अमेरिका के वांटेड आतंकी को बचाने की कानूनी जद्दोजहद
बांग्लादेश में एक बार फिर आतंकवाद से जुड़े गंभीर मामलों को लेकर खलबली मची है। चर्चा के केंद्र में हैं सैयद जियाउल हक, जिन्हें आमतौर पर मेजर जिया के नाम से जाना जाता है। जिया अमेरिका में वांटेड हैं और उन पर अमेरिकी नागरिक एवं लेखक अविजित रॉय की हत्या का दोष सिद्ध हो चुका है। अब रिपोर्ट्स के अनुसार, बांग्लादेश के कुछ रिटायर्ड सैन्य अधिकारियों का एक समूह कथित तौर पर मेजर जिया को कानूनी राहत दिलाने के अभियान में जुट गया है। इनका मकसद जिया के खिलाफ चल रहे नौ लंबित आपराधिक मामलों को खत्म करवाना, उनकी सजा पर रोक लगवाना और उन्हें दोबारा सेना में बहाल कराने का रास्ता तैयार करना है। यह घटनाक्रम न केवल बांग्लादेश की न्याय प्रणाली पर सवाल उठा रहा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ सहयोग की प्रतिबद्धता को भी एक बड़ी चुनौती के रूप में पेश कर रहा है।
साल 2015 की वह दर्दनाक घटना
इस पूरे मामले की जड़ 26 फरवरी 2015 की उस घटना में है, जब ढाका के एक पुस्तक मेले में शामिल होने पहुंचे अमेरिकी लेखक अविजित रॉय और उनकी पत्नी रफीदा बोन्या अहमद पर जानलेवा हमला हुआ था। हमलावरों ने धारदार हथियारों से दोनों को बुरी तरह घायल कर दिया था। इस क्रूर हमले में अविजित रॉय ने दम तोड़ दिया, जबकि उनकी पत्नी किसी तरह अपनी जान बचाने में सफल रहीं। पुलिस और न्यायिक जांच के बाद इस मामले में कुल छह लोगों को दोषी ठहराया गया था। इन दोषियों में सैयद जियाउल हक और अकरम हुसैन के नाम प्रमुखता से शामिल थे। हैरानी की बात यह है कि इन दोनों पर मुकदमा उनकी अनुपस्थिति में चला, क्योंकि घटना के बाद से ही ये दोनों अपराधी फरार हैं। इस हमले की जिम्मेदारी अंसारुल्लाह बांग्ला टीम ने ली थी और बाद में AQIS के तत्कालीन प्रमुख आसिम उमर ने वीडियो जारी कर इस कृत्य को अपने समर्थकों का काम बताया था।
अमेरिका का इनाम और वैश्विक चिंता
अमेरिकी विदेश विभाग ने 1 मई 2022 को एक बड़ा कदम उठाते हुए सैयद जियाउल हक और अकरम हुसैन के बारे में पुख्ता जानकारी देने वालों के लिए 50 लाख डॉलर के इनाम की घोषणा की थी। यह इनाम उनकी गिरफ्तारी या दोषसिद्धि तक पहुंचाने वाली सूचना के लिए रखा गया था। अब जब बांग्लादेश के भीतर ही जिया को बचाने की कोशिशें तेज हो गई हैं, तो वाशिंगटन और ढाका के बीच आतंकवाद विरोधी सहयोग की भविष्य की दिशा पर गंभीर सवाल उठना स्वाभाविक है। अगर किसी ऐसे व्यक्ति को कानूनी राहत देने का प्रयास किया जाता है जो वैश्विक स्तर पर एक आतंकवादी घोषित है, तो यह कूटनीतिक और सुरक्षा संबंधी संबंधों के लिए एक बड़ा झटका हो सकता है।
कौन है सैयद जियाउल हक उर्फ मेजर जिया?
