कोलंबिया में शक्तिशाली भूकंप का तांडव: 130 लोगों की मौत, मलबे के नीचे दबी जिंदगी को बचाने के लिए जारी है जंग

पश्चिमी कोलंबिया में आए 7.4 तीव्रता के जोरदार भूकंप ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें अब तक 130 लोगों की जान जा चुकी है और राहत टीमें मलबे में दबे लोगों को खोजने के लिए युद्धस्तर पर काम कर रही हैं।

कोलंबिया में प्राकृतिक आपदा का कहर

कोलंबिया के लिए सोमवार का दिन एक बड़ी और भयानक त्रासदी लेकर आया। पश्चिमी कोलंबिया के विस्तृत इलाके में आए 7.4 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने जनजीवन को पूरी तरह से अस्त व्यस्त कर दिया है। इस प्राकृतिक आपदा के कारण अब तक 130 लोगों की मौत की पुष्टि की जा चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल बताए जा रहे हैं। भूकंप का प्रभाव इतना अधिक था कि कई इमारतें देखते ही देखते मलबे के ढेर में तब्दील हो गईं, जिसके नीचे अब भी कई लोगों के दबे होने की आशंका बनी हुई है। पूरे देश में इस समय अफरा-तफरी का माहौल है और सरकार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नेशनल इमरजेंसी की घोषणा कर दी है।

भूकंप का केंद्र और तीव्रता

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार, भूकंप का केंद्र पश्चिमी कोलंबिया का चोको क्षेत्र रहा। यह केंद्र सैन जोसे डेल पालमार के बेहद करीब स्थित था। चोको का यह क्षेत्र एक पिछड़ा इलाका है जिसकी आबादी लगभग 4800 है, और यह कोलंबिया की राजधानी बोगोटा से करीब 400 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। भूकंप की गहराई जमीन से करीब 107 किलोमीटर नीचे मापी गई थी। इसके झटके इतने ताकतवर थे कि राजधानी बोगोटा तक महसूस किए गए, जिसके बाद डरे हुए लोग अपनी सुरक्षा के लिए घरों और दफ्तरों से निकलकर सड़कों पर आ गए।

तबाही का मंजर और क्षतिग्रस्त इमारतें

भूकंप के कारण मची तबाही की तस्वीरें दिल दहला देने वाली हैं। सार्वजनिक इमारतों से लेकर अस्पतालों तक, हर तरफ बर्बादी का मंजर है। काली शहर के एक अस्पताल में बच्चों के वार्ड और नवजात शिशु विभाग को भारी नुकसान पहुंचा है, जहां छत और दीवारें ढहने से हड़कंप मच गया। इसके अलावा, पेरेइरा, काली और क्विब्दो जैसे शहरों में कई मकान पूरी तरह से गिर गए। मैनिजालेस शहर में मौजूद एक ऐतिहासिक न्यू गोथिक कैथेड्रल का टावर भी इस भीषण भूकंप के झटकों को झेल नहीं सका और ढह गया। केवल पेरेइरा शहर से ही 18 लोगों की मृत्यु की खबर आई है, और वहां के मेयर ने इस स्थिति को बेहद गंभीर करार दिया है। भूकंप की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसके झटके पड़ोसी देश इक्वाडोर में भी महसूस किए गए।

बचाव अभियान और चुनौतियां

इस समय सबसे बड़ी चुनौती मलबे में दबे हुए लोगों को सही सलामत बाहर निकालना है। राहत और बचाव दल लगातार भारी मशीनों और अत्याधुनिक उपकरणों के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहे हैं। सेना को भी इस आपदा राहत कार्य में पूरी तरह से तैनात कर दिया गया है। अस्पतालों और राहत शिविरों के बाहर उन परिवारों की लंबी कतारें देखी जा सकती हैं जो अपने लापता रिश्तेदारों के बारे में कोई खबर मिलने का इंतजार कर रहे हैं। प्रशासन और राहतकर्मियों को डर है कि मलबे को हटाने के काम में जैसे-जैसे प्रगति होगी, मृतकों और घायलों की संख्या में और इजाफा हो सकता है।

सरकार का सख्त एक्शन

कोलंबिया के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति अबेलार्डो डे ला एस्प्रीएला ने आपदा की कमान खुद अपने हाथों में ली है। उन्होंने सेना और आपातकालीन एजेंसियों को आदेश दिया है कि वे प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और घायलों के तत्काल इलाज की व्यवस्था करें। कोलंबिया में हालांकि छोटे भूकंप आना एक सामान्य प्रक्रिया है, जिसे स्थानीय लोग टेम्ब्लोर कहते हैं, लेकिन 6.0 से अधिक तीव्रता वाले बड़े भूकंप कम ही देखने को मिलते हैं। इससे पहले एक बार 6.2 तीव्रता के भूकंप ने कोलंबिया में भारी तबाही मचाई थी, जिसमें 1,100 से अधिक लोगों की जान चली गई थी।

सतर्क रहने की चेतावनी

भूकंप ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि प्रकृति के आगे इंसान कितना लाचार है। कुछ ही सेकंड की हलचल ने हजारों परिवारों की खुशियों को मातम में बदल दिया है। वर्तमान में राहत कार्य तो चल ही रहे हैं, साथ ही सरकार ने लोगों को सलाह दी है कि वे आने वाले समय में संभावित झटकों को लेकर सतर्क रहें। प्रशासन की प्राथमिकता अभी लोगों को बचाने और मलबे के नीचे दबे हुए हर व्यक्ति तक पहुँचने की है।

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