मक्का की फसल में सही समय पर उर्वरक का महत्व
सागर क्षेत्र में किसानों ने करीब 20 से 25 दिन पहले मक्का की बुवाई पूरी कर ली है। अच्छी पैदावार प्राप्त करने और मुनाफे को बढ़ाने के लिए केवल बीज बोना ही पर्याप्त नहीं होता है। मक्का की फसल से भरपूर उत्पादन लेने के लिए बुवाई के बाद भी उचित देखभाल की जरूरत होती है। सही समय पर सही मात्रा में उर्वरक का उपयोग करना और खरपतवार पर नियंत्रण पाना बेहद महत्वपूर्ण है।
यूरिया की सही मात्रा और उपयोग
कृषि जानकारों के अनुसार मक्का की फसल जब 20 से 25 दिन की हो जाए, तो उसमें खाद का प्रबंधन करना चाहिए। इस अवस्था में पौधों को उचित पोषण की आवश्यकता होती है। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे प्रति एकड़ के हिसाब से 40 किलो यूरिया का प्रयोग करें। यूरिया डालने से पौधों की वानस्पतिक वृद्धि बेहतर होती है और फसल स्वस्थ रहती है।
खरपतवार और जंगली जानवरों से सुरक्षा
फसल को स्वस्थ रखने के लिए कुछ अन्य सावधानियां भी जरूरी हैं:
- खरपतवार नियंत्रण: खेत में अनावश्यक घास और खरपतवार फसल के पोषक तत्वों को सोख लेते हैं, इसलिए समय पर इनका सफाया करना जरूरी है।
- सुरक्षा के उपाय: यदि आपका खेत ऐसे इलाके में है जहां जंगली जानवरों का खतरा बना रहता है, तो सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करें। जानवरों से बचाव के लिए खेत की उचित बाड़बंदी या अन्य रखरखाव के तरीके अपनाएं ताकि फसल को नुकसान न पहुंचे।
इन बुनियादी कृषि पद्धतियों को अपनाकर किसान मक्का की फसल से अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं। समय-समय पर फसल की निगरानी करते रहना भी सफलता की कुंजी है।
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