जनगणना 2027: सरकार करेगी जातीय गणना की शुरुआत, लद्दाख से होगा ऐतिहासिक बदलाव का आगाज

आगामी जनगणना प्रक्रिया में सरकार ने बड़ा बदलाव करते हुए जातिगत आंकड़ों को शामिल करने का निर्णय लिया है। इसकी शुरुआत लद्दाख और कुछ बर्फीले इलाकों से 17 अगस्त से होगी, जहाँ पहली बार ओपन-कॉलम पद्धति के जरिए जाति से जुड़े सवाल पूछे जाएंगे।

जनगणना में ऐतिहासिक बदलाव की तैयारी

भारत की जनगणना की प्रक्रिया अब एक ऐसे नए युग में प्रवेश कर रही है, जो सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखती है। स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार जातिगत आंकड़ों को जनगणना का हिस्सा बनाने की तैयारी जोर-शोर से चल रही है। इस प्रक्रिया का सबसे अहम केंद्र लद्दाख को बनाया गया है। बर्फीले और भौगोलिक रूप से कठिन इन क्षेत्रों में जनगणना का दूसरा चरण यानी जनसंख्या गणना 17 अगस्त से शुरू होने जा रहा है। इस चरण में आबादी से जुड़ी विस्तृत जानकारी जुटाई जाएगी, जिसमें सामाजिक और आर्थिक स्थिति के करीब 40 मानकों को शामिल किया गया है।

ओपन-कॉलम पद्धति का प्रयोग

इस बार की जनगणना की सबसे बड़ी विशेषता जाति से संबंधित जानकारी दर्ज करने का तरीका है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इसके लिए एक अलग खुला कॉलम यानी ओपन-कॉलम दिया जाएगा। इस पद्धति का परीक्षण पहले ही 16 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 1 से 20 जुलाई के बीच किया जा चुका है, जहां प्री-टेस्ट के दौरान लोगों से उनकी जाति पूछी गई थी। जनगणना करने वाले अधिकारी या खुद जवाब देने वाले व्यक्ति इस कॉलम में जाति का नाम लिखेंगे। सरकार की मंशा इस बार जातिगत आंकड़ों को पूरी पारदर्शिता के साथ दर्ज करने की है, ताकि भविष्य में आरक्षण और कल्याणकारी योजनाओं के निर्माण में इनका सटीक उपयोग हो सके।

लद्दाख और सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा की प्राथमिकता

यद्यपि 2027 की यह जनगणना भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना है, लेकिन लद्दाख जैसे सामरिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों के लिए विशेष छूट दी गई है। चूंकि यह क्षेत्र चीन और पाकिस्तान की सीमाओं के निकट स्थित है, इसलिए यहां स्थित महत्वपूर्ण रक्षा ठिकानों और बुनियादी ढांचों की लोकेशन को सुरक्षा कारणों से डिजिटल ऐप पर जियो-टैग करना संभव नहीं है। इस सुरक्षा जोखिम को देखते हुए, लद्दाख के लिए बड़ी संख्या में पेपर शेड्यूल छापे गए हैं ताकि जानकारी सुरक्षित रहे। डिजिटल मोड में जनगणना करने वालों के लिए मोबाइल ऐप पर जियो-लोकेट करना अनिवार्य है, लेकिन सीमावर्ती इलाकों के मामले में अधिकारियों को पेपर फॉर्म का उपयोग करने के लिए अधिकृत किया गया है।

प्रशिक्षण और फील्ड तैयारियों का दौर

लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के सेंसस ऑपरेशन डायरेक्टरेट ने जनगणना 2027 के लिए तीन दिवसीय मास्टर ट्रेनर्स ट्रेनिंग प्रोग्राम को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। मुख्य प्रिंसिपल सेंसस ऑफिसर अमित शर्मा के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में जनगणना की बारीकियों, जातिगत डेटा संग्रह, डिजिटल टूल्स, सेल्फ-एन्यूमरेशन और इंटरव्यू लेने की तकनीकों पर गहन प्रशिक्षण दिया गया है। लद्दाख उन क्षेत्रों में शामिल है जहां जुलाई में प्री-टेस्ट नहीं हुआ था, इसलिए मास्टर ट्रेनर्स को करीब 40 संभावित सवालों के आधार पर प्रशिक्षित किया गया है। अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि एन्यूमरेटर्स को जाति दर्ज करते समय पूरी सतर्कता बरतनी होगी और लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल यानी LAC के निकट के निर्माणों को विशेष चार्ज के रूप में चिह्नित करना होगा।

जातीय डेटा और पुरानी चुनौतियों का सबक

वर्ष 2011 की सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना यानी SECC के दौरान ओपन-कॉलम पद्धति के इस्तेमाल से 46 लाख से अधिक अलग-अलग जातियों के नाम सामने आए थे, जिसे लेकर काफी विवाद भी हुआ था। सरकार का यह मानना रहा है कि उस समय डेटा संग्रह में हुई गलतियों के कारण वह रिपोर्ट भरोसेमंद नहीं थी। 1931 की जनगणना में जातियों की संख्या 4,147 दर्ज की गई थी, जबकि 2011 में यह आंकड़ा बेतहाशा बढ़ गया था। चूंकी SECC जनगणना अधिनियम 1948 के दायरे से बाहर था और इसका कोई स्पष्ट कानूनी आधार नहीं था, इसलिए उस डेटा को कभी सार्वजनिक नहीं किया गया। अब सरकार इन पुरानी कमियों को सुधारने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

महत्वपूर्ण समय-सारणी और आधिकारिक अधिसूचना

भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना कमिश्नर द्वारा जारी आधिकारिक गजट नोटिफिकेशन के अनुसार, 1 सितंबर 2026 से 30 सितंबर 2026 तक लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के दुर्गम और बर्फ से ढके क्षेत्रों में जनसंख्या गणना का कार्य संपन्न होगा। इसके बाद 1 अक्टूबर से 5 अक्टूबर 2026 तक रिविज़नल राउंड चलाया जाएगा। घर-घर जाकर होने वाली इस गणना से पहले, लोगों को 17 अगस्त से 31 अगस्त के बीच खुद से जानकारी दर्ज करने यानी सेल्फ-एन्यूमरेशन का विकल्प भी दिया जाएगा। देश के शेष हिस्सों में जनगणना की मुख्य प्रक्रिया फरवरी 2027 में शुरू करने की योजना बनाई गई है, लेकिन लद्दाख और अन्य पहाड़ी राज्यों के लिए यह प्रक्रिया मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण समय से पहले पूरी की जा रही है।

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