कबड्डी के मैदान से नेशनल कुश्ती तक का सफर, कोच की एक सलाह ने बदल दी संदीप पाठक की तकदीर

बिहार के गया जिले के रहने वाले संदीप पाठक कभी कबड्डी के मंझे हुए खिलाड़ी थे, लेकिन एक कोच की सलाह ने उन्हें कुश्ती के अखाड़े का नेशनल चैंपियन बना दिया।

गया के बेटे का खेल के मैदान में कमाल

बिहार के गया जिले के चाकंद गांव से ताल्लुक रखने वाले संदीप पाठक आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। राष्ट्रीय स्तर के पहलवान के रूप में अपनी पहचान बना चुके संदीप ने अपने खेल से देश का नाम रोशन किया है। एक साधारण ब्राह्मण परिवार में जन्मे संदीप का सफर काफी प्रेरणादायक रहा है। दिलचस्प बात यह है कि खेल की दुनिया में कदम रखने वाले संदीप का रुझान शुरुआत में कुश्ती की तरफ बिल्कुल नहीं था, बल्कि वह कबड्डी के बेहतरीन खिलाड़ी हुआ करते थे।

कबड्डी से कुश्ती की ओर मोड़

संदीप के खेल करियर की शुरुआत उनके स्कूली दिनों में हुई थी। उस समय वह कबड्डी के मैदान में अपनी फुर्ती और ताकत का लोहा मनवाते थे। दुबले-पतले होने के बावजूद, संदीप कबड्डी में अपने से कहीं ज्यादा वजन वाले खिलाड़ियों को भी आसानी से पटखनी दे देते थे। उनकी आक्रामकता और फुर्ती को देखकर उनके कोच ने उन्हें एक अहम सलाह दी। कोच ने उन्हें कबड्डी के बजाय कुश्ती में अपने करियर को आगे बढ़ाने का सुझाव दिया। यही वह पल था जिसने संदीप की जिंदगी बदल दी। उन्होंने कोच की बात मानी और कबड्डी को छोड़कर कुश्ती के दांव-पेंच सीखने शुरू कर दिए।

मिट्टी के अखाड़े से मैट तक

कुश्ती में अपनी शुरुआत को याद करते हुए संदीप बताते हैं कि उन्होंने बुनियादी प्रशिक्षण गया के विष्णुपद क्षेत्र में स्थित संगत अखाड़ा में मिट्टी पर लिया था। बिना किसी पूर्व अनुभव के, जब वह पहली बार जिला स्तरीय कुश्ती प्रतियोगिता में उतरे, तो उन्होंने सीधा गोल्ड मेडल जीता। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। जिला, प्रमंडल और राज्य स्तर की बाधाओं को पार करते हुए उन्होंने जल्द ही नेशनल स्तर पर अपनी जगह बना ली। अपनी शारीरिक क्षमता को निखारने के बाद उन्होंने मैट पर होने वाली कुश्ती के लिए खुद को पूरी तरह तैयार किया।

बांग्लादेश में हासिल की बड़ी उपलब्धि

संदीप पाठक की मेहनत का फल उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी मिला। साल 2023 में बांग्लादेश की राजधानी ढाका में आयोजित साउथ एशियन सैंबो कुश्ती चैंपियनशिप में उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया। इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में संदीप ने शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया। उस दौरान वह अपने वर्ग में भारत की ओर से भाग लेने वाले इकलौते पहलवान थे, जिससे उनकी इस जीत का महत्व और अधिक बढ़ गया।

15 से ज्यादा नेशनल चैंपियनशिप और भविष्य की राह

संदीप पाठक अब तक 15 से अधिक नेशनल कुश्ती चैंपियनशिप में शिरकत कर चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने सब-जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने का गौरव भी हासिल किया है। उनकी इन उपलब्धियों को देखते हुए अब उन्हें बिहार सरकार की मेडल लाओ नौकरी पाओ योजना के अंतर्गत सरकारी नौकरी मिलने की भी पूरी उम्मीद है।

नई पीढ़ी को तैयार कर रहे संदीप

वर्तमान में संदीप पाठक केवल अपनी कुश्ती तक ही सीमित नहीं हैं। वह गया के खेल परिसर में स्थित खेलो इंडिया मिनी ट्रेनिंग सेंटर में नए और जूनियर खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में कई युवा पहलवान तैयार हो रहे हैं, जिन्होंने जूनियर वर्ग में नेशनल स्तर पर खेलकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है। इस प्रकार, संदीप न केवल एक सफल खिलाड़ी हैं, बल्कि एक कुशल कोच के रूप में भी खेल को नई दिशा देने का कार्य कर रहे हैं।

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