हिसार कांग्रेस को बड़ा झटका, शहरी जिलाध्यक्ष बजरंग दास गर्ग ने छोड़ा पद

हरियाणा के हिसार में कांग्रेस पार्टी को एक बड़ा सियासी झटका लगा है। शहरी जिलाध्यक्ष बजरंग दास गर्ग ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, जिसके बाद से राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

इस्तीफे की आधिकारिक वजह और अटकलें

हरियाणा की राजनीति में हिसार कांग्रेस के लिए एक चुनौतीपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। पार्टी के शहरी जिलाध्यक्ष बजरंग दास गर्ग ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। गर्ग ने अपना औपचारिक इस्तीफा प्रदेश कांग्रेस प्रभारी संजय दत्त को सौंपा है। अपने पत्र में उन्होंने इसके पीछे निजी कारणों का हवाला दिया है। उनका कहना है कि वे सामाजिक कार्यों में काफी व्यस्त रहते हैं, जिसके कारण वे पार्टी के संगठनात्मक कार्यों के लिए पर्याप्त समय नहीं निकाल पा रहे हैं।

हालांकि, पार्टी के भीतर चल रही चर्चाएं कुछ और ही संकेत दे रही हैं। सूत्रों की मानें तो यह इस्तीफा केवल निजी कारणों से नहीं है, बल्कि संगठन के कामकाज और व्यवस्था को लेकर उनकी नाराजगी भी इसकी एक बड़ी वजह रही है। कहा जा रहा है कि जब से उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी, तब से ही वे पार्टी के भीतर कुछ मुद्दों पर असहज महसूस कर रहे थे और पहले भी पद छोड़ने की इच्छा जाहिर कर चुके थे। हालांकि, उस समय उनके इस्तीफे को स्वीकार नहीं किया गया था। फिलहाल, बजरंग दास गर्ग की तरफ से इस विषय पर कोई सार्वजनिक बयान नहीं आया है।

दुष्यंत चौटाला से मुलाकात और बढ़ती चर्चाएं

इस इस्तीफे की खबर ने हिसार की सियासत को गरमा दिया है क्योंकि पद छोड़ने से ठीक एक दिन पहले बजरंग दास गर्ग की मुलाकात पूर्व डिप्टी मुख्यमंत्री और जननायक जनता पार्टी के नेता दुष्यंत चौटाला से हुई थी। इस भेंट के बाद से ही राजनीतिक पंडितों और कार्यकर्ताओं के बीच कयासों का दौर शुरू हो गया है कि भविष्य में गर्ग का अगला कदम क्या होगा।

पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया

इस घटनाक्रम पर कांग्रेस के ग्रामीण जिलाध्यक्ष बृजलाल बहबलपुरिया ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि उन्हें इस इस्तीफे के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरे मामले पर अंतिम निर्णय पार्टी का हाईकमान ही लेगा। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि पार्टी नेतृत्व को गर्ग से संवाद करना चाहिए और उनके इस्तीफे को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।

संगठन के लिहाज से महत्व

गौरतलब है कि हरियाणा कांग्रेस में लंबे समय तक जिला स्तर पर संगठन का अभाव रहा था। लगभग 11 साल के इंतजार और राहुल गांधी के व्यक्तिगत हस्तक्षेप के बाद ही अगस्त 2025 में जिला अध्यक्षों की सूची जारी की गई थी। ऐसे में शहरी जिलाध्यक्ष के पद से गर्ग का इस्तीफा कांग्रेस के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।

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