समस्तीपुर में नई पहल
समस्तीपुर के किसानों और स्वरोजगार के इच्छुक युवाओं के लिए एक बेहद सकारात्मक खबर सामने आई है। जिले में पहली बार कोल्ड प्रेस ऑयल मिल और पैकेजिंग यूनिट स्थापित करने की तैयारी पूरी कर ली गई है। यह पहल प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत शुरू की जा रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य स्थानीय किसानों को उनकी तिलहनी फसलों का उचित मूल्य सुनिश्चित कराना और ग्रामीण अंचल में छोटे स्तर के उद्योगों को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही, स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए रास्ते भी खुलेंगे।
बिहार के 24 जिलों में विस्तार
राज्य सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई है। इस योजना के तहत बिहार के कुल 24 जिलों में 123 कोल्ड प्रेस ऑयल मिल इकाइयों को मंजूरी दी गई है। सरकार इन इकाइयों की स्थापना पर लगभग 4.97 करोड़ रुपये की राशि खर्च करेगी। समस्तीपुर जिला भी इस योजना का मुख्य हिस्सा है, जहाँ किसान और नए उद्यमी सरकारी आर्थिक सहायता लेकर अपना खुद का तेल उद्योग स्थापित कर सकते हैं। यदि आवेदनों की संख्या तय लक्ष्य से अधिक होती है, तो पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष रखने के लिए लाभार्थियों का चयन लॉटरी प्रणाली के जरिए किया जाएगा।
कोल्ड प्रेस तकनीक और अनुदान का विवरण
जिला कृषि पदाधिकारी मनीष कुमार सिंह ने जानकारी दी है कि कोल्ड प्रेस तकनीक का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें कम तापमान पर बिना किसी हानिकारक रसायन के शुद्ध तेल निकाला जाता है। इससे सरसों, तिल और अन्य तिलहनी फसलों के तेल की पौष्टिकता और गुणवत्ता बरकरार रहती है। इस सरकारी योजना के तहत अनुदान का लाभ अलग-अलग वर्गों के लिए निर्धारित किया गया है:
- सामान्य वर्ग के लाभार्थियों के लिए 40 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान है।
- अनुसूचित जाति वर्ग के लाभार्थियों को 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा।
इस सुविधा से किसान अपनी उपज का प्रसंस्करण स्वयं कर सकेंगे, जिससे बाजार में बिचौलियों पर उनकी निर्भरता काफी हद तक कम हो जाएगी। पैकेजिंग यूनिट की सुविधा मिलने से किसान अपना स्थानीय ब्रांड भी विकसित कर पाएंगे, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई मजबूती देगा।
आवेदन प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेज
जो किसान या उद्यमी इस योजना का लाभ उठाने के इच्छुक हैं, उन्हें कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन प्रक्रिया के लिए निम्नलिखित शर्तों का पालन करना अनिवार्य है:
- आवेदक के पास उद्योग लगाने के लिए उपयुक्त भूमि और भवन होना चाहिए।
- आवश्यक बुनियादी ढांचा तैयार रखना होगा।
- उद्यम पंजीकरण, जीएसटी और एफएसएसएआई लाइसेंस अनिवार्य रूप से पास होने चाहिए।
प्राप्त सभी आवेदनों की गहन जांच जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय समिति द्वारा की जाएगी। आवेदकों को सलाह दी गई है कि वे अपने सभी आवश्यक दस्तावेज समय रहते तैयार रखें ताकि आवेदन शुरू होते ही वे बिना किसी परेशानी के प्रक्रिया पूरी कर सकें। यह योजना न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होगी, बल्कि युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी।
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