सतना जिला अस्पताल की मर्चुरी में स्कूली छात्राओं की मौजूदगी पर बवाल, डॉक्टर को थमाया नोटिस

मध्य प्रदेश के सतना जिला अस्पताल के पोस्टमार्टम कक्ष में दो स्कूली छात्राओं के करीब पौने दो घंटे तक मौजूद रहने का मामला सामने आया है। अस्पताल प्रबंधन ने इसे गंभीरता से लेते हुए ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर से जवाब मांगा है।

मर्चुरी में छात्राओं का प्रवेश बना चर्चा का विषय

मध्य प्रदेश के सतना जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां जिला अस्पताल की मर्चुरी में पोस्टमार्टम जैसी संवेदनशील प्रक्रिया के दौरान दो स्कूली छात्राओं को देखा गया। स्कूल की यूनिफॉर्म पहने इन छात्राओं की मौजूदगी ने न केवल अस्पताल के सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि चिकित्सा जगत में भी इसे एक बड़ी लापरवाही के तौर पर देखा जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने तुरंत संज्ञान लिया और ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण तलब किया है।

क्या है पूरा घटनाक्रम

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना शुक्रवार की है। उस दिन दोपहर के करीब 1:45 बजे धरमपुर थाना क्षेत्र के नरदहा निवासी दुर्गेश, जो कि बेटू सिंह के पुत्र हैं, के कंकाल का मेडिकल परीक्षण किया जाना था। इस प्रक्रिया के लिए मेडिकल कॉलेज के डॉ. प्रतीक शुक्ला के नेतृत्व में एक विशेष चिकित्सकीय टीम का गठन किया गया था। पोस्टमार्टम कक्ष के अंदर जब यह कानूनी और चिकित्सा संबंधी प्रक्रिया चल रही थी, तभी वहां स्कूल की पोशाक में दो छात्राएं मौजूद थीं।

पोस्टमार्टम कक्ष में लंबी मौजूदगी

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, ये छात्राएं वहां काफी देर तक रुकी रहीं। आधिकारिक दस्तावेजों और समय के हिसाब से, यह पूरी मेडिकल परीक्षण की प्रक्रिया दोपहर 1:45 बजे शुरू होकर दोपहर 3:35 बजे तक जारी रही। इस प्रकार, ये छात्राएं लगभग पौने दो घंटे तक पोस्टमार्टम कक्ष के भीतर मौजूद थीं। एक संवेदनशील स्थान पर, जहां कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच चल रही हो, वहां बाहरी व्यक्तियों, विशेषकर स्कूली छात्राओं का इस तरह लंबे समय तक मौजूद रहना व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।

अस्पताल प्रबंधन ने शुरू की जांच

इस घटना की सूचना मिलने के बाद अस्पताल प्रबंधन में हड़कंप मच गया। अस्पताल अधीक्षक डॉ. अमर सिंह ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि पोस्टमार्टम एक अत्यंत निजी और संवेदनशील कानूनी प्रक्रिया है, जिसमें अनधिकृत व्यक्तियों का प्रवेश पूरी तरह वर्जित होता है। अस्पताल प्रशासन ने ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और उनसे जवाब मांगा है कि इन छात्राओं को किस परिस्थिति में और किसकी अनुमति से मर्चुरी के अंदर प्रवेश दिया गया। क्या इन छात्राओं को वहां किसी शैक्षिक उद्देश्य से बुलाया गया था या यह केवल एक प्रशासनिक चूक थी, यह जांच के बाद ही पता चल सकेगा।

जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया

फिलहाल यह जांच का विषय है कि क्या अस्पताल के निर्धारित नियमों का उल्लंघन किया गया है। अस्पताल प्रबंधन इस पूरे प्रकरण की तह तक जाने की कोशिश कर रहा है। जांच में मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा:

  • छात्राएं मर्चुरी तक कैसे पहुंचीं और उन्हें वहां प्रवेश देने का अधिकार किसके पास था?
  • क्या इन छात्राओं को वहां मौजूद रहने की पूर्व अनुमति दी गई थी?
  • पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के दौरान इन छात्राओं का उद्देश्य क्या था?
  • क्या इस दौरान चिकित्सा नियमों और गोपनीयता के मानकों का पालन किया गया?

अस्पताल प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि संबंधित डॉक्टर से प्राप्त स्पष्टीकरण और मामले की पूर्ण जांच के आधार पर ही अगली कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। यदि जांच में कोई भी अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ उचित अनुशासनात्मक कदम उठाए जाएंगे।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

इस पूरी घटना ने सतना जिला अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है। पोस्टमार्टम कक्ष में आम तौर पर केवल पुलिस, डॉक्टर और मृतक के परिजन ही जा सकते हैं। ऐसी स्थिति में, स्कूली छात्राओं की वहां मौजूदगी ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ नैतिक जिम्मेदारियों को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और प्रबुद्ध नागरिकों ने भी इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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