करियर का शानदार विकल्प बना एग्री बिजनेस मैनेजमेंट
आज के दौर में जब युवा बेहतर रोजगार की तलाश में संघर्ष कर रहे हैं, तब एग्री बिजनेस मैनेजमेंट जैसे आधुनिक क्षेत्र करियर के लिए एक बेहतरीन अवसर के रूप में सामने आए हैं। समस्तीपुर के पूसा स्थित प्रतिष्ठित डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने वाले साहिल महापात्र ने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प के दम पर यह साबित कर दिया है कि यदि सही दिशा में प्रयास किया जाए, तो सफलता निश्चित रूप से प्राप्त होती है। उड़ीसा के कटक जिले के रहने वाले साहिल ने इस संस्थान से एग्री बिजनेस मैनेजमेंट में एमबीए की डिग्री पूरी की है और अब वे एक सफल पेशेवर के रूप में अपनी यात्रा शुरू कर रहे हैं।
सफलता का सफर: पढ़ाई से प्लेसमेंट तक
हर युवा का सपना होता है कि वह अपनी उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद एक ऐसी नौकरी हासिल करे जो न केवल उसके कौशल को निखारे, बल्कि उसके भविष्य को भी सुरक्षित करे। साहिल महापात्र ने भी इसी सपने को साकार करने के लिए कटक से बिहार के समस्तीपुर का रुख किया था। उन्होंने विश्वविद्यालय के एमबीए कार्यक्रम में दाखिला लिया और दो वर्षों तक पूरी लगन के साथ अध्ययन किया। साहिल ने अपनी सफलता के सफर को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्होंने व्यावहारिक ज्ञान अर्जित करने पर भी जोर दिया। उनकी मेहनत का ही परिणाम है कि कैंपस प्लेसमेंट के दौरान उन्हें विस्तार संस्था द्वारा ब्रांच मैनेजर के पद पर चुना गया है, जहाँ उन्हें 6 लाख रुपये का वार्षिक वेतन पैकेज प्राप्त हुआ है। यह राशि लगभग 50 हजार रुपये प्रतिमाह के बराबर होती है, जो उनके करियर की शुरुआत के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
इंटर्नशिप से निखरा व्यावहारिक कौशल
साहिल महापात्र का मानना है कि केवल कक्षा में पढ़ाई करने से पूरा ज्ञान नहीं मिलता, बल्कि क्षेत्र में जाकर काम करने से ही असली समझ विकसित होती है। अपने दो वर्षीय पाठ्यक्रम के दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले और मध्य प्रदेश के उज्जैन में सफलतापूर्वक इंटर्नशिप पूरी की। इन दोनों राज्यों में काम करने के दौरान उन्हें एग्री बिजनेस के जमीनी स्तर को समझने का अवसर मिला। सोनभद्र और उज्जैन में प्राप्त इस इंटर्नशिप अनुभव ने उन्हें कैंपस इंटरव्यू के दौरान आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखने में मदद की। उन्हें जो व्यावहारिक अनुभव मिला, उसी के आधार पर वे अपनी चयन प्रक्रिया के विभिन्न चरणों को पार करने में सफल रहे और अंततः अपनी काबिलियत साबित की।
शिक्षकों का सहयोग और सीखने का माहौल
अपनी सफलता का श्रेय देते हुए साहिल बताते हैं कि पूसा कृषि विश्वविद्यालय का शैक्षणिक वातावरण अत्यंत प्रेरणादायक है। उड़ीसा से होने के कारण शुरुआती दौर में उन्हें स्थानीय भाषा और परिवेश के साथ सामंजस्य बिठाने में कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा था, लेकिन वहां के शिक्षकों और साथियों ने उन्हें बहुत सहयोग दिया। उन्हें कभी भी यह महसूस नहीं होने दिया गया कि वे किसी दूसरे राज्य से आए हैं। उनके शिक्षकों ने न केवल किताबी ज्ञान दिया बल्कि उनका मार्गदर्शन भी किया, जिससे उन्हें अपने करियर के लक्ष्यों को बेहतर ढंग से समझने में सहायता मिली।
परिवार के लिए गौरव का पल
साहिल महापात्र का परिवार उनकी इस कामयाबी से बेहद खुश है। उनके पिता नारायण महापात्र जो चिकित्सा क्षेत्र में फार्मासिस्ट के रूप में कार्यरत हैं और जल्द ही सेवानिवृत्त होने वाले हैं, अपने बेटे की उन्नति को देखकर गौरवान्वित हैं। उनकी माता एक गृहिणी हैं। एक सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाले साहिल के लिए कैंपस प्लेसमेंट के जरिए सीधे नौकरी पाना एक बड़ी उपलब्धि है। उनके परिवार को पूरी उम्मीद है कि साहिल आने वाले समय में अपने कार्यक्षेत्र में और भी ऊंचाइयां छुएंगे।
युवाओं के लिए प्रेरणा
साहिल की यह कहानी उन हजारों युवाओं के लिए एक बड़ा उदाहरण है जो अपनी पढ़ाई पूरी करने के साथ-साथ निजी क्षेत्र में बेहतर भविष्य की तलाश में हैं। यह कहानी स्पष्ट करती है कि कृषि क्षेत्र से जुड़े प्रबंधन की पढ़ाई में रोजगार की अपार संभावनाएं छिपी हैं। सरकारी नौकरियों के अलावा भी एग्री बिजनेस जैसे क्षेत्रों में प्रतिभावान युवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है। यदि छात्र पढ़ाई के दौरान इंटर्नशिप जैसे माध्यमों से व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करें, तो कैंपस के दौरान ही अच्छी नौकरी हासिल करना कोई कठिन काम नहीं है। साहिल महापात्र का अगला लक्ष्य एग्री बिजनेस के क्षेत्र में ही अनुभव प्राप्त करना और आगे बढ़कर इस उद्योग में नई पहचान बनाना है।
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