हरियाणा पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को संगठित अपराध और गैंगस्टरों के खिलाफ चलाए जा रहे अपने विशेष अभियान में एक और बहुत बड़ी सफलता मिली है। विदेशों में बैठकर भारत के विभिन्न राज्यों में दहशत का कारोबार करने वाले कौशल-बंबीहा गिरोह के एक बेहद सक्रिय और कुख्यात सदस्य गौरव गडोली को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से सफलतापूर्वक प्रत्यर्पित कराकर भारत लाया गया है। दिल्ली-एनसीआर से लेकर कई राज्यों की पुलिस के लिए सिरदर्द बन चुके इस अपराधी को भारत लाते ही STF ने अपनी हिरासत में ले लिया है।
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस बड़ी कार्रवाई के बारे में जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 में हरियाणा STF द्वारा किया गया यह 13वां सफल प्रत्यर्पण है। यह कार्रवाई दिखाती है कि भारतीय कानून व्यवस्था की पहुंच अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कितनी मजबूत हो चुकी है। गिरफ्तार किया गया गौरव गडोली कोई आम अपराधी नहीं है, बल्कि वह जेल में बंद खूंखार गैंगस्टर कौशल चौधरी का सगा साला है। वह लंबे समय से विदेश में सुरक्षित ठिकाना बनाकर भारत में अपने गिरोह की रंगदारी, हत्या के प्रयास और अन्य आपराधिक गतिविधियों को संचालित कर रहा था।
गैंग के भीतर ‘HR’ की भूमिका और बहन के साथ साझेदारी
मामले की जांच कर रहे अधिकारियों ने गौरव गडोली के गिरोह के संचालन के तरीके को लेकर कई महत्वपूर्ण खुलासे किए हैं। जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि गौरव और उसकी सगी बहन मनीषा गिरोह के भीतर नए लड़कों की भर्ती करने यानी ‘HR’ (ह्यूमन रिसोर्स) की भूमिका निभाते थे। मनीषा कुख्यात गैंगस्टर कौशल चौधरी की पत्नी है और पुलिस को उसके भी इस गिरोह में एक बेहद ‘सक्रिय सहयोगी’ के तौर पर काम करने का गहरा संदेह है।
यह भाई-बहन की जोड़ी न केवल नए कम उम्र के लड़कों को गुमराह कर गिरोह में शामिल करती थी, बल्कि पूरे गैंग के वित्तीय तंत्र यानी पैसों के लेन-देन, जबरन वसूली से आए धन के प्रबंधन और उसे ठिकाने लगाने का काम भी संभालती थी। किसी भी आपराधिक संगठन को चलाने के लिए यह दोनों ही काम सबसे बुनियादी और महत्वपूर्ण होते हैं, जिन्हें गौरव गडोली बेहद शातिर तरीके से अंजाम दे रहा था।
चार राज्यों में ‘डब्बा कॉल्स’ से जबरन वसूली का जाल
पुलिस अधिकारी ने बताया कि पिछले तीन वर्षों से गौरव गडोली विदेश में बैठे एक अन्य बड़े गैंगस्टर पवन शौकीन के संपर्क में था। वह पवन शौकीन के इशारे पर भारत में जबरन वसूली के लिए डब्बा कॉल्स की सुविधा प्रदान करता था। डब्बा कॉल्स ऐसी कॉल होती हैं जिनका कोई तकनीकी सुराग नहीं मिलता और इन्हें पुलिस द्वारा आसानी से ट्रेस नहीं किया जा सकता। इन कॉल्स का सहारा लेकर गौरव ने दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में आतंक का माहौल बना रखा था। इन राज्यों के व्यापारियों, उद्योगपतियों और रसूखदार लोगों से रंगदारी वसूलने की साजिश गौरव ही रचता था। वर्तमान में उसके खिलाफ रंगदारी, हत्या के प्रयास, शस्त्र अधिनियम और संगठित अपराध के कुल छह संगीन मामले दर्ज हैं।
फर्जी पासपोर्ट के जरिए लखनऊ हवाई अड्डे से हुआ था फरार
STF द्वारा आरोपी के पुराने यात्रा इतिहास की जांच करने पर पता चला कि जब भारत में पुलिस ने उस पर दबाव बढ़ाया, तो उसने देश छोड़ने की योजना बनाई। वह 30 नवंबर 2023 को साहिल यादव के नाम से फर्जी तरीके से बनवाए गए पासपोर्ट का इस्तेमाल कर लखनऊ हवाई अड्डे से विमान के जरिए दुबई भागने में कामयाब हो गया था। तब से वह संयुक्त अरब अमीरात में छिपकर भारतीय धरती पर अपने गुर्गों के जरिए वारदातें करवा रहा था।
अंतरराष्ट्रीय और केंद्रीय एजेंसियों का संयुक्त अभियान
हरियाणा STF के आईजी (IG) बी. सतीश बालान ने इस बड़ी सफलता पर बयान जारी किया है। उन्होंने बताया कि इस कुख्यात गैंगस्टर को कानून के दायरे में लाना बेहद चुनौतीपूर्ण था। उसे 14 अक्टूबर 2022 को अदालत द्वारा भगोड़ा घोषित किया गया था और उसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (LOC) भी जारी किया गया था। गौरव को पकड़ने के लिए हरियाणा पुलिस ने भारत के नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) नई दिल्ली और विदेश मंत्रालय (MEA) के साथ मिलकर एक बेहद सक्रिय और निरंतर चलने वाला समन्वय अभियान चलाया।
इसी सतत प्रयासों और अंतरराष्ट्रीय तालमेल की मदद से गौरव को संयुक्त अरब अमीरात में खोजा गया, हिरासत में लिया गया और अंततः सोमवार को उसे प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया। IG बी. सतीश बालान ने जोर देकर कहा कि गौरव गडोली का यह सफल प्रत्यर्पण संगठित अपराध के खिलाफ हमारी जारी जंग में एक बेहद महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और आने वाले समय में भी ऐसे अभियान लगातार जारी रहेंगे।
इससे पहले भी इसी साल 10 अप्रैल को कौशल-बंबीहा गिरोह के ही एक और बड़े सहयोगी साहिल चौहान को थाईलैंड से भारत प्रत्यर्पित किया गया था। साहिल चौहान के खिलाफ हत्या और रंगदारी जैसे जघन्य अपराधों के कुल 16 मामले दर्ज थे। सुरक्षा एजेंसियों की यह लगातार बड़ी अंतरराष्ट्रीय कार्रवाइयां गैंगस्टरों के मनोबल को पूरी तरह तोड़ने वाली साबित हो रही हैं।
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