उत्तर प्रदेश में जैसे-जैसे साल 2027 के विधानसभा चुनाव करीब आ रहे हैं, वैसे-वैसे सूबे की सियासत में बयानों की गर्मी बढ़ती जा रही है। इस सिलसिले में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और योगी सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर खासे सक्रिय नजर आ रहे हैं। वह लगभग हर दिन समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर किसी न किसी बहाने जुबानी हमला बोलते रहते हैं।
शनिवार को भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा कर अखिलेश यादव पर बेहद तल्ख अंदाज में निशाना साधा। उन्होंने अखिलेश की सरकार के दौरान लिए गए एक विवादित फैसले का जिक्र किया, जिस पर अदालत ने भी आपत्ति जताई थी।
व्यंग्य भरे अंदाज में शुरू की पोस्ट
राजभर ने अपनी पोस्ट की शुरुआत कटाक्ष करते हुए की। उन्होंने लिखा, 'सुप्रभात अखिलेश जी, कैसे हैं? उम्मीद ही नहीं बल्कि पूरा विश्वास है कि हमेशा की तरह आप बेखबर, मस्त और बिना काम के व्यस्त होंगे।' इसके बाद उन्होंने 6 जून 2013 की तारीख का हवाला देते हुए कहा कि इसी दिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उस समय की समाजवादी पार्टी सरकार से एक अहम सवाल किया था।
राजभर का दावा है कि अदालत ने आतंकवाद से जुड़े मामलों में आरोपियों के खिलाफ मुकदमे वापस लेने के फैसले को लेकर सरकार को कठघरे में खड़ा किया था।
2013 के मामले का दिया हवाला
अपनी पोस्ट में राजभर ने एक पुरानी खबर का स्क्रीनशॉट भी साझा किया। इसमें बताया गया था कि 2007 के लखनऊ, वाराणसी और फैजाबाद बम धमाकों के आरोपियों के खिलाफ मुकदमे वापस लेने के सपा सरकार के फैसले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया था। अदालत ने सरकार से आरोपियों की सूची तलब की थी और इस निर्णय पर सवाल खड़े किए थे।
इसी मुद्दे को आधार बनाकर राजभर ने अखिलेश यादव पर हमला बोला और कहा कि उन्हें अपने पुराने फैसलों को याद कर लेना चाहिए। उन्होंने लिखा कि ऐसा करने से अखिलेश को अपने 'पाप' याद आ जाएंगे और 2027 के विधानसभा चुनाव में हार होने की सूरत में उन्हें EVM या किसी अन्य कारण को दोष देने का बहाना नहीं मिलेगा।
सपा कार्यकर्ताओं पर भी कसा तंज
राजभर ने अपनी पोस्ट में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि जो लोग सपा नेतृत्व का समर्थन करते हैं, उन्हें यह जानना चाहिए कि बीते समय में उनकी सरकार ने कौन-कौन से फैसले लिए थे। इसी वजह से उन्होंने अपनी बात हिंदी में भी लिखने की बात कही।
पोस्ट के आखिर में राजभर ने 'सपा का गढ़, आतंकवाद की जड़' वाला सियासी नारा भी दोहराया। यह नारा लंबे समय से भाजपा और उसके सहयोगी दल समाजवादी पार्टी पर हमला करने के लिए इस्तेमाल करते रहे हैं।
चुनाव से पहले तेज हुई बयानबाजी
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी समय बाकी है, लेकिन प्रदेश में सियासी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जोर पकड़ चुका है। एनडीए के सहयोगी दलों के नेता लगातार समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव पर हमलावर हैं, जबकि विपक्ष भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है। ऐसे हालात में आने वाले दिनों में राजनीतिक बयानबाजी और तीखी होने के संकेत मिल रहे हैं।
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