राजस्थान में ई-मित्र की आड़ में 40 करोड़ का साइबर घोटाला, 18 महीने में खड़ा किया ठगी का साम्राज्य

झुंझुनूं के मुकुंदगढ़ में एक ई-मित्र संचालक द्वारा आम लोगों के बायोमेट्रिक का गलत इस्तेमाल कर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करने का मामला सामने आया है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर उसके पास से बड़ी मात्रा में बैंक दस्तावेज और तकनीकी उपकरण बरामद किए हैं।

झुंझुनूं में साइबर फ्रॉड का बड़ा खुलासा

राजस्थान के झुंझुनूं जिले के मुकुंदगढ़ कस्बे से साइबर धोखाधड़ी का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है। मुकुंदगढ़ में ई-मित्र और कस्टमर सर्विस पॉइंट संचालित करने वाले एक व्यक्ति ने महज 18 महीने के भीतर 40 करोड़ रुपये से अधिक का साइबर फ्रॉड नेटवर्क तैयार कर लिया। आरोपी ई-मित्र सेवा की आड़ में आम नागरिकों के निजी दस्तावेजों और उनके बायोमेट्रिक अंगूठे का गलत इस्तेमाल कर साइबर अपराधियों के लिए रकम ट्रांसफर करने का जरिया बना हुआ था। इस सनसनीखेज घटना ने राज्य भर के ई-मित्र संचालकों और आम जनता की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या कुछ बरामद हुआ?

पुलिस की जांच में आरोपी के पास से साक्ष्यों का एक बड़ा जखीरा मिला है। पुलिस ने आरोपी के ठिकाने से 2.68 लाख रुपये नकद, 2 लैपटॉप, 1 मोबाइल फोन, 17 एटीएम कार्ड, 92 बैंक पासबुक, 7 चेकबुक, 38 आधार कार्ड और एक माइक्रो एटीएम मशीन बरामद की है। इस कार्रवाई को पुलिस अधीक्षक कावेंद्र सिंह सागर के दिशा-निर्देशों के तहत अंजाम दिया गया। इस पूरे ऑपरेशन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक देवेंद्र सिंह राजावत, सीओ सुगन सिंह, साइबर थाना प्रभारी रामखिलाड़ी मीणा, मुकुंदगढ़ थानाधिकारी गोपाल सिंह थालोर और साइबर थाना प्रभारी गोपाल लाल जांगिड़ के नेतृत्व वाली संयुक्त टीम ने अहम भूमिका निभाई है।

इस तरह शुरू हुई साइबर ठगी

इस बड़े घोटाले का खुलासा 4 अगस्त 2026 को मुकुंदगढ़ के रहने वाले अक्षय की शिकायत के बाद हुआ। अक्षय ने बताया कि वह 10 अप्रैल 2025 को अंकित नाम के ई-मित्र संचालक के पास अपनी SSO ID बनवाने गया था। वहां आरोपी ने आधार और पैन कार्ड लेकर पीड़ित का करीब 15 से 20 बार बायोमेट्रिक अंगूठा लगवाया। आरोपी ने उसे करीब 4 से 5 घंटे तक केंद्र पर बिठाए रखा और इस दौरान पीड़ित के मोबाइल पर फिनो पेमेंट बैंक के संदेश आते रहे, जिन्हें आरोपी ने खुद ही हटा दिया। अंत में सर्वर डाउन होने का बहाना बनाकर उसे लौटा दिया गया। जांच में पता चला कि आरोपी ने अक्षय की जानकारी के बिना उसके नाम से बैंक खाता खोल लिया था, जिसका इस्तेमाल बाद में साइबर अपराध के लिए किया गया।

16 खातों के जरिए 40 करोड़ का ट्रांजेक्शन

पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपी अंकित कुमार, जो कि मुकुंदगढ़ के कसेरू का निवासी है, के स्वयं के 16 बैंक खातों में 40 करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन हुआ है। जब्त की गई 92 बैंक पासबुकों की पड़ताल में देश के अलग-अलग राज्यों में 16 साइबर शिकायतों का लिंक भी मिला है। आरोपी अपने सीएसपी सेंटर के जरिए साइबर अपराधियों से ठगी की रकम लेता था और बदले में कमीशन काटकर उसे नकद में ट्रांसफर कर देता था, जिससे गिरोह को पैसा ठिकाने लगाने में आसानी होती थी। गौरतलब है कि जुलाई महीने में भी राजस्थान साइबर क्राइम पुलिस ने ऑनलाइन ट्रेडिंग और निवेश के नाम पर 500 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने वाले एक मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया था।

सहआरोपियों की तलाश और आगे की जांच

पुलिस ने मुख्य आरोपी अंकित कुमार को गिरफ्तार कर लिया है और अब उससे पूछताछ की जा रही है। पुलिस उसके उन साथियों की तलाश कर रही है जो इस पूरे साइबर नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि करोड़ों रुपये की ठगी से अर्जित की गई यह राशि आखिर कहां भेजी जा रही थी और इसके पीछे कौन-कौन से बड़े गिरोह सक्रिय हैं। पुलिस का मानना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, इस धोखाधड़ी में और भी बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।

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