प्रसिद्ध उद्योगपति और समाजसेवी पद्मश्री बंशीलाल राठी का 93 वर्ष की आयु में निधन हो गया। राजस्थान के नागौर जिले के खींवसर में जन्मे राठी ने चेन्नई को अपनी कर्मभूमि बनाया और वहीं रहकर व्यापार जगत में एक बड़ा नाम कमाया। सीमित औपचारिक शिक्षा के बावजूद उन्होंने अपनी मेहनत और दूरदृष्टि के बल पर जो मुकाम हासिल किया, वह कई पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है।
प्राथमिक शिक्षा से करोड़ों के कारोबार तक
बंशीलाल राठी ने केवल प्राथमिक स्तर तक ही पढ़ाई की थी, लेकिन उनका हौसला और लगन किसी डिग्री से कम नहीं थी। उन्होंने बिल्कुल शून्य से अपना कारोबार शुरू किया और धीरे-धीरे स्टील तथा एक्सपोर्ट के क्षेत्र में बड़ी सफलता अर्जित की। एक साधारण शुरुआत से लेकर बड़े उद्योगपति बनने तक का उनका सफर कठिन परिश्रम और दृढ़ संकल्प की मिसाल माना जाता है।
एक ट्रेन यात्रा ने बदल दी सोच
राठी के जीवन में दान और सेवा की भावना का एक खास प्रसंग जुड़ा हुआ है। एक बार ट्रेन यात्रा के दौरान उन्होंने एक गरीब बच्चे को देखा, और यह दृश्य उनके मन को गहराई तक छू गया। उसी क्षण उन्होंने संकल्प लिया कि वे अपनी कमाई का 25 फीसदी हिस्सा शिक्षा पर खर्च करेंगे। शिक्षा के प्रति इस समर्पण ने उन्हें एक उदार दानवीर के रूप में स्थापित किया।
समाजसेवा और सार्वजनिक योगदान
बंशीलाल राठी अखिल भारतीय माहेश्वरी महासभा के सभापति भी रहे। समाज के विभिन्न वर्गों के कल्याण के लिए उन्होंने कई परोपकारी कार्य किए।
- कई अस्पतालों का निर्माण कराया
- गोशालाओं की स्थापना की
- अनेक स्कूल बनवाए
शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में दिए गए उनके इन योगदानों के कारण ही उन्हें महादानी के रूप में याद किया जाता है, और उनका जीवन सादगी, परिश्रम तथा परोपकार की अनूठी कहानी कहता है।
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