार करती है। इससे मिट्टी सख्त नहीं होती और पौधों की जड़ें आसानी से गहराई तक फैल सकती हैं। स्वस्थ और मजबूत जड़ प्रणाली ही एक मजबूत फसल का आधार होती है।

बेहतर पौध से बंपर पैदावार की उम्मीद

किसान गेंदालाल का मानना है कि फसल की सफलता खेत में लगाने से पहले ही सुनिश्चित हो जाती है। यदि पौध स्वस्थ और मजबूत होगी, तो वह खेत की मिट्टी में आसानी से जम जाएगी और तेजी से बढ़ेगी। मिर्च और गोभी की पौध को तैयार करने में की गई यह मेहनत भविष्य में शानदार परिणाम देगी। जब फसल अच्छी और एक समान गुणवत्ता की होती है, तो उसे बाजार में बेचने पर अच्छी कीमत मिलती है। इस तरह के छोटे लेकिन महत्वपूर्ण नवाचार यह साबित करते हैं कि कम संसाधन और सीमित बजट में भी खेती को लाभदायक बनाया जा सकता है। यह तरीका उन छोटे किसानों के लिए एक बेहतरीन उदाहरण है जो बारिश के कारण हर साल अपनी फसल के नुकसान से जूझते हैं।

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