जांच एजेंसियों के रिकॉर्ड के अनुसार, 2013 से 2016 के बीच बांग्लादेश में हुए कई लक्षित हमलों में जियाउल हक का नाम बार-बार सामने आया। फरार होने के बाद, जिया लंबे समय तक भूमिगत रहा और बाद में वह अंसार अल-इस्लाम के सैन्य विंग के प्रमुख के रूप में उभरा। यह संगठन मुख्य रूप से AQIS के साथ जुड़ा हुआ माना जाता है। इस समूह पर बुद्धिजीवियों, सेकुलर ब्लॉगर्स, लेखक वर्ग और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने के गंभीर आरोप रहे हैं। 2007 में जमातुल मुस्लिमीन के रूप में शुरू हुआ यह संगठन 2013 में ABT और फिर अंसार अल-इस्लाम के नाम से सक्रिय हुआ। 2016 में अमेरिकी सरकार ने AQIS को आधिकारिक रूप से एक विदेशी आतंकवादी संगठन और जिया को वैश्विक आतंकवादी के रूप में नामित किया था।
पूर्व सैन्य अधिकारियों का सक्रिय दखल
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू Bangladesh: Armed Forces Retired Officers Welfare Association यानी RAWA के सदस्यों का शामिल होना है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस संगठन ने सरकारी मंत्रालयों में आवेदन देकर जिया की सजा पर रोक लगाने और लंबित मामलों को वापस लेने की औपचारिक मांग की है। पूर्व सैन्य अधिकारियों का तर्क है कि मेजर जिया के खिलाफ बनाए गए मामले राजनीतिक साजिश का हिस्सा थे और कानूनी कार्यवाही में कई खामियां थीं। उनका दावा है कि इन कोशिशों के जरिए जिया के लिए देश लौटने का रास्ता साफ किया जा सकता है।
कानूनी दांव-पेच और लंबित मामलों की फेहरिस्त
जिया को बचाने के लिए जो कानूनी रास्ता अपनाया जा रहा है, उसके तहत गृह मंत्रालय में आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 401 के अंतर्गत आवेदन दिया गया है, ताकि उसे मिली मौत की सजा को रोका जा सके। इसके अलावा, Political Cases Review Committee के समक्ष भी मामले को ले जाने की कोशिशें चल रही हैं। सूत्रों की मानें तो RAWA के संयुक्त महासचिव रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल अबू नवरोज खुर्शीद आलम ने वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के साथ कई बैठकें की हैं। वहीं, गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने भी इन मुलाकातों की पुष्टि की है, हालांकि कानून मंत्री एम. असदुज्जमान ने इस विषय पर चुप्पी साधे रखना ही उचित समझा।
9 मामलों को खत्म करने की मांग
मामला केवल मौत की सजा तक ही सीमित नहीं है। दस्तावेजों से संकेत मिलता है कि ढाका मेट्रोपॉलिटन पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ने जिया का नाम 9 लंबित मामलों से हटाने की सिफारिश तक कर दी है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि पहले से ही जिला समीक्षा समिति ने 61 मामलों को वापस लेने की सिफारिश की थी, और जिया के मामले को भी उसी तर्ज पर देखा जाना चाहिए। साथ ही, पुलिस महानिदेशक के समक्ष 20 लाख टका के इनाम को वापस लेने की भी मांग की गई है।
भविष्य के संकेत
क्या बांग्लादेश की सरकार इन मांगों को स्वीकार करेगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। लेकिन यह घटनाक्रम स्पष्ट करता है कि जियाउल हक के मामले का असर केवल बांग्लादेश के आंतरिक कानून तक सीमित नहीं रहने वाला है। यह मामला 11 सितंबर 2001 के बाद वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ बनी उस अंतरराष्ट्रीय सहमति की परीक्षा भी है, जिसका पालन करना बांग्लादेश के लिए वैश्विक सहयोग के दृष्टिकोण से अनिवार्य है। फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या मेजर जिया को कानून के दायरे से बाहर निकालने का प्रयास सफल होगा या अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे सरकार को कदम पीछे खींचने पड़ेंगे।
https://hindi.news18.com/world/south-asia-bangladesh-major-zia-us-wanted-terrorist-legal-relief-retired-army-officers-avijit-roy-murder-ws-l-10738234.html