भोपाल में गरमाया आवासीय बनाम व्यावसायिक विवाद
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में रिहायशी इलाकों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर विवाद अब काफी गंभीर हो चुका है। यह मामला अब केवल प्रशासनिक दफ्तरों तक सीमित न रहकर सीधे सड़कों पर आ गया है, जहां आमने-सामने रहवासी और व्यापारी संगठन खड़े हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेशों के बाद नगर निगम प्रशासन ने सक्रियता दिखाई है, जिसके तहत शहर भर के 30,000 से अधिक व्यापारियों को नोटिस थमाए गए हैं। इस कार्रवाई ने पूरे शहर में हड़कंप मचा दिया है।
व्यापारियों का 'छाता मार्च' और विरोध की गूंज
नगर निगम द्वारा जारी किए गए नोटिसों के विरोध में व्यापारी महासंघ ने सड़कों पर उतरकर अपना गुस्सा जाहिर किया। भारी बारिश के बावजूद व्यापारियों ने अपनी नाराजगी दर्ज कराने के लिए 'छाता मार्च' का आयोजन किया। इस प्रदर्शन के दौरान व्यापारी अपने हक की आवाज उठाते नजर आए। हैरानी की बात यह रही कि इस विरोध प्रदर्शन में देशभक्ति का जज्बा भी देखने को मिला, जहां एक हाथ में तिरंगा थामे हुए व्यापारी अपने व्यवसाय को बचाने की गुहार लगा रहे थे। उनके हाथों में विभिन्न तख्तियां थीं, जिनमें उनकी समस्याओं और सरकार से अपेक्षित समाधानों का उल्लेख किया गया था।
व्यापारियों की मांग: मास्टर प्लान और गुजरात मॉडल
व्यापारी संघ ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि प्रशासन को भोपाल के लिए तत्काल प्रभाव से नया मास्टर प्लान तैयार करना चाहिए। व्यापारियों का कहना है कि शहर की बदलती जरूरतों को देखते हुए यहाँ मिक्स लैंड यूज यानी मिश्रित भूमि उपयोग की नीति को लागू किया जाना अनिवार्य है। इसके साथ ही, व्यापारियों ने सरकार के समक्ष वर्ष 2022 के गुजरात मॉडल को भोपाल में भी अपनाने का प्रस्ताव रखा है। व्यापारियों का तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में जिस तरह से 30,000 से अधिक नोटिस भेजे गए हैं, उससे उनकी रोजी-रोटी पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
रहवासियों का 'टॉर्च लाइट मार्च' और नाराजगी
विवाद के दूसरे पक्ष यानी रहवासियों का गुस्सा भी कम नहीं है। रिहायशी कॉलोनियों में रहने वाले लोगों का आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। इस ढुलमुल रवैये से खफा होकर स्थानीय रहवासी संघों ने एकजुट होकर 'टॉर्च लाइट मार्च' निकाला। रहवासियों ने अपने हाथों में जलती हुई टॉर्च लेकर प्रशासन को आईना दिखाने का प्रयास किया और 'अवैध निर्माण हटाओ, आवासीय क्षेत्र बचाओ' जैसे नारे बुलंद किए।
अवैध निर्माण और अवमानना का खतरा
रहवासियों का साफ कहना है कि रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियां चलने से उनका दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम प्रशासन जानबूझकर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी कर रहा है और रिहायशी क्षेत्रों में अवैध रूप से व्यावसायिक धंधों को चलने की अनुमति दे रहा है। रहवासी संघ ने सख्त रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि नगर निगम ने शीघ्र ही इन व्यावसायिक गतिविधियों को पूरी तरह से बंद नहीं करवाया, तो वे चुप नहीं बैठेंगे। रहवासियों ने स्पष्ट किया है कि वे नगर निगम प्रशासन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर करने की पूरी तैयारी कर चुके हैं। इस खींचतान के कारण भोपाल में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं और अब सभी की निगाहें नगर निगम के अगले कदम पर टिकी हैं।
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