14000 फीट की ऊंचाई पर चीन का बढ़ता दबाव, LAC के नजदीक रचा 'अदृश्य' चक्रव्यूह, क्या है भारत की काट?

अल्ट्रा-मॉडर्न ड्रोन तकनीक के उभरने से लड़ाकू विमानों की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं, और LAC के पास चीन की तैयारियों को देखते हुए भारत भी अपनी रणनीति को धार दे रहा है।

लड़ाकू विमानों के दौर पर मंडराता सवाल

फाइटर जेट को लेकर अमेरिका, चीन और भारत समेत दुनिया के तमाम ताकतवर देश आज भी अरबों डॉलर झोंक रहे हैं। लेकिन अल्ट्रा-मॉडर्न तकनीक से लैस ड्रोन सिस्टम के मैदान में आने के बाद आने वाले वर्षों में लड़ाकू विमानों की प्रासंगिकता पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।

सस्ते ड्रोन ने बढ़ाई बड़ी ताकतों की मुश्किल

ईरान और यूक्रेन की ओर से इस्तेमाल किए गए सस्ते ड्रोनों ने अमेरिका, इजरायल और रूस जैसी सैन्य शक्तियों को भी खासी परेशानी में डाल दिया है। इससे साफ है कि कम लागत वाली यह तकनीक बड़े-बड़े रक्षा तंत्रों के लिए सिरदर्द बन चुकी है।

पूर्ण ड्रोन युद्ध की ओर बढ़ती दुनिया

मौजूदा हालात पर गौर करें तो लगता है कि आने वाले दिनों में पूरी तरह से ड्रोन आधारित युद्ध यानी फुल फ्लेज्ड ड्रोन वॉरफेयर की शुरुआत हो सकती है। बदलते इस सैन्य परिदृश्य ने युद्ध के पारंपरिक तौर-तरीकों को नए सिरे से परिभाषित करना शुरू कर दिया है।

भारत की तैयारी

इन्हीं चुनौतियों को भांपते हुए भारत ने भी अपनी तैयारियों को मुकम्मल शक्ल देना शुरू कर दिया है। बदलते समीकरणों के बीच देश अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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