रायपुर में सूदखोरी का काला जाल, 7 साल से कर्ज चुकाने के बाद भी नहीं मिली राहत, महिला ने उठाया आत्मघाती कदम

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में अवैध सूदखोरों की प्रताड़ना और तांत्रिक के नाम पर ठगी से परेशान होकर एक महिला ने जहर खाकर अपनी जान देने की कोशिश की।

रायपुर में कर्ज के जाल ने ली एक और जिंदगी की परीक्षा

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां आर्थिक तंगी और ब्याज माफियाओं के अत्याचार से तंग आकर 35 वर्षीय रजिया बेगम ने जहर खाकर खुदकुशी का प्रयास किया। मौदहापारा निवासी अब्दुल फरीद, जो पेशे से एक गाड़ी मैकेनिक हैं, उनकी पत्नी रजिया बेगम के साथ घटी इस घटना ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। रविवार सुबह करीब 11 बजे रजिया बेगम ने यह घातक कदम उठाया, जिसके बाद उन्हें अचेत हालत में आनन-फानन में अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनकी स्थिति फिलहाल अत्यंत गंभीर और नाजुक बनी हुई है।

सुसाइड नोट से खुला प्रताड़ना का काला चिट्ठा

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच पड़ताल शुरू की। जांच के दौरान पुलिस को कमरे से दो पन्नों का एक सुसाइड नोट प्राप्त हुआ है। इस पत्र में रजिया बेगम ने अपनी व्यथा का विस्तार से वर्णन किया है। उन्होंने साफ तौर पर सूदखोरों द्वारा दी जा रही शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का जिक्र किया है। नोट में बताया गया है कि किस तरह अवैध रूप से पैसों की वसूली के लिए उन्हें लगातार डराया-धमकाया जा रहा था। पुलिस ने इस सुसाइड नोट को साक्ष्य के तौर पर कब्जे में ले लिया है और इसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

धमकी भरे फोन कॉल और मानसिक तनाव

प्रारंभिक जांच में यह बात स्पष्ट हुई है कि घटना के दिन रविवार सुबह महिला को आमीन नाम के एक व्यक्ति का फोन आया था। आमीन ने रजिया बेगम से तत्काल 25 हजार रुपये ब्याज की मांग की। उसने महिला को धमकी दी कि यदि समय पर रकम नहीं दी गई, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। लगातार मिल रही धमकियों और ब्याज के बोझ के कारण रजिया बेगम मानसिक रूप से पूरी तरह टूट गई थीं। इसी तनाव में उन्होंने घर का दरवाजा अंदर से बंद किया और जहर का सेवन कर लिया।

सूदखोरों का संगठित सिंडिकेट और अंधविश्वास का सहारा

मामले की गहराई से जांच करने पर पता चला है कि मौदहापारा और आसपास के इलाकों में अवैध सूदखोरी का एक बड़ा गिरोह सक्रिय है। इस नेटवर्क में 5 से 6 महिलाएं शामिल हैं जो संगठित होकर बिना किसी लाइसेंस के जरूरतमंद परिवारों को जाल में फंसाती हैं। ये महिलाएं 10 से 15 प्रतिशत की अत्यधिक भारी ब्याज दर पर कर्ज देती हैं। रजिया बेगम पिछले 7 वर्षों से इस गिरोह को किस्तों में पैसे चुका रही थीं, लेकिन ब्याज के कुचक्र के कारण मूलधन और ब्याज कम होने के बजाय बढ़ता ही जा रहा था। इस सिंडिकेट में तीन दबंग युवक भी शामिल हैं, जिनका मुख्य काम लोगों के घर जाकर डराना-धमकाना है।

तंत्र-मंत्र और झाड़-फूंक के नाम पर लाखों की ठगी

इस पूरे मामले का एक और भयावह पहलू तांत्रिक विद्या के नाम पर की गई धोखाधड़ी है। आर्थिक संकट में फंसी महिलाओं को यह गिरोह अपने परिचित एक पीर बाबा के पास भेज देता था। उन्हें यह विश्वास दिलाया जाता था कि पीर बाबा की झाड़-फूंक से घर की सारी आर्थिक परेशानियां खत्म हो जाएंगी। रजिया बेगम भी इस अंधविश्वास का शिकार बनीं। उन्होंने अपने घर की मुसीबतों को दूर करने के लिए इन लोगों के कहने पर 7 तोले सोने के कीमती जेवर और 3 लाख रुपये नकद उस बाबा को सौंप दिए थे। तांत्रिक क्रिया के बाद सामान वापस करने का झूठा वादा किया गया था, लेकिन जब रजिया ने अपने सामान की मांग की, तो उन्हें उल्टा धमकियां दी जाने लगीं। रायपुर पुलिस अब अवैध सूदखोरी और अंधविश्वास के नाम पर की गई इस लाखों की ठगी की गहनता से तफ्तीश कर रही है।

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