कोर्ट की टिप्पणियों का सोशल मीडिया पर गलत इस्तेमाल, सुप्रीम कोर्ट ने CJP मामले में मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने अदालती कार्यवाही और जजों की मौखिक टिप्पणियों को मीम्स बनाकर कमाई करने के चलन पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' से जुड़े मामले में केंद्र और अन्य संबंधित संस्थानों को नोटिस जारी किया है।

सोशल मीडिया पर अदालती कार्यवाही का व्यवसायीकरण

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण याचिका पर संज्ञान लेते हुए नोटिस जारी किया है। यह मामला कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की गतिविधियों और अदालत में जजों व वकीलों के बीच होने वाली मौखिक बातचीत को सोशल मीडिया पर वायरल कंटेंट के रूप में इस्तेमाल करने से संबंधित है। याचिका में इस बात पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है कि किस प्रकार अदालती कार्यवाहियों के दौरान की गई टिप्पणियों को काटकर उन्हें व्यावसायिक लाभ के लिए सोशल मीडिया पर परोसा जा रहा है।

याचिकाकर्ता की मुख्य मांगें

वकील राजा चौधरी द्वारा दायर इस जनहित याचिका (PIL) में कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। याचिका के अनुसार, कोर्ट में जज और वकीलों द्वारा कही गई बातों को तोड़-मरोड़कर राजनीतिक प्रतीकों और मीम्स में बदलकर प्रचारित किया जा रहा है। मुख्य रूप से 15 मई की उस सुनवाई का हवाला दिया गया है, जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश ने कॉकरोच शब्द का इस्तेमाल किया था। याचिकाकर्ता का आरोप है कि इस टिप्पणी का उपयोग करके सोशल मीडिया पर पैसे कमाए जा रहे हैं और जजों की पहचान का गलत फायदा उठाया जा रहा है। इसके अलावा, याचिका में देशभर में बड़ी संख्या में सक्रिय फर्जी वकीलों और उनकी फर्जी लॉ डिग्रियों की व्यापक सीबीआई जांच की मांग भी की गई है।

किन संस्थाओं को मिला नोटिस

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित पक्षों से अपना पक्ष रखने को कहा है। कोर्ट द्वारा जारी नोटिस में निम्नलिखित को शामिल किया गया है:

  • केंद्र सरकार
  • इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY)
  • बार काउंसिल ऑफ इंडिया
  • केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI)

विवाद की पृष्ठभूमि और आगामी सुनवाई

यह पूरा विवाद मई 2026 की उस घटना से जुड़ा है, जब चीफ जस्टिस की एक टिप्पणी ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एक बड़े आंदोलन को जन्म दिया था। तब से यह विषय सोशल मीडिया पर व्यंग्यात्मक और युवा-केंद्रित कंटेंट का एक बड़ा जरिया बन गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि मीम्स और ट्रोलिंग के जरिए अदालती टिप्पणियों को सनसनीखेज बनाना न्यायपालिका की गरिमा के लिए खतरा है। अब सुप्रीम कोर्ट इस पूरे मामले पर अगली सुनवाई 10 सितंबर को करेगा। कोर्ट यह सुनिश्चित करने की कोशिश करेगा कि न्याय प्रक्रिया के नाम पर हो रहे इस व्यावसायिक दुरुपयोग पर किस तरह से अंकुश लगाया जा सकता है।

https://hindi.news18.com/news/nation/cockroach-comment-to-memes-and-viral-content-supreme-court-issues-notice-in-cjp-case-10739243.html