वैश्विक स्तर पर समीकरण लगातार बदल रहे हैं और इस बदलते परिदृश्य में भारत का रसूख तथा असर तेजी से बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नई दिल्ली की पहचान आज पूरी दुनिया पर अपनी छाप छोड़ रही है। इसी बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दो दशक से भी पुरानी एक घटना की याद दिलाई है, जिससे पीएम मोदी की मजबूत वैश्विक छवि का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।
पुतिन ने क्या कहा
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की एक टिप्पणी इन दिनों खूब चर्चा में है। पुतिन ने उस दौर का स्मरण कराया जब अमेरिका ने नरेंद्र मोदी के अपने देश में प्रवेश पर रोक लगा दी थी, लेकिन आज वही मोदी दुनिया के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं और अमेरिका में उनकी एंट्री पर लगा प्रतिबंध भी हट चुका है।
पुतिन की इस बात को सिर्फ मोदी की राजनीतिक यात्रा की तारीफ भर नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे पश्चिमी देशों और खासकर अमेरिका को दिया गया एक कूटनीतिक संदेश भी माना जा रहा है। साथ ही उन्होंने एक ही टिप्पणी में पीएम मोदी के बढ़ते वैश्विक प्रभाव को भी रेखांकित कर दिया। रूसी राष्ट्रपति ने यह राय St Petersburg International Economic Forum (SPIEF) में हिस्सा लेते हुए व्यक्त की।
9 साल तक लागू रहा था प्रतिबंध
दरअसल, साल 2002 में गुजरात दंगों के बाद तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी अंतरराष्ट्रीय आलोचना के केंद्र में आ गए थे। इसके बाद 2005 में अमेरिका ने धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े अपने कानूनों के तहत मोदी को वीजा देने से इनकार कर दिया था। यह पहला मौका था जब किसी भारतीय राज्य के मुख्यमंत्री पर इस तरह की पाबंदी लगाई गई।
यह प्रतिबंध करीब 9 साल तक प्रभावी रहा। हालांकि, 2014 में नरेंद्र मोदी के भारत के प्रधानमंत्री बनने के बाद अमेरिका ने अपना रुख बदला और उन्हें आधिकारिक रूप से आमंत्रित किया। इसके बाद से भारत और अमेरिका के संबंध निरंतर मजबूत होते चले गए।
पश्चिम को अप्रत्यक्ष संदेश
यूक्रेन युद्ध के बाद से रूस और पश्चिमी देशों के बीच रिश्ते बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। अमेरिका तथा यूरोपीय देशों ने रूस पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए हैं, और ऐसे माहौल में पुतिन अक्सर पश्चिमी देशों की नीतियों पर सवाल उठाते रहते हैं।
मोदी के उदाहरण का जिक्र करते हुए पुतिन ने यह जताने की कोशिश की कि पश्चिमी देशों द्वारा किसी नेता को राजनीतिक रूप से अलग-थलग करने का प्रयास हमेशा कामयाब नहीं होता। उनका तर्क था कि जिन नेताओं को कभी पश्चिम ने अस्वीकार किया, वे ही आगे चलकर वैश्विक राजनीति में अहम भूमिका निभाने लगे।
मजबूत होते रक्षा संबंध
पुतिन के बयान का एक और पहलू भारत-रूस के लगातार प्रगाढ़ होते रक्षा संबंधों से जुड़ा है। हाल ही में रूस ने भारत को S-400 एयर डिफेंस सिस्टम का चौथा स्क्वाड्रन उपलब्ध कराया है। इसके अलावा पांचवीं पीढ़ी के Su-57 फाइटर जेट के लिए भी लॉबिंग की जा रही है। पुतिन ने कहा कि रूस भारत के अन्य देशों के साथ रिश्तों को सकारात्मक नजरिए से देखता है।
रूसी राष्ट्रपति ने भारत और रूस के संबंधों को भरोसे तथा भाईचारे पर आधारित बताते हुए कहा कि दोनों देशों की दोस्ती 1947 से चली आ रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत के दूसरे देशों के साथ बढ़ते संबंधों को मॉस्को चिंता की दृष्टि से नहीं देखता और नई दिल्ली को एक भरोसेमंद साझेदार मानता है।
हम सभी को वह समय याद है जब प्रधानमंत्री मोदी को अमेरिका की धरती पर आने से प्रतिबंधित किया गया था।
पुतिन ने आगे कहा कि अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। मोदी भारत के प्रधानमंत्री हैं, सभी प्रतिबंध समाप्त हो चुके हैं और भारत-अमेरिका संबंध भी सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहे हैं।
विश्लेषकों की राय
विश्लेषकों का मानना है कि पुतिन की इस टिप्पणी का सीधा निशाना अमेरिका और उसके सहयोगी देश हैं। रूस लंबे समय से यह आरोप लगाता रहा है कि पश्चिमी देश अपने राजनीतिक मानकों को दुनिया पर थोपने की कोशिश करते हैं और दूसरे देशों के नेताओं को लेकर एकतरफा फैसले लेते हैं।
पीएम मोदी का उदाहरण देकर पुतिन ने यह दिखाने का प्रयास किया कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अंतिम निर्णय जनता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया करती है, न कि किसी बाहरी शक्ति का प्रतिबंध। कुल मिलाकर यह टिप्पणी भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और उसकी संतुलित विदेश नीति की ओर इशारा करती है।
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