रेव पार्टी पर बरती गई ढिलाई पड़ी भारी
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के कसोल में आयोजित रेव पार्टी को लेकर प्रशासन की विफलता का मामला तूल पकड़ गया है। इस पूरे प्रकरण में डीसी अनुराग चंद्र शर्मा और एसपी मदन लाल कौशल के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए उनका तबादला कर दिया गया है। राज्य की सुक्खू सरकार को हाईकोर्ट के आदेशों का अनुपालन करते हुए यह फैसला लेने के लिए मजबूर होना पड़ा, क्योंकि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से भी सरकार को कोई ठोस राहत नहीं मिल सकी थी। गृह विभाग की ओर से इस संदर्भ में बुधवार को आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है।
कौन बने हैं कुल्लू के नए पुलिस अधीक्षक
प्रशासनिक फेरबदल के तहत आईपीएस अधिकारी अभिषेक एस को कुल्लू जिले का नया पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया है। अभिषेक एस वर्ष 2019 बैच के अधिकारी हैं। अपनी नई जिम्मेदारी संभालने से पहले, वे पुलिस मुख्यालय शिमला में एसपी (लॉ एंड ऑर्डर) के पद पर तैनात थे। इसके साथ ही वे एसपी साइबर क्राइम (सीआईडी) का अतिरिक्त कार्यभार भी संभाल रहे थे। जनहित में लिए गए इस निर्णय के बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से अपनी नई पोस्टिंग जॉइन करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, वर्तमान में पदस्थ रहे एसपी कुल्लू मदन लाल-II को तत्काल प्रभाव से पुलिस मुख्यालय शिमला में रिपोर्ट करने के लिए कहा गया है। जहां तक डीसी कार्यालय की बात है, कुल्लू के डीसी का अतिरिक्त प्रभार फिलहाल कुल्लू एसडीएम द्वारा संभाला जाएगा।
हाईकोर्ट की सख्ती और सुप्रीम कोर्ट का रुख
यह पूरा मामला जून महीने में कसोल में आयोजित हुई रेव पार्टी से जुड़ा है। जून के महीने में 4 तारीख से 11 तारीख तक कसोल में बड़े पैमाने पर रेव पार्टी का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला हाईकोर्ट की दहलीज तक जा पहुंचा था। हाईकोर्ट ने जब इस संबंध में रिपोर्ट मांगी, तो खुलासा हुआ कि पार्टी के दौरान नशीले पदार्थों का बड़े पैमाने पर सेवन किया गया था, जबकि प्रशासन और पुलिस मूकदर्शक बनी रही। इस गंभीर लापरवाही को देखते हुए हाईकोर्ट ने न केवल एसपी और डीसी को एक सप्ताह के भीतर स्थानांतरित करने के आदेश दिए थे, बल्कि इन अधिकारियों पर कानूनी मामला दर्ज करने की भी बात कही थी।
सरकार की मजबूरी और प्रशासनिक कार्रवाई
हाईकोर्ट के इन आदेशों के खिलाफ सुक्खू सरकार सुप्रीम कोर्ट गई थी। सरकार को वहां से आंशिक राहत तो जरूर मिली, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने इन अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेशों पर रोक लगा दी थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों के तबादले से जुड़े हाईकोर्ट के निर्देशों पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया। नतीजतन, सरकार को विवश होकर कुल्लू के डीसी और एसपी को हटाना पड़ा। यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि स्थानीय स्तर पर पुलिस ने पार्टी के लिए साउंड सिस्टम लगाने की अनुमति दी थी, लेकिन आयोजन के स्वरूप और वहां बरती गई लापरवाही ने पूरे प्रशासनिक ढांचे की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए थे।
क्या है अधिकारियों का पिछला रिकॉर्ड
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रशासन ने पहले इसे महज ध्वनि विस्तारक यंत्रों की अनुमति के तौर पर पेश किया था। लेकिन जांच में सामने आए तथ्यों ने इस दावे की पोल खोल दी। फिलहाल, अब नए अधिकारियों के कार्यभार संभालने के साथ ही यह उम्मीद जताई जा रही है कि क्षेत्र में कानून-व्यवस्था और नशीले पदार्थों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। कुल्लू के निवासियों और प्रशासन के बीच यह मामला लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ है।
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