चंदौली के मुगलसराय क्षेत्र में बसे चतुर्भुजपुर गांव में लंबे इंतजार के बाद आखिरकार सड़क बनाने का काम शुरू हुआ, लेकिन काम शुरू होते ही इसकी गुणवत्ता को लेकर स्थानीय लोगों ने तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों और क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि सड़क का निर्माण तय मानकों के अनुसार नहीं किया जा रहा है। लोगों के मुताबिक जिस तरह सड़क पर सामग्री डाली जा रही है और जैसा काम चल रहा है, उससे यह सड़क बरसात का एक मौसम भी झेल नहीं पाएगी।
स्थानीय निवासियों ने निर्माण को लेकर खुलकर नाराजगी जताई और आरोप लगाया कि न तो काम की उचित तैयारी की गई है और न ही गुणवत्ता पर ध्यान दिया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि इस्तेमाल हो रही सामग्री मानक के अनुरूप नहीं है और सड़क की मोटाई भी काफी कम रखी जा रही है।
निर्माण की गुणवत्ता पर उठते सवाल
गांव के निवासी जय पाठक ने बताया कि सड़क बनाने का काम सही ढंग से नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि जब शुरुआत में काम आरंभ हुआ था, तब सड़क की जमीन को ठीक तरह दबाकर मिट्टी डाली गई थी, मगर अब जिस तरीके से गिट्टी और दूसरी सामग्री बिछाई जा रही है, वह मानकों के अनुरूप नहीं दिखती।
उन्होंने आरोप लगाया कि सड़क की परत बहुत पतली बिछाई जा रही है, जिसकी मोटाई लगभग आधा इंच के आसपास नजर आ रही है और यह भारी वाहनों का दबाव नहीं सह पाएगी। जय पाठक के अनुसार यह सड़क क्षेत्र की मुख्य संपर्क सड़क है जिस पर लगातार आवागमन रहता है, इसलिए इसका मजबूत और टिकाऊ होना जरूरी है। उन्होंने आशंका जताई कि अगर निर्माण इसी तरह चलता रहा तो सड़क एक साल भी नहीं टिक पाएगी।
दो दशक बाद मिला सड़क बनने का मौका
क्षेत्र के रहने वाले संजय कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि करीब 20 वर्षों के बाद इस सड़क का निर्माण हो रहा है, लेकिन जैसा काम चल रहा है, उसे देखकर नहीं लगता कि सड़क ज्यादा समय तक चलेगी। उन्होंने बताया कि पहले निर्माण से पहले सफाई, गिट्टी बिछाने, रोलर चलाने जैसी तकनीकी प्रक्रियाएं पूरी होती थीं और उसके बाद अलकतरा तथा अन्य सामग्री का प्रयोग किया जाता था, पर मौजूदा काम में ऐसी कोई प्रक्रिया दिखाई नहीं दे रही।
संजय कुमार ने कहा कि सड़क की मोटाई को लेकर भी लोगों के मन में संदेह है। उनका मानना है कि इस गुणवत्ता को देखते हुए सड़क 4 से 6 महीने भी नहीं चल पाएगी। उन्होंने पूरे निर्माण कार्य में पारदर्शिता की कमी का भी आरोप लगाया।
मानकों के अनुसार हो काम की मांग
पारसनाथ यादव ने बताया कि वह बाजार से लौट रहे थे, तभी निर्माण कार्य देखकर उन्होंने आपत्ति जताई। उनका कहना था कि अगर सड़क स्वीकृत मानकों और तय स्टीमेट के अनुसार नहीं बन रही है तो काम तुरंत रोका जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि स्थानीय लोगों ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई है और संबंधित ठेकेदार को मौके पर बुलाने की मांग भी की है।
पारसनाथ यादव ने कहा कि अगर सड़क तय गुणवत्ता के अनुसार बनेगी तो लोग उसका स्वागत करेंगे, लेकिन यदि मानकों की अनदेखी हुई तो विरोध जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि इस मार्ग से रोजाना बड़ी संख्या में लोग गुजरते हैं और भारी वाहन भी लगातार चलते हैं, इसलिए सड़क का मजबूत व टिकाऊ होना बेहद आवश्यक है।
एक महीने भी न टिकने की आशंका
स्थानीय युवक अंकित यादव ने कहा कि करीब 10 से 15 वर्षों के बाद इस सड़क का निर्माण हो रहा है, लेकिन काम की हालत देखकर लगता है कि यह एक महीने भी नहीं टिकेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सड़क पर बिछाई जा रही परत की मोटाई बेहद कम है।
उन्होंने आसपास के दूसरे इलाकों में बनी सड़कों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां निर्माण की गुणवत्ता कहीं बेहतर है, जबकि यहां लापरवाही बरती जा रही है। अंकित यादव ने कहा कि क्षेत्र से लगातार भारी वाहन गुजरते हैं, ऐसे में कमजोर गुणवत्ता वाली सड़क बरसात शुरू होते ही टूटने लगेगी और लोगों को दोबारा परेशानी झेलनी पड़ेगी। उन्होंने निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार की आशंका भी जताई।
दिखावे के लिए हो रहा काम का आरोप
स्थानीय महिला बेबी देवी ने भी सड़क की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सड़क जरूर बननी चाहिए ताकि लोगों को राहत मिले, पर निर्माण ऐसा हो जो वर्षों तक टिके। उन्होंने आरोप लगाया कि अभी जो काम हो रहा है वह सिर्फ दिखावे के लिए है, सड़क पर पर्याप्त सामग्री नहीं डाली जा रही और काम अस्थायी प्रतीत होता है।
बेबी देवी ने कहा कि अगर सड़क कुछ ही दिनों में खराब हो जाएगी तो निर्माण का कोई फायदा नहीं होगा। उन्होंने नाली निर्माण का मुद्दा भी उठाया और कहा कि सड़क के साथ नालियां नहीं बनाई जा रहीं, जिससे बरसात का पानी सड़क पर जमा होगा और सड़क जल्दी खराब हो जाएगी, साथ ही लोगों को आवागमन में भारी दिक्कत होगी।
स्कूली बच्चों पर पड़ेगी मार
संध्या देवी ने कहा कि जिस तरीके से सड़क बन रही है वह संतोषजनक नहीं है। उन्होंने बताया कि सड़क पर केवल हल्का छिड़काव कर काम किया जा रहा है, जिससे इसकी मजबूती पर सवाल उठते हैं। उनके मुताबिक यह क्षेत्र काफी व्यस्त है और यहां से रोजाना बड़ी संख्या में लोग आते-जाते हैं।
उन्होंने कहा कि बरसात के दिनों में सड़क पर पानी भर जाता है जिससे आवागमन प्रभावित होता है। अगर निर्माण गुणवत्तापूर्ण नहीं हुआ तो स्कूली बच्चों, महिलाओं और आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
ग्रामीणों ने मांगी तकनीकी जांच
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से सड़क निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि काम मानकों के अनुरूप हो रहा है तो इसकी जानकारी सार्वजनिक की जाए, लेकिन यदि कहीं गड़बड़ी है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों बाद सड़क निर्माण का अवसर मिला है, इसलिए इसे जल्दबाजी या लापरवाही में नहीं, बल्कि पूरी गुणवत्ता और पारदर्शिता के साथ बनाया जाना चाहिए, ताकि क्षेत्र के लोगों को लंबे समय तक इसका लाभ मिल सके।
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