घरों में छिपा है एक साइलेंट किलर
आजकल के दौर में कई ऐसी चीजें हमारे घरों में मौजूद रहती हैं, जिन्हें हम मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि खेतों में इस्तेमाल होने वाला एक सामान्य सा दिखने वाला खरपतवार नाशक यानी हर्बिसाइड आपके और आपके परिवार के लिए काल बनकर बैठ सकता है? पटना के प्रतिष्ठित जय प्रभा मेदांता सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल के इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिटिकल केयर एंड एनेस्थीसियोलॉजी के डायरेक्टर डॉ. किशोर झुनझुनवाला ने इस विषय पर बेहद चिंताजनक खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि पैराक्वाट नामक रसायन अब युवाओं और अन्य लोगों की जान का दुश्मन बन चुका है।
क्या है यह पैराक्वाट और क्यों है इतना घातक?
पैराक्वाट मुख्य रूप से कृषि कार्यों में खरपतवार को खत्म करने के लिए उपयोग किया जाने वाला एक हर्बिसाइड है। हालांकि यह खेती के लिए बना है, लेकिन आसानी से उपलब्ध होने के कारण यह अब कई घरों में पहुंच चुका है। डॉ. किशोर झुनझुनवाला के अनुसार, यह रसायन अत्यंत घातक है। सबसे डरावनी बात यह है कि इसकी 5 एमएल की मामूली मात्रा भी किसी इंसान की जान लेने के लिए पर्याप्त है। यदि कोई व्यक्ति किसी तनावपूर्ण स्थिति या आवेश में आकर इसका सेवन कर लेता है, तो उसे बचाना चिकित्सा विज्ञान के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन जाता है।
मामूली विवाद बना मौत का कारण
अस्पताल में आने वाले मरीजों के आंकड़े बताते हैं कि कैसे छोटी-छोटी बातें लोगों को इस घातक कदम तक ले जा रही हैं। डॉ. झुनझुनवाला ने बताया कि पिछले महीने ही 18 साल के दो-तीन किशोर अस्पताल में भर्ती कराए गए थे। उनके साथ क्या हुआ था? मोबाइल गेम्स खेलने को लेकर पिता ने उन्हें थोड़ी फटकार लगा दी थी। बस, इसी छोटी सी नाराजगी और आवेश में आकर उन्होंने घर में रखा पैराक्वाट पी लिया। चिकित्सकों ने उन्हें बचाने की तमाम कोशिशें कीं, आधुनिक से आधुनिक इलाज मुहैया कराया गया, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उन युवाओं की जान नहीं बचाई जा सकी।
शरीर के अंगों पर हमला
पैराक्वाट का असर शरीर के आंतरिक अंगों पर विनाशकारी होता है। डॉक्टर ने बताया कि जैसे ही कोई इसका सेवन करता है, यह सीधे लिवर और किडनी पर हमला करता है। साथ ही सांस लेने में भारी दिक्कत महसूस होने लगती है। सबसे खतरनाक बात यह है कि इलाज के शुरुआती चरणों में मरीज होश में रहता है और कभी-कभी रिपोर्ट में लिवर और किडनी के कार्य में मामूली सुधार भी दिखने लगता है, लेकिन यह केवल भ्रम होता है। दरअसल, इसके बाद यह फेफड़ों को निशाना बनाना शुरू करता है।
फेफड़ों का सिकुड़ना है सबसे बड़ी समस्या
डॉक्टर ने स्पष्ट किया कि पैराक्वाट फेफड़ों को अंदर से पूरी तरह तबाह कर देता है। धीरे-धीरे फेफड़े सिकुड़ने लगते हैं और उनमें हवा भरने की क्षमता खत्म हो जाती है। परिणाम यह होता है कि शरीर में ऑक्सीजन की भारी कमी हो जाती है और मरीज तड़प-तड़प कर रह जाता है। इस स्थिति में मरीज के बचने की उम्मीद लगभग खत्म हो जाती है और एक से दो महीने के भीतर व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है।
कोई एंटीडोट उपलब्ध नहीं है
इस जहर की सबसे बड़ी विभीषिका यह है कि मेडिकल साइंस के पास इसका कोई प्रभावी एंटीडोट मौजूद नहीं है। डॉक्टर ने बताया कि वेंटिलेटर और गहन चिकित्सा के जरिए केवल समय बढ़ाने की कोशिश की जा सकती है, लेकिन रिकवरी संभव नहीं है। देश के कई बड़े मेडिकल सेंटरों पर ऐसे मरीजों का लंग ट्रांसप्लांट करने की कोशिश भी की गई, लेकिन वहां भी कोई सफलता हाथ नहीं लगी।
सरकार ने भी लगाई है रोक
इतनी भयावह स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने पैराक्वाट के उत्पादन, बिक्री और उपयोग पर आधिकारिक रूप से प्रतिबंध लगा दिया है। हालांकि, अभी भी बड़ी संख्या में घरों में इसका पुराना स्टॉक रखा हो सकता है। डॉ. किशोर झुनझुनवाला ने सभी नागरिकों से पुरजोर अपील की है कि यदि उनके घर में यह रसायन कहीं भी रखा है, तो उसे तुरंत नष्ट कर दें। इसे अपने घर से बाहर करना ही आप और आपके अपनों की सुरक्षा की पहली शर्त है। इस खतरनाक हर्बिसाइड को मार्केट से पूरी तरह खत्म करने में आम लोगों की जागरूकता और सहयोग की बहुत जरूरत है।
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