सपनों को हकीकत में बदलने की प्रेरणादायक यात्रा
बिहार के पूर्णिया जिले में रहने वाले डॉ. अभय कुमार झा आज एक जाने-माने दंत चिकित्सक के रूप में पहचाने जाते हैं। उनके डॉक्टर बनने का सफर किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं है। यह सफर केवल उनकी मेहनत का नहीं, बल्कि उनके शिक्षक पिता के अटूट विश्वास और कड़े संघर्षों की बुनियाद पर खड़ा है। एक साधारण सरकारी शिक्षक के घर पले-बढ़े अभय कुमार झा ने साबित कर दिया कि यदि इरादे मजबूत हों, तो सीमित संसाधन कभी भी सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकते।
पिता की इच्छा और बेटों का भविष्य
डॉ. अभय कुमार झा अपने बीते दिनों को याद करते हुए बताते हैं कि उनके पिता सरकारी स्कूल में शिक्षक थे और परिवार में सादगी का माहौल था। उनके पिता की यह दिली ख्वाहिश थी कि उनके तीनों बेटे डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करें। नियति को कुछ और ही मंजूर था, क्योंकि उनके एक भाई ने शिक्षा के क्षेत्र में अपना भविष्य चुना और प्रोफेसर बने, जबकि बाकी दो बेटों ने डॉक्टरी की दुनिया में कदम रखा। डॉ. झा अपने परिवार के पहले ऐसे सदस्य रहे जिन्होंने डॉक्टरी की डिग्री प्राप्त की।
आर्थिक तंगी और बैंक का सहारा
डॉक्टरी की पढ़ाई न केवल मेहनत मांगती है, बल्कि इसके लिए भारी खर्च की भी आवश्यकता होती है। डॉ. झा ने बताया कि उस दौर में पिता की सरकारी शिक्षक के रूप में मिलने वाली आय इतनी नहीं थी कि घर के खर्चों के साथ बच्चों की इतनी महंगी पढ़ाई का भार उठा सकें। कई बार स्थिति इतनी नाजुक हो जाती थी कि दैनिक जरूरतें पूरी करना भी कठिन हो जाता था। ऐसी विषम आर्थिक परिस्थितियों में भी उनके पिता ने हार मानने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने अपने बेटों की पढ़ाई पूरी कराने के लिए बैंकों से एजुकेशन लोन लिया। डॉ. झा आज भी इस बात को स्वीकार करते हैं कि उनके पिता का वह साहसी फैसला और बैंक का आर्थिक सहयोग ही उनकी सफलता की असली नींव साबित हुआ।
सफलता का मूल मंत्र एकाग्रता
जब उनसे उनकी सफलता के रहस्य के बारे में पूछा गया, तो डॉ. अभय झा ने नई पीढ़ी को एक महत्वपूर्ण सीख दी। उनका मानना है कि सफलता के लिए दिन-रात घंटों किताबों में सिर खपाना ही एकमात्र रास्ता नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जरूरी नहीं कि आप दिन में 20 घंटे पढ़ाई करें। उनके अनुसार, अगर आप दिन में सिर्फ 4 घंटे भी पूरी निष्ठा और गहरी एकाग्रता के साथ पढ़ाई करते हैं, तो वह पर्याप्त है। निरंतरता और मन लगाकर की गई मेहनत ही किसी भी कठिन लक्ष्य को हासिल करने में मदद करती है।
जनसेवा में समर्पित जीवन
तमाम संघर्षों को पीछे छोड़कर डॉ. अभय कुमार झा ने अपनी मेहनत से जो मुकाम हासिल किया, वह आज कई युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। फिलहाल, वे पूर्णिया के लाइन बाजार स्थित पोस्टमार्टम रोड पर अपना निजी डेंटिस्ट क्लीनिक चला रहे हैं। वे केवल मरीजों का उपचार ही नहीं कर रहे हैं, बल्कि अपने संघर्षों से भरी इस कहानी के जरिए उन तमाम छात्रों का हौसला भी बढ़ा रहे हैं जो सीमित साधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। उनका जीवन यह संदेश देता है कि मुश्किलों के आगे घुटने टेकने के बजाय यदि सही दिशा में प्रयास किए जाएं, तो सफलता जरूर मिलती है।
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