हरिद्वार में स्थित नीलेश्वर महादेव का महत्व
हरिद्वार की पावन भूमि पर स्थित नीलेश्वर महादेव मंदिर का उल्लेख पौराणिक कथाओं में प्रमुखता से मिलता है। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर इस मंदिर का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह वही पवित्र स्थान है जहां समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को भगवान शिव ने ग्रहण किया था।
ससुराल और वीरभद्र का जन्म
इस मंदिर के स्थान की एक और खासियत यह है कि यहां से भगवान शिव का ससुराल स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब माता सती ने अपने प्राणों का त्याग किया था, तब भगवान शिव अत्यंत क्रोधित हो गए थे। इसी स्थान पर भगवान शिव ने अपने क्रोध से अपनी जटाओं से वीरभद्र को उत्पन्न किया था।
सतयुग का प्राचीन मंदिर
मंदिर के पुजारी राघव भारती के अनुसार, नीलेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास काफी पुराना है और यह सतयुग के समय से विद्यमान है। श्रावण मास के दौरान यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है और इस प्राचीन स्थान की महत्ता और भी अधिक बढ़ जाती है।
पूजा का विशेष फल
पुजारी राघव भारती का कहना है कि नीलेश्वर महादेव के दर्शन मात्र से ही भक्तों के कष्ट दूर हो जाते हैं। उनके अनुसार, इस मंदिर में केवल एक लोटा गंगाजल अर्पित करने से ही श्रद्धालु को साधारण पूजा की तुलना में हजार गुना अधिक पुण्य फल की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि दूर-दूर से श्रद्धालु यहां अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं।
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