काराकाट की हार से सीधे MLC तक का सफर, टिकट मिलने पर पवन सिंह की पहली प्रतिक्रिया ने खींचा सबका ध्यान

भारतीय जनता पार्टी ने बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए भोजपुरी सुपरस्टार पवन सिंह को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। टिकट मिलते ही पवन सिंह ने सोशल मीडिया पर पार्टी का आभार जताते हुए अपनी पहली प्रतिक्रिया दी।

भोजपुरी सिनेमा के 'पावर स्टार' कहे जाने वाले लोकप्रिय गायक और अभिनेता पवन सिंह के राजनीतिक भविष्य को लेकर महीनों से चली आ रही अटकलों पर आखिरकार विराम लग गया है। भारतीय जनता पार्टी ने बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए जारी अपनी आधिकारिक सूची में पवन सिंह को उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतारा है। अलग-अलग चुनावों के दौरान लंबे समय से उन्हें बीजेपी का टिकट मिलने की चर्चाएं होती रही थीं, जो अब सच साबित हुई हैं। पार्टी का आधिकारिक टिकट मिलते ही पवन सिंह ने सोशल मीडिया के जरिए जो पहली प्रतिक्रिया दी, उसने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

पवन सिंह की पहली प्रतिक्रिया

उम्मीदवार घोषित किए जाने के तुरंत बाद पवन सिंह ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए पार्टी के प्रति आभार प्रकट किया। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के प्रति गहरी कृतज्ञता जताते हुए उन्होंने लिखा,

"भारतीय जनता पार्टी को मेरे ऊपर विश्वास जताने के लिए दिल से धन्यवाद एवं आभार।"

उनकी इस प्रतिक्रिया से साफ झलकता है कि वह पार्टी के फैसले से बेहद उत्साहित हैं और इस नई राजनीतिक जिम्मेदारी को निभाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उम्मीदवारों की सूची साझा करने वाले बीजेपी के पोस्ट को टैग करते हुए पवन सिंह ने पार्टी को धन्यवाद दिया।

राष्ट्रीय नेताओं ने दी बधाई

टिकट मिलने के बाद बीजेपी के कई बड़े नेताओं ने सोशल मीडिया पर पवन सिंह को बधाई और शुभकामनाएं दीं। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी और पूर्व उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा समेत कई नेताओं ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शाहनवाज हुसैन ने भी बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल राजनीतिक भविष्य की कामना की। इसके अलावा बीजेपी के तेजतर्रार नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने भी एमएलसी उम्मीदवार बनने पर पवन सिंह को विशेष बधाई दी। इन संदेशों से यह स्पष्ट हो गया कि पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व पवन सिंह को संगठन में एक अहम स्थान देने का मन बना चुका है।

राजनीतिक सफर का बड़ा मोड़

पवन सिंह को मिला यह टिकट उनके राजनीतिक करियर का एक बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है। साल 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने बिहार की काराकाट सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा था, लेकिन उस त्रिकोणीय मुकाबले में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर तरह-तरह के सवाल खड़े हो गए थे। हालांकि हार के बावजूद जमीन पर उनकी लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई।

युवाओं के बीच उनकी मजबूत पकड़ को भांपते हुए बीजेपी ने 2025 के विधानसभा चुनाव में भी उनका इस्तेमाल किया, जिसका फायदा एनडीए को मिला। नतीजतन पवन सिंह के मजबूत गढ़ माने जाने वाले शाहाबाद (भोजपुर-रोहतास क्षेत्र) में एनडीए ने शानदार प्रदर्शन किया। इसी लोकप्रियता को देखते हुए पार्टी ने उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें सीधे उच्च सदन यानी विधान परिषद भेजने का फैसला लिया है।

जातीय समीकरणों को साधने की रणनीति

राजनीति के जानकारों का मानना है कि पवन सिंह को टिकट देकर बीजेपी ने बिहार में एक साथ कई निशाने साधे हैं। पार्टी ने उनके जरिए न सिर्फ भोजपुरी भाषी इलाके में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की है, बल्कि राज्य के युवाओं और बड़े वोट बैंक को भी अपने साथ जोड़े रखने का दांव खेला है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सदन के भीतर पवन सिंह बीजेपी के लिए कितने असरदार साबित होते हैं।

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