देश के करोड़ों प्रतियोगी छात्रों के बीच खान सर का नाम किसी पहचान का मोहताज नहीं है। बेहद कम फीस, ठेठ देसी अंदाज और कठिन से कठिन विषय को आसान भाषा में समझा देने की उनकी शैली ने उन्हें देश के सबसे लोकप्रिय शिक्षकों की कतार में खड़ा कर दिया। लेकिन उनकी छवि सिर्फ एक कामयाब शिक्षक की नहीं रही; जितनी लोकप्रियता उन्हें मिली, उतने ही विवाद भी लगातार उनसे जुड़ते चले गए। अब पटना के कोचिंग जगत में बढ़ती होड़ और उससे उपजे हिंसक टकराव ने उन्हें दोबारा सुर्खियों में ला दिया है।
रौशन आनंद प्रकरण से फिर चर्चा में आए खान सर
इस बार मामला किसी वायरल बयान या पुराने वीडियो का नहीं, बल्कि बिहार की कोचिंग इंडस्ट्री में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और उससे जुड़ी हिंसा का है। बीते 2 और 3 जून को पटना स्थित खान ग्लोबल स्टडीज के बाहर मारपीट, तोड़फोड़ और एक सुरक्षाकर्मी पर हमले की घटना सामने आई। पटना पुलिस ने इस मामले में कोचिंग संचालक रौशन आनंद समेत कई लोगों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया। पुलिस के मुताबिक, घटना में पोस्टर फाड़ने, पत्थरबाजी और सुरक्षा गार्ड पर हमला करने के आरोप शामिल हैं।
हालांकि मामला यहीं नहीं थमा। बाद में सामने आए कुछ वीडियो और जांच के आधार पर पुलिस ने खान सर यानी फैसल खान के खिलाफ भी नया मुकदमा दर्ज किया। जांच में उनके संस्थान के सुरक्षाकर्मियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। फिलहाल उन्हें गिरफ्तार करने या खुद उनके अदालत में सरेंडर करने को लेकर अटकलों का दौर जारी है। यह प्रकरण केवल पटना की कोचिंग इंडस्ट्री को ही नहीं, बल्कि खान सर से जुड़े पुराने अनेक विवादों को भी फिर से चर्चा के केंद्र में ले आया है।
सोशल मीडिया पर लौटे पुराने विवाद
रौशन आनंद विवाद के बाद सोशल मीडिया पर खान सर के पुराने विवाद भी दोबारा वायरल होने लगे हैं। इनमें उनके नाम और पहचान को लेकर उठे सवाल, आरआरबी-एनटीपीसी आंदोलन के दौरान दर्ज एफआईआर, ‘सुरेश और अब्दुल’ वाले उदाहरण पर हुआ बवाल और कई सामाजिक-राजनीतिक टिप्पणियां शामिल हैं।
नाम और पहचान पर खड़ा हुआ विवाद
खान सर से जुड़े शुरुआती बड़े विवादों में एक उनके नाम और पहचान को लेकर था। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने के बाद उनके असली नाम को लेकर बहस छिड़ गई। आगे चलकर विभिन्न मीडिया रिपोर्टों और सार्वजनिक दस्तावेजों में उनका नाम फैसल खान बताया गया। इसके बाद कुछ लोगों ने उन पर अपनी पहचान को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया, जबकि उनके समर्थकों का तर्क था कि पढ़ाई की गुणवत्ता को किसी के नाम या धर्म से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
आरआरबी-एनटीपीसी आंदोलन और पुलिस कार्रवाई
साल 2022 में रेलवे भर्ती बोर्ड की एनटीपीसी परीक्षा के नतीजों को लेकर बिहार समेत कई राज्यों में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए। इस दौरान कई जगह हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाएं भी सामने आईं। पटना पुलिस ने इस मामले में खान सर समेत कई कोचिंग संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। पुलिस का आरोप था कि कुछ शिक्षकों ने छात्रों को आंदोलन के लिए उकसाया। हालांकि खान सर और उनके समर्थकों ने इन आरोपों से इनकार किया और बाद में वे पुलिस जांच में शामिल भी हुए।
‘सुरेश और अब्दुल’ वीडियो पर मचा बवाल
