राजधानी भोपाल में एनआरआई से जुड़ी ठगी का एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। अमेरिका में बीते 30 वर्षों से रह रहे डॉ. नरेश शर्मा ने आरोप लगाया है कि उनके भांजे निशिथ त्रिपाठी और उसकी दोस्त प्रगति श्रीवास्तव ने मिलकर उनसे 1.87 करोड़ रुपये की ठगी कर ली। आरोप है कि प्रगति ने डॉ. शर्मा को 'पापा' कहकर एक भावनात्मक रिश्ता गढ़ा और धीरे-धीरे उनका भरोसा जीतते हुए संपत्ति, गाड़ी और निवेश के नाम पर एक-एक कर रकम हड़प ली।
जब मामले की हकीकत जानने के लिए डॉ. शर्मा भारत पहुंचे, तब यह पूरा खेल खुलकर सामने आ गया। फिलहाल कोलार रोड पुलिस ने प्रगति श्रीवास्तव और निशिथ त्रिपाठी के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। इस घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
2018 में हुई पहली मुलाकात से शुरू हुआ सिलसिला
डॉ. नरेश शर्मा के मुताबिक, वर्ष 2018 में वे अपनी दिवंगत पत्नी के श्राद्ध कर्म और संपत्ति की देखरेख के सिलसिले में भोपाल आए थे। यहां उन्होंने अपने भांजे निशिथ त्रिपाठी पर भरोसा करते हुए उसकी दोस्त प्रगति श्रीवास्तव से पहली बार मुलाकात की। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार प्रगति ने खुद को उनकी बेटी बताकर विश्वास जमाया और इसके बाद एक-एक कर जाल बिछाना शुरू कर दिया।
आरोप है कि इस दौरान कोलार रोड पर स्थित एक विला की 88.45 लाख रुपये की संपत्ति, टोयोटा हाईलैंडर गाड़ी और दूसरी संपत्तियों में हेराफेरी की गई। इतना ही नहीं, प्रगति ने राजनीतिक पहुंच का लालच देकर 2 करोड़ रुपये और मांगे। जब डॉ. शर्मा ने पीछे हटना चाहा तो उन्हें बलात्कार के झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी गई। वीडियो के अनुसार आखिरकार वकील आकाश शुक्ला के हस्तक्षेप से सच्चाई उजागर हुई।
पहले बनी 'बेटी', फिर भरोसा जीतकर मांगने लगी रकम
प्रगति श्रीवास्तव ने भावनात्मक रिश्ता कायम कर डॉ. नरेश शर्मा का पूरा विश्वास हासिल कर लिया। आरोप है कि सिंगापुर विला खरीदने के नाम पर उसने 88.45 लाख रुपये लिए, लेकिन रजिस्ट्री में अपना नाम चढ़ा लिया। मासिक किराए के रूप में सिर्फ 5000 रुपये देकर वह डॉ. शर्मा को भ्रम में रखती रही।
जनवरी 2023 में डॉ. शर्मा ने अपनी बीमार बहन के लिए 18 लाख रुपये की टोयोटा हाईलैंडर खरीदी थी, मगर प्रगति ने आरटीओ के दस्तावेजों में हेरफेर कर गाड़ी अपने नाम करा ली। आरोपों के मुताबिक निशिथ त्रिपाठी ने भी आरेरा कॉलोनी की संपत्ति में 50% हिस्सेदारी अपने नाम कर ली। कोविड काल में जब डॉ. शर्मा भारत नहीं आ सके, तब इसी स्थिति का फायदा उठाया गया।
मेडिकल यूनिवर्सिटी के नाम पर दिया झांसा
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के अनुसार प्रगति ने हाई-प्रोफाइल कनेक्शन होने का दावा करते हुए डॉ. शर्मा से 2 करोड़ रुपये और मांगे। मेडिकल यूनिवर्सिटी फंड के नाम पर रकम मांगने के बाद जब डॉ. शर्मा ने इनकार किया तो उन्हें बलात्कार के झूठे केस में फंसाने की धमकी दी गई।
बैंक ट्रांजेक्शन को बताया जा रहा अहम सबूत
इन आरोपों के आधार पर कोलार रोड पुलिस अब बैंक ट्रांजेक्शन, रजिस्ट्री और डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है। दोनों आरोपियों पर धोखाधड़ी और साजिश की धाराएं लगाई गई हैं। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही मामले का पूरा खुलासा संभव हो सकेगा।
बैंक ट्रांजेक्शन को इस मामले में सबसे अहम सबूत माना जा रहा है। पुलिस के मुताबिक, अगर आरोपियों ने संपत्ति अपने नाम कराई है तो उनसे रकम के स्रोत को लेकर पूछताछ की जाएगी, ताकि धन के असली स्रोत की सच्चाई सामने आ सके।
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