राष्ट्रपति की मंजूरी और लाल किले पर विशेष तैयारियां
देश के राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' को लेकर एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सामने आया है। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज 'वंदे मातरम विधेयक' पर अपने हस्ताक्षर कर दिए हैं। राष्ट्रपति की इस मंजूरी के बाद अब देश के प्रत्येक नागरिक के लिए राष्ट्रगीत वंदे मातरम का उसी प्रकार आदर और सम्मान करना अनिवार्य होगा, जिस तरह राष्ट्रगान 'जन-गण-मन' का किया जाता है। नए कानून के अंतर्गत अब देश के सभी सरकारी कार्यक्रमों और आयोजनों में राष्ट्रगान के साथ-साथ राष्ट्रगीत का गायन भी अनिवार्य रूप से किया जाएगा।
इस ऐतिहासिक कदम का असर आगामी स्वतंत्रता दिवस के समारोह में भी देखने को मिलेगा। इस वर्ष लाल किले की प्राचीर से पहली बार वंदे मातरम का गायन किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन से ठीक पहले वंदे मातरम के पूरे 6 स्टेंजा गाए जाएंगे। केंद्र सरकार का इस विषय पर कहना है कि यह निर्णय अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी वर्ष वंदे मातरम गीत की रचना के 150 वर्ष भी पूरे हो रहे हैं। यही कारण है कि इस बार के स्वतंत्रता दिवस समारोह की मुख्य थीम भी 'वंदे मातरम' ही निर्धारित की गई है। जब लाल किले पर पहली बार ऐतिहासिक रूप से वंदे मातरम का गायन चल रहा होगा, ठीक उसी समय भारतीय वायु सेना के MI-17 हेलीकॉप्टर से वहां मौजूद लोगों पर फूलों की वर्षा की जाएगी। इस विशेष हेलीकॉप्टर पर वंदे मातरम का एक बड़ा बैनर भी प्रदर्शित किया जाएगा।
वंदे मातरम को लेकर महाराष्ट्र में राजनीतिक घमासान
एक ओर जहां सरकार इस ऐतिहासिक उत्सव की तैयारियों में पूरी तरह जुटी हुई है, वहीं दूसरी ओर इस फैसले को लेकर देश की सियासत भी गरमा गई है। वंदे मातरम विधेयक को लेकर सबसे तीखी राजनीतिक बयानबाजी महाराष्ट्र में देखने को मिल रही है। कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार मुस्लिम समुदाय के लोगों को परेशान करने के उद्देश्य से उन पर जबरन वंदे मातरम थोपना चाहती है। विपक्षी नेताओं का दावा है कि इस फैसले के पीछे देशप्रेम की कोई भावना नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह से बीजेपी का एक धार्मिक एजेंडा है।
इन आरोपों के बीच महाराष्ट्र के डिप्टी चीफ मिनिस्टर एकनाथ शिंदे ने पलटवार किया है। उन्होंने इस विरोध पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि यह बेहद हैरान करने वाली बात है कि कुछ लोगों को देश के राष्ट्रगीत में भी धर्म दिखाई दे रहा है। उन्होंने विरोध करने वाले नेताओं को नसीहत दी कि ऐसे लोगों को अपना मजहबी चश्मा उतारकर राष्ट्र के हित में सोचना चाहिए। इस पर आदित्य ठाकरे ने एकनाथ शिंदे को जवाब देते हुए एक नया सवाल खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा कि अगर वंदे मातरम वाकई इतना महत्वपूर्ण है, तो शिंदे को बीजेपी के नेताओं से यह पूछना चाहिए कि जब संसद में यह विधेयक पारित किया जा रहा था, तब प्रधानमंत्री और गृहमंत्री सदन के भीतर उपस्थित क्यों नहीं थे।
नितेश राणे के बयान से भड़का नया विवाद
इस पूरे मामले में सबसे विवादित बयान महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नितेश राणे की ओर से आया है। दरअसल, कुछ मुस्लिम संगठनों ने इस बात की घोषणा की है कि मदरसों में वंदे मातरम का गायन नहीं किया जाएगा क्योंकि उनका धर्म यानी इस्लाम उन्हें इसकी अनुमति नहीं देता है। इस घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए नितेश राणे ने कहा कि जिन भी मदरसों को वंदे मातरम गाने से परहेज है, उनकी सरकारी फंडिंग को तुरंत प्रभाव से रोक दिया जाना चाहिए।
नितेश राणे के इस विवादित बयान के बाद महाविकास अघाड़ी के तमाम नेताओं ने अपनी कड़ी नाराजगी और विरोध दर्ज कराया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नसीम खान ने इस पर बोलते हुए कहा कि बीजेपी का देशप्रेम केवल एक दिखावा है। वर्तमान में देश की जनता के भीतर बीजेपी के खिलाफ भारी नाराजगी व्याप्त है। इसी जन-आक्रोश से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए बीजेपी ने जानबूझकर वंदे मातरम के इस संवेदनशील मुद्दे को उठाया है और नितेश राणे जैसे नेताओं को आगे करके नफरत फैलाने वाले बयान दिलवाए जा रहे हैं।
https://www.indiatv.in/india/national/president-murmu-gives-assent-to-vande-mataram-bill-but-why-political-uproar-in-country-on-it-2026-08-11-1236732