फरीदाबाद के प्याला रेलवे फाटक पर बन रहा रेलवे फ्लाईओवर लोगों के लिए राहत के बजाय मुसीबत बन गया है। करीब दो साल से यहां निर्माण कार्य जारी है, लेकिन अब तक यह पूरा नहीं हो सका है। फाटक बंद रहने की वजह से आसपास के कई गांवों के निवासियों को हर दिन भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
नौकरीपेशा लोग, किसान, छात्र और बुजुर्ग — सभी इस अधूरे निर्माण से तंग आ चुके हैं। कई लोग अपनी बाइक फाटक के एक तरफ खड़ी कर पैदल दूसरी ओर पहुंचते हैं और वहीं से अपने काम पर निकलते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि काम की रफ्तार बेहद सुस्त है और जल्द राहत मिलने के आसार भी नजर नहीं आ रहे।
धीमी रफ्तार से बढ़ती परेशानी
स्थानीय निवासी योगेंद्र बताते हैं कि वे रोज इसी रास्ते से नौकरी पर जाते हैं। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले योगेंद्र डीग गांव के पास एक कॉलोनी में रहते हैं। उनके मुताबिक आने-जाने में बहुत दिक्कत होती है और साइकिल निकालना तक मुश्किल हो जाता है। उन्हें नहीं लगता कि छह महीने में फ्लाईओवर तैयार हो पाएगा।
गायत्री भी रोजाना इसी मार्ग का इस्तेमाल करती हैं। उनका कहना है कि फाटक बंद होने से बहुत तकलीफ होती है। नौकरी करने वाले लोग अपनी बाइक फाटक के पास खड़ी कर निकल जाते हैं और दिनभर वह वहीं पड़ी रहती है। उन्हें भी नहीं लगता कि छह महीने में काम पूरा होगा।
बुजुर्गों की मजबूरी
बल्लभगढ़ के सागरपुर गांव के 80 वर्षीय धर्मवीर भी रोज इसी रास्ते से नौकरी पर जाते हैं। वे कहते हैं कि साइकिल निकालने में काफी परेशानी होती है, लेकिन मजबूरी है और कोई दूसरा रास्ता नहीं है। उनके अनुसार बीच में दो-तीन महीने तक काम भी बंद रहा था और इसे पूरा होने में अभी एक साल से ज्यादा वक्त लग सकता है।
फतेहपुर बिल्लौच के राजवीर सिंह बताते हैं कि उन्हें रोज कंपनी जाने के लिए मोटरसाइकिल फाटक के पास छोड़नी पड़ती है, जहां बिना किसी सुरक्षा के वह खड़ी रहती है। मजबूरी में उन्हें पैदल जाना पड़ता है। उनका कहना है कि दो साल से काम चल रहा है, फिर भी पूरा होता नजर नहीं आ रहा।
सीकरी में काम करने वाले प्रदीप और प्याला गांव के सोहेल भी इसी तरह की दिक्कतें बताते हैं। सोहेल का कहना है कि बारिश के दिनों में हालात और बिगड़ जाते हैं — कीचड़ और पानी के कारण निकलना मुश्किल हो जाता है। इस रास्ते से कई गांव जुड़े हैं, इसलिए हजारों लोग प्रभावित हो रहे हैं।
35 करोड़ की परियोजना, छह महीने का दावा
निर्माण कार्य की देखरेख कर रहे इंजीनियर अब्बास के अनुसार इस परियोजना पर करीब 50 लोग काम कर रहे हैं और फ्लाईओवर का निर्माण लगभग 35 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है। उनका कहना है कि काम पूरा होने में अभी करीब छह महीने और लगेंगे।
लोगों की मांग — तेज हो काम
हालांकि स्थानीय लोगों को इस दावे पर भरोसा नहीं है। उनका कहना है कि पिछले दो साल में जिस रफ्तार से काम हुआ है, उसे देखते हुए फ्लाईओवर के पूरा होने में अभी काफी समय लग सकता है। फिलहाल लोगों की मांग है कि निर्माण कार्य में तेजी लाई जाए, ताकि रोजाना की परेशानी से उन्हें जल्द राहत मिल सके।
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