विमल कुमार हत्याकांड में SIT का सनसनीखेज खुलासा
बिहार के रोहतास जिले में डेहरी-डालमियानगर नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी यानी EO विमल कुमार की हत्या ने पूरे राज्य को स्तब्ध कर दिया था। इस चर्चित हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने के लिए गठित विशेष जांच दल यानी SIT ने मामले में एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा किया है। पुलिस की ओर से जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस वारदात को किसी बाहरी अपराधी ने नहीं, बल्कि मृतक EO के अपने ही ड्राइवर मिथलेश कुमार ने अंजाम दिया था। पुलिस की पूछताछ में ड्राइवर ने अपने जुर्म को स्वीकार कर लिया है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से सामने आई हत्या की भयावह सच्चाई
जांच के क्रम में मेडिकल बोर्ड द्वारा तैयार की गई पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मामले की दिशा पूरी तरह बदल गई है। सिविल सर्जन डॉ. मणिराज रंजन ने इस रिपोर्ट के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि विमल कुमार के शव पर कहीं भी गोली का निशान या किसी धारदार हथियार से हमले का प्रमाण नहीं मिला है। उनके शरीर के महत्वपूर्ण अंगों जैसे सिर, गर्दन, सीना, पसलियों, फेफड़ों और लिवर पर गंभीर चोटों के निशान पाए गए हैं। डॉक्टरों का स्पष्ट मानना है कि विमल कुमार की मौत किसी भारी और कुंद वस्तु से लगी चोटों के कारण हुई है। यह रिपोर्ट ड्राइवर द्वारा दिए गए बयानों की पुष्टि करती है।
पेशाब को लेकर विवाद और ड्राइवर की नाराजगी
पुलिस के अनुसार, हत्या के पीछे का कारण बेहद सामान्य लेकिन चौंकाने वाला है। आरोपी चालक मिथलेश कुमार काफी समय से विमल कुमार के व्यवहार से नाखुश था और वह अपनी छुट्टी न मिल पाने के कारण भी मानसिक तनाव में था। पुलिस की पूछताछ में यह बात सामने आई है कि घटना के दिन जब वे डेहरी से पटना की ओर जा रहे थे, तब रास्ते में पेशाब करने को लेकर विमल कुमार और ड्राइवर के बीच तीखी बहस हो गई। यह बहस इतनी बढ़ गई कि चालक ने अपना आपा खो दिया और वारदात की साजिश रच डाली।
रॉड से हमला और फिर कार चढ़ाने की बर्बरता
पुलिस की जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी ने बारुण-दाउदनगर नहर मार्ग पर सुनसान जगह देखकर कार को रोक दिया। इसके बाद ड्राइवर ने कार की डिक्की से टायर खोलने वाला लिवर पाइप यानी लोहे की रॉड निकाली और विमल कुमार पर हमला कर दिया। आरोपी ने उनके सिर पर रॉड से कई बार प्रहार किए, जिससे वे बेहोश होकर गिर पड़े। अपनी दरिंदगी की हद पार करते हुए आरोपी ने बेहोश विमल कुमार के ऊपर कार चढ़ा दी। इसके बाद उसने घायल अधिकारी को वापस गाड़ी में बिठाया और उन्हें सड़क के किनारे एक गड्ढे में छोड़कर फरार हो गया। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर नहर से वह लोहे की रॉड भी बरामद कर ली है, जिसका इस्तेमाल वारदात में किया गया था।
तकनीकी साक्ष्यों और जांच की वर्तमान स्थिति
SIT ने केवल ड्राइवर के इकबालिया बयान पर ही निर्भरता नहीं रखी है, बल्कि मामले की जड़ तक पहुँचने के लिए तकनीकी पहलुओं का भी सहारा लिया जा रहा है। पुलिस द्वारा घटनास्थल के टावर डंप की बारीकी से जांच की जा रही है। घटना से जुड़े सभी संदिग्ध व्यक्तियों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड यानी CDR और इंटरनेट प्रोटोकॉल डिटेल रिकॉर्ड यानी IPDR का विश्लेषण किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, डेहरी से लेकर घटनास्थल तक के मार्ग पर लगे सभी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को खंगाला जा रहा है। SIT यह भी सुनिश्चित कर रही है कि क्या इस घटना में ड्राइवर के अलावा किसी और की संलिप्तता थी या नहीं। नगर परिषद कार्यालय के अन्य कर्मचारियों से भी पूछताछ की जा रही है ताकि विमल कुमार के कामकाज और उनके व्यवहार संबंधी पहलुओं का सही पता चल सके।
घटना की पृष्ठभूमि और प्रारंभिक आशंकाएं
याद दिला दें कि 1 अगस्त की रात को यह दुखद घटना औरंगाबाद जिले के बारुण थाना क्षेत्र के अंतर्गत हुई थी। शुरुआती जांच में यह कयास लगाए जा रहे थे कि रास्ते में बदमाशों ने गाड़ी रुकवाकर इस हत्याकांड को अंजाम दिया है। लेकिन SIT की गहन जांच ने उन सभी शुरुआती दावों को खारिज कर दिया है। पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और जैसे ही कोई नया साक्ष्य या तथ्य सामने आएगा, SIT उसी के अनुसार अपनी अगली कार्रवाई को अंजाम देगी। फिलहाल पूरे मामले में पुलिस की पकड़ मजबूत है और सभी पहलुओं की सूक्ष्म जांच की जा रही है।
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