बिहार की अलका ने कैसे बदला अपना भाग्य: बर्तन बनाने के काम से सालाना 5 लाख की कमाई, 30 लोगों को दिया रोजगार

शिवहर जिले की निवासी अलका कुमारी ने जीविका समूह की मदद से बर्तन निर्माण का सफल व्यवसाय खड़ा किया है, जिससे वह आज आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन चुकी हैं।

शिवहर की सफलता की कहानी

बिहार के ग्रामीण अंचलों में आज महिला सशक्तिकरण की नई मिसालें देखने को मिल रही हैं। इसी कड़ी में शिवहर जिले की रहने वाली अलका कुमारी ने अपने दृढ़ निश्चय और कड़ी मेहनत के दम पर यह साबित कर दिखाया है कि अगर सही दिशा में प्रयास किए जाएं, तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती। जीविका यानी बिहार ग्रामीण जीविका प्रोत्साहन समिति के सहयोग से अलका ने न केवल खुद को आर्थिक रूप से खड़ा किया है, बल्कि वह क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए एक आदर्श भी बन गई हैं।

शुरुआत की छोटी इकाई से

अलका कुमारी के उद्यमी बनने का सफर तब शुरू हुआ जब उन्होंने जीविका समूह की गतिविधियों और अन्य महिलाओं को स्वरोजगार के जरिए आगे बढ़ते देखा। उन्हें लगा कि वह भी अपने घर और परिवार के लिए कुछ कर सकती हैं। उन्होंने जीविका से आर्थिक ऋण लिया और अपने पति के साथ मिलकर बर्तन बनाने का लघु व्यवसाय शुरू करने का निर्णय लिया। उनकी इस व्यावसायिक यात्रा की शुरुआत मात्र 2 मशीनों के साथ हुई थी।

निरंतर विस्तार और सफलता

किसी भी व्यवसाय को बढ़ाने के लिए निरंतरता बहुत जरूरी होती है। अलका ने न केवल अपने काम पर ध्यान दिया, बल्कि समय के साथ बाजार की मांग को समझते हुए अपनी उत्पादन क्षमता का विस्तार भी किया। उनकी ईमानदारी और मेहनत का ही फल है कि आज उनकी निर्माण इकाई में मशीनों की संख्या 2 से बढ़कर 7 हो गई है। मशीनों के बढ़ने का सीधा असर उनके उत्पादन पर पड़ा है और व्यापार ने सफलता की नई ऊंचाईयां छुई हैं।

कमाई और सामाजिक योगदान

इस व्यवसाय ने अलका के जीवन की तस्वीर पूरी तरह से बदल दी है। वह अब बर्तन बनाने के अपने इस काम से सालाना लगभग 5 लाख रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। यह कमाई उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए पर्याप्त रही है। हालांकि, अलका की सफलता का सबसे सुखद पहलू यह है कि उन्होंने अपने उद्यम के माध्यम से 30 स्थानीय लोगों को रोजगार दिया है। उनके कारखाने में काम करने वाले इन लोगों के परिवारों का भरण पोषण भी अब इसी व्यवसाय पर निर्भर है, जो एक बड़ी सामाजिक उपलब्धि है।

परिवार और भविष्य की योजनाएं

व्यवसाय में मिली सफलता के कारण अलका अपने पारिवारिक दायित्वों को भी बखूबी निभा रही हैं। उन्होंने अपनी बेटी का विवाह धूमधाम से संपन्न कराया है। इतना ही नहीं, वह अपने बेटे के सुनहरे भविष्य के लिए भी पूरी तरह समर्पित हैं और उनका बेटा वर्तमान में नीट (NEET) जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा है।

अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा

अलका कुमारी अपनी इस सफलता का पूरा श्रेय जीविका समूह के सहयोग और अपने पति के निरंतर समर्थन को देती हैं। उनका मानना है कि महिलाओं को घर की दहलीज से बाहर निकलकर अपनी छिपी हुई प्रतिभा को पहचानने की आवश्यकता है। वह अन्य महिलाओं को संदेश देती हैं कि उन्हें छोटी-छोटी शुरुआत करने से नहीं डरना चाहिए। स्वावलंबन ही वह कुंजी है जो महिलाओं को समाज में सम्मान और नई पहचान दिला सकती है। अलका की यह कहानी दर्शाती है कि सरकारी योजनाओं का सही लाभ और इच्छाशक्ति अगर साथ मिल जाए, तो ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

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