दिसंबर 2022 में खान सर का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया। इस वीडियो में वे भाषा और व्याकरण का एक उदाहरण समझा रहे थे, जिसमें ‘सुरेश’ और ‘अब्दुल’ नामों का इस्तेमाल किया गया था। आलोचकों ने इसे मुस्लिम समुदाय के प्रति पूर्वाग्रह को बढ़ावा देने वाला करार दिया और कई राजनीतिक नेताओं ने उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग कर डाली। दूसरी ओर उनके समर्थकों का कहना था कि वीडियो का सिर्फ एक हिस्सा वायरल किया गया, जबकि उसका पूरा संदर्भ अलग था। यह विवाद कई दिनों तक राष्ट्रीय बहस का मुद्दा बना रहा।
पढ़ाने के अंदाज पर भी उठते रहे सवाल
खान सर की सबसे बड़ी ताकत उनकी हास्यपूर्ण और सहज शिक्षण शैली मानी जाती है। मगर यही शैली कई बार विवाद की वजह भी बनी। आलोचकों का कहना है कि गंभीर विषयों को रोचक बनाने की कोशिश में वे कभी-कभी ऐसे उदाहरण दे बैठते हैं, जिन्हें कुछ लोग आपत्तिजनक या असंवेदनशील मानते हैं। उनके कई पुराने क्लिप समय-समय पर सोशल मीडिया पर वायरल होते रहे हैं और बहस का विषय बनते रहे हैं।
तथ्यों की सटीकता पर आलोचना
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले कुछ शिक्षकों और अभ्यर्थियों ने भी समय-समय पर उनके कुछ शैक्षणिक उदाहरणों और तथ्यों पर सवाल उठाए हैं। आलोचकों की दलील है कि जटिल विषयों को बहुत ज्यादा सरल बनाने की कोशिश में कभी-कभी तथ्यात्मक चूक हो सकती है। इसके बावजूद लाखों छात्र उनकी कक्षाओं को बेहद उपयोगी मानते हैं और उनके ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की लोकप्रियता लगातार बढ़ती रही है। इन तमाम मामलों में कई बार आलोचना हुई, विरोध प्रदर्शन हुए और सोशल मीडिया पर अभियान भी चले।
विवादों के बावजूद बरकरार रही लोकप्रियता
आरआरबी-एनटीपीसी मामले में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी, लेकिन किसी अदालत द्वारा उन्हें उस मामले में दोषी ठहराए जाने की जानकारी नहीं है। इसी तरह ‘सुरेश-अब्दुल’ विवाद में भी व्यापक आलोचना हुई, मगर बात आरोपों और प्रतिक्रियाओं तक ही सीमित रही। इन विवादों के बावजूद उनकी लोकप्रियता में कोई बड़ी गिरावट नहीं आई और लाखों छात्र आज भी उन्हें अपनी तैयारी का अहम हिस्सा मानते हैं।
कोचिंग उद्योग के लिए बड़ा संकेत
अब जब खान सर एक नए विवाद में घिर चुके हैं, तो साफ दिख रहा है कि रौशन आनंद और खान सर से जुड़ा यह मामला सिर्फ दो शिक्षकों का झगड़ा नहीं माना जा रहा। यह बिहार के तेजी से फलते-फूलते कोचिंग उद्योग में बढ़ती प्रतिस्पर्धा, ब्रांड निर्माण, सोशल मीडिया के प्रभाव और छात्र राजनीति के उलझे रिश्तों को भी सामने ला रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब शिक्षण संस्थान बड़े जनसमूह और आर्थिक गतिविधि से जुड़ जाते हैं, तो प्रतिस्पर्धा कई बार टकराव का रूप ले लेती है।
अब शिक्षक सिर्फ शिक्षक नहीं रहे
खान सर का सफर आज भी विरोधाभासों से भरा नजर आता है। एक ओर वे लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा और सफलता का प्रतीक हैं, तो दूसरी ओर उनके इर्द-गिर्द विवादों का सिलसिला थमता नहीं दिखता। रौशन आनंद प्रकरण ने इस बहस को और तेज कर दिया है कि क्या भारत के स्टार शिक्षकों को अब केवल शिक्षक नहीं, बल्कि एक व्यावसायिक प्रतिद्वंद्वी के रूप में भी परखा जाएगा। फिलहाल सभी पक्षों पर लगे आरोप जांच के दायरे में हैं और अंतिम नतीजा न्यायिक एवं पुलिस प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